बला का हुस्न गज़ब का शबाब नींद में है
है जिस्म जैसे गुलिस्ताँ गुलाब नींद में है
उसे ज़रा सा भी पढ़ लो तो शायरी आ जाए
अभी ग़ज़ल की मुकम्मल किताब नींद में है
मचल रही है मेरे दिल में दीद की हसरत
वो डाले चेहरे पे नीला नकाब नींद में है
वो इन्कलाब उठाता है ले के अंगडाई
सवाल जागा हुआ है जवाब नींद में है
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ReplyDeleteजिसने भी लिखी है बहुत अच्छी लिखी हैं ये पंक्तियाँ!
शुभसंध्या...!
हुवