प्रणम्य शिरसा देवं , गौरी पुत्रं विनायकं ,
भक्तावासम , स्मरेन्नित्यं , आयुष कामार्थ सिद्धये !
प्रथम वक्रतुन्दम च , एकदंतं , द्वितीयकम ,
तृतीयं कृष्नापिन्दाक्षम , गजवक्त्रं चतुर्थकम !
लम्बोदरं पंचम च , षष्टम विकटमेव च ,
सप्तम विघ्नाराजेंद्रम , धुम्रवार्नाम तथाष्टमम !
नवं भाल्चंद्रम च ,दशमे तू विनायकं ,
एकादशं गंपतिम , द्वादशं तु गजाननं !
द्वादाश्शैतानी , नमानी , त्रिसंध्या ये पठेन्नरः ,.
न च विघ्नाभायास्य तस्य , सर्वसिद्धि करम परम !
विद्यार्थी लभते विद्याम , पुत्रार्थी लभते पुत्रान,
धनार्थी लभते धनं , मोक्षार्थी लेते गतिम् ।!
जपेद गणपति स्तोत्रं , षड्भिरमासे फलं लभेत ,
संवत्सरें सिद्धिश च , लभते नात्र शंशय : !
अश्ताभ्यो, ब्रह्मनेभ्याश्च लिखित्वा यह समर्पयेत
तस्य विद्या भवेद सर्वा , गणेशस्य प्रसदात्तः !
1-वक्रतुंड
2-एकदंत
3-क्रिश्नापिन्दाक्षम
4-गजवक्त्रं
5-लम्बोदरं
6-विकट
7-विघ्नाराजेंद्रम
8-धुम्रवर्ण
9-भाल्चंद्रम
10-विनायक
11-गणपति
12-गजानन
नारदपुराण से लिया गया ' संकटमोचन' गणेश स्तोत्र !
Dearest ZEAL:
ReplyDeleteBeautiful.
Ganpati Dev ki aaraadhnaa se sarv kaarya mangal ho jaate hain
Yeh Ganesh Stotra kaa paath karnaa ek nityakram hain
I just read it 5 times
Arth kaa
Nat-mastak, charan sparsh
P. S.: May be all the people cribbing and nagging you to write in Hindi will feel better now. Zmiles. Party time !!
...दिव्या जी ... आप भी पहुंची हुई महान आत्मा लग रही हैं ... सीधा संस्क्रत भाषा ... बधाई हो बधाई!!!
ReplyDeleteगजाननं भूत गणादी सेवितं, कपित जम्बू फल चारू भक्षणं , उमासुतं शोक विनाश कारकं, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम .
ReplyDeleteप्रथम देव की पूजा , सब कुछ सिद्ध होना चाहिए ! शुभकामनायें !
ReplyDeleteबहुत अच्छा किया आपने यह पोस्ट करके, पर निवेदन है कि कृपया वर्तनी त्रुटियों को दूर कर दें.
ReplyDeleteमुझे लगता है कि आपने गूगल आईएमई से टाइप किया है सो कुछ अशुद्धियां आ गयी हैं, गणपति की कृपा से दूर हो जाएंगी. प्रयास सफल रहे ऐसी हमारी शुभकामना है.
बहुत खूब ।
ReplyDeleteहमारे लिए तो बिल्कुल नई जानकारी है ।
बहुत ही सुंदर .........और श्रीगणेश के लिए इससे उपयुक्त और हो भी क्या सकता था । शुभकामनाएं ।
ReplyDeleteबहुत खूब। दुर्गाशप्तशती में दुर्गा जी के बत्तीस नामों के विषय में जाना था। अब आपसे गणेश जी के विषय में। शुकिया। वैसे संस्कृत में पहला ब्लॉग पढ़ रहा हूं। बहुत अच्छा।
ReplyDeleteArth ji, Glad to know you read it five times daily.It was a beautiful sharing.
ReplyDeleteUday ji, A giant leap.
Ashish ji,nice lines you quoted. From where it has been taken, kindly mention.
Satish ji,thanks for the well wishes. Let's hope the best.Your words encourage me.
Himanshu ji,I tried hard for getting the correct words phonetically, but failed. Still i will try better in future.
