Tuesday, September 25, 2012

हे भद्र पुरुषों..

हे भद्र पुरुषों , किसी स्त्री को इतना भी ना चाहो की मंथरा की पहचान ही न कर सको !  और हे भारत की नारियों , किसी पुरुष को कभी भी गांधारी बन कर ना पूजो ! तुम दोनों ही अपना अस्तित्व बचा कर रखो !

12 comments:

  1. सार्थक सोच,सार्थक सीख ....
    शुभकामनायें हम सब को :-)

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  2. चाहो ज़रूर, किन्तु चाहने से पहले पहचान कर लो। मंथरा और धृतराष्ट्र की पहचान होने पर उन्हें कदापि न चाहो।

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  3. बहुत ही उपयुक्त बिचार, ग्रहण करने योग्य.

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  4. Stree aur Purush ke sahi astitv ko sweekarne vaala santulit vichar!

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  5. अच्छी सीख लेने योग्य सन्देश !!

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  6. शिक्षाप्रद पोस्‍ट। इसे पढकर राम मनोहर लोहिया जी का कथन याद आ रहा है, जब उन्‍होंने एक बार कहा था‍ कि भारत की आदर्श नारी तो द्रौपदी है, सीता या सावित्री नहीं।

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  7. किलकारी की गूँज सुनाती,
    परिवारों को यही बसाती।
    नारी नर की खान रही है,
    जन-जन का अरमान रही है।
    नारी की महिमा अनन्त है।
    नारी से घर में बसन्त है।।

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