अविवाहित व्यक्ति , चाहे वो स्त्री हो अथवा पुरुष , उसके पास सबसे बड़ा सुख होता है 'आजादी' का। वह व्यक्ति अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा को एक लक्ष्य की प्राप्ति में लगा सकता है। उसे अपने जीवन-साथी, बच्चों , समाज और परिवार की चिंता नहीं सताती। जो मिला वो खा लिया, जहाँ जगह मिली सो लिए ! इसके विपरीत विवाह एक बंधन है , जिसमें स्त्री अथवा पुरुष दोनों पर ही अनेक जिम्मेदारियां होती हैं। वह चाहते हुए भी बहुत कुछ नहीं कर पाता। अतः ज़रूरी है गृहस्थ व्यक्ति की मनोदशा को समझा जाए। उसे यह कहकर उलाहना ना दी जाए की तुम्हारे प्रयासों में कमी है।
Zeal
shabd shabd se sahmat
ReplyDeleteबिल्कुल सही कहा दिव्या जी..अविवाहित व्यक्ति , चाहे वो स्त्री हो अथवा पुरुष अपनी ऊर्जा औए शक्ति का सही उपयोग कर सकता है..बजाय विवाहित के..
ReplyDeleteबिलकुल सच कहा दिव्या जी....
ReplyDeleteहर मायने में आपकी बात सही है...
अनु
दिव्या जी नमस्कार,
ReplyDeleteबिल्कुल सही कहा आपने....,।
सम्मिलित प्रयास है गृहस्थ जीवन..
ReplyDeleteऔर एक अविवाहित व्यक्ति शादीशुदा को जंचता नहीं
ReplyDeleteक्यों आजाद घूम रहा है वो खुलेआम पचता नहीं !!
अविवाहित के बड़े मजे हैं-रचना उत्तम ईश्वर की |
ReplyDeleteजिम्मेदारी, बड़े बझे हैं, घनचक्कर सा बदतर की |
लेकिन शादी बड़ी जरुरी, शान्ति व्यवस्था जग खातिर-
*छड़ा बखेड़ा खड़ा कर सके, रहे ताक में अवसर की |
पहले जैसे इक्के-दुक्के, बाबा विदुषी सन्यासिन
करें क्रान्ति परिवर्तन बढ़िया, देश दिशा भी बेहतर की |
गृहस्थी में फंसे लोग हैं, खुराफात का समय नहीं है-
फुर्सत में होते हैं जब भी, खबर खूब लें रविकर की ||
सचमुच ,गृहस्थ-जीवन एक दायित्व है ,जिस पर कितनों का जीवन और भविष्य निर्भर होता है.
ReplyDeleteगृहस्थ जीवन ही तो ज़िन्दगी की कसौटी होता है।
ReplyDeletebilkul sahi kaha aapne ...........
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