राजेश और बेबी नामक दो नरपिशाचों ने आपस में विवाह कर लिया , फिर छः वर्ष तक बच्चा न होने पर अपने रिश्तेदार की छः वर्षीय बेटी शिवानी को गोद ले लिया ! जिस दिन से गोद लिया उसे मारना पीटना शुरू कर दिया ! निर्वस्त्र करके उस पर रोज़ ठंडा पानी डालना, घर में कैद करके उससे नौकरों वाला काम लेना , पिटाई से उसके कान का पर्दा फट गया तो इलाज नहीं कराया ! इतने पर भी जब इन दोनों की हैवानियत शांत नहीं हुयी तो उस बच्ची को दीवार पर मार-मार कर मार डाला ! तीन ह्रदयविदारक चीखों के साथ वह बच्ची हमेशा के लिए शांत हो गयी !
दिल दहला देने वाली आवाजों को रोज़ सुनने के बाद भी असंवेदनशील पड़ोसियों ने कभी उन नरपिशाचों की रिपोर्ट नहीं की थाने में ! बच सकती थी उसकी ज़िन्दगी !
कभी आप अपने इर्द-गिर्द ऐसा होते देखें तो चुप न रहे। आगे बढ़कर बचा लें एक ज़िन्दगी को।
दिव्या जी क्या सच मे ऐसा हुआ है ?
ReplyDeleteवंदना जी , दैनिक भास्कर के प्रथम पृष्ठ पर प्रथम समाचार है ये !
ReplyDelete..इस घटना के तह तक जाना चाहिए!...ऐसे नरपिशाचों को तिल तिल कर के मृत्यु दंड दिया जाना चाहिए!
ReplyDeleteह्रदय विदारक
ReplyDeleteअसंवेदंशीक जनता क्या चाहती है? आज जो आपके पडोसी के साथ हो रहा है, कल आपके साथ भी हो सकता है। ज़रूरत है इस हैवानियत को खत्म करने की न कि उसे पोसने की।
जब तक एक भी इंसान हैवान है तब तक चैन से मत बैठो। वो बच्ची किसी और का खून थी। आज आप भी व्यस्तता के चलते अपने बच्चों को अपने भाई-बहन अथवा पडोसी को कुछ समय के लिए सौंप अपने काम पर चले जाते हो। यदि आपका पडोसी राजेश और बेबी नामक दो नर पिशाच हुए तो पछताते रह जाओगे। अत: ज़रूरत है इस हैवानियत को खत्म करने की। राजेश और बेबी कहीं भी मिल सकते हैं, इन्हें अनदेखा मत कीजिये। ऐसे हैवानों को उसी प्रकार मारना होगा जैसे इन्होने उस फूल सी बच्ची को मारा है।
दिल को दहला देने वाली घटना है. गोद लिए जाने के बाद कई बच्चे ऐसे दर्दनाक हालात में चले जाते हैं. घोर निंदनीय.
ReplyDeleteऐसे लोग मनोरोगी होते हैं. पड़ोसियों को ऐसी किसी भी घटना की भनक मिलते ही पुलिस में शिकायत करनी चाहिए.
ReplyDeletesome days before also a similar incident happend
ReplyDeleteaap ne sahii kehaa दो नरपिशाचों
सच में नरपिशाच..
ReplyDeleteऐसे नर पिशाचों की कमी नहीं है. यहाँ तो गोद लिया हुआ बच्चा था . कई तो अपने सौतेले बच्चे के साथ जो कि माता पिता दोनों में से किसी एक का तो सगा होता है . इस तरह से अत्याचार करते पाए जाते हैं .
ReplyDeleteदिल दहला देने वाली घटना है।
ReplyDeleteराक्षसों से भी ज्यादा क्रूर हैं ये लोग।
यों तो अखबार रोज ही बुरी घटनाओं का दस्तावेज रहता है । आज तो दिल दहल गया ।
ReplyDeleteसच में ऐसे नरपिचासो को छोड़ना नही चाहिए..
ReplyDeleteमैंने अखबार में यह पूरी खबर अभी पढ़ी। वास्तव में वे दोनों माँ-बाप किसी नर पिशाच से कम नहीं हैं। मैंने उस मासून बच्ची की तस्वीर भी देखि। छ: वर्षीय बच्ची इतनी सुंदर कि कोई उसे धीरे से तमाचा भी न मार सके और इन नर पिशाचों ने उस मासून की इतनी बेरहम हत्या कर दी। उसका खून से लथपथ शरीर देखा नहीं जा रहा था।
ReplyDeleteआपसे अनुरोध है कि इन हत्यारों के लिए नर पिशाच से भी गन्दा कोई शब्द हो तो सुझाएँ। पाठकों से भी अनुरोध है कि दुनिया इ सबसे बड़े दरिंदों को कौनसी गाली पदनी चाहिए, वह बताएं।
मन खराब हो रहा है खबर पढ़कर। बार-बार उस मासून का चेहरा सामने आ रहा है।
मेरा मानना तो यह है कि इन निर्दयी हत्यारों को बिलकुल वही यातनाएं दी जानी चाहिए जो उन्होंने उस मासून को दी। और ant में इनकी सज़ा-ए-मौत भी ठीक वैसी ही होनी चाहिए।
ReplyDeleteसोचिये उन दरिंदों में किस हद तक दरिंदगी रही होगी जिन्होंने उस मासून को तीन बार दीवार से इतनी जोर से भाचीदा की तीसरी चीख में उस बेचारी के प्राण नकल गए?
एक सवाल औऱ उठता है आखिर जिन्होंने अपने बच्चे को गोद दिया क्या वो सोते रहे इतने वर्षों तक। या गोद ली गई लड़की शिवानी को लड़की होने की कीमत चुकानी पड़ी।
ReplyDeleteअक्षम्य कृत्य ...हृदय विदारक ....!!!!
ReplyDeleteक्या कहा जाये ...!!
यही है नर पिशाच------.
ReplyDeleteपशुओँ से भई गया-बीता होता जा रहा है इंसान -उन्हें सबके सामने दंडित किया जाना चाहिये !
ReplyDeleteMedia me yah ghatna ek 'news' ki tarah padhee thi, aapne ise kadwee dawa ki tarah de diya. Man baad me swasth ho jayega kintu abhi to ajeeb sa hai.
ReplyDelete:(
ReplyDeleteआज 29/09/2012 को आपकी यह पोस्ट ब्लॉग 4 वार्ता http://blog4varta.blogspot.in/2012/09/4_29.html पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!
ReplyDeleteमार्मिक ,घोर निंदनीय ,ऐसे नर पिशाचों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए
ReplyDeleteअपना हित सुरक्षित हो तो यहाँ कोई किसी से बुरा बनना पसंद नहीं करता .
ReplyDeleteबहुत ही निंदनीय कृत्य!जनता को अभियोजक और दंडाधिकारी दोनों की भूमिका का निर्वहन करना होगा|
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