Dr Daral, glad to know you liked it.
Ajay ji,thanks
Pankaj ji,thanks
वाह!
ReplyDeleteपढ़ा था .. मगर आपका लिखा आपके ब्लॉग पर पढ़ना सुखद लगा. दुनियाँ के कोने-कोने में गणपति के मंत्र गूँजे तो दुनियाँ वैसे ही सुंदर हो जायेगी.
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटी समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु में देव सर्वकार्येषु सर्वदा
दुनियाँ के कोने-कोने में गणपति के मंत्र गूँजे तो दुनियाँ वैसे ही सुंदर हो जायेगी.
ReplyDeleteSahi kaha Bechain ji.
दिव्या जी, वो पंक्तिया मुझे खुद नहीं पाता है कहा से उद्घृत है , क्योकि मै उन पंक्तियों को बचपन में पिता जी से सुनता था और फिर मै भी गुनगुनाने लगा .ढूंढता हूँ कहा से उद्घृत है
ReplyDeleteदुर्गा जी के ३२ नाम और १०८ नाम तथा विष्णु भगवान के २८ दिव्य नाम( मत्स्य, कूर्म, वराह, वामन, जनार्दन, गोविन्द , पुण्डरीकाक्ष,माधव,मधुसूदन, पद्मनाभ, सहस्त्राक्ष, वनमाली,हलायुध, गोवर्धन, हृषीकेश, वैकुण्ठ, पुरुषोत्तम, विश्वरूप, वासुदेव, राम, नारायण, हरि, दामोदर, श्रीधर, वेदांग, गरुडध्वज, अनंत और कृष्णगोपाल) संबंधी स्तुतियाँ तो मालूम थी आज आपके प्रयासों से गणेश जी के बारह नामों वाले इस स्तोत्र की जानकारी भी मिली. धन्यवाद.
ReplyDeletezaroor bataiyega Ashish ji.
ReplyDeleteHen ji..Dhanyawaad.
baba re! itna dahrmik to mai abhi tak nai hua ki saara kuchh baanch lun.......shukriya lekin padhwane ke liye, yad ki ki ab se pahle itna kab padhaa tha.....
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteपिछले साल जब दिवाली पे घर गया था तो मम्मी ने एक दो स्तोत्र पढवाया था...याद नहीं अभी लेकिन...
ReplyDeleteऔर दुर्गा माँ के नाम के भी पढ़े थे हमने...
आज गणेश भगवान के बारे में भी जान लिए...
बहुत सुन्दर...अपनी माँ को जरूर ये दिखाऊंगा
@-Sanjeet ,
ReplyDelete@baba re! itna dahrmik to mai abhi tak nai hua...
Jhoot bole kawwa kate...
Dr. Amar,
ReplyDeleteThanks for the wonderful translation.
I always find Gods with me.
I am 'Shiv-bhakt'
Above stotra is a part of my daily prayers.
बहुत सुन्दर...अपनी माँ को जरूर ये दिखाऊंगा
ReplyDelete@ Abhi-
Convey my regards to respected mother.
Divya Ji,
ReplyDeleteAti sundar...
Meri Maa ko bhi bahut pasand aayegaa.
Jayant
गणपति के 12 नामों को खोजते-खोजते यहां तक पहुंचा तो ओर भ्रम हो गया क्योंकि मुझे गणपति के 12 नाम यह सूझाए गए हैं--
ReplyDeleteगणपतिविध्नराजो लम्बतुण्डो गजानन।
द्विमातुर हेरम्बो एकदंत गणाधिपति।।
विनायकश्चारुकर्ण पशुपालो भवात्मज।।।
यह सही हैं???
.
ReplyDeleteराम त्रपाठी जी,
सशस्त्रों में गणेश जी के एक सौ आठ नाम भी वर्णित हैं, इसलिए जो आपने उल्लिखित लिए हैं , वे भी सही हैं।
लेकिन जो नाम मैंने यहाँ प्रस्तुत किये हैं, वो नारद-पुराण में संकटमोचन गणेश स्तोत्र के नाम से वर्णित है।
.
शास्त्रों **
ReplyDelete[correction]
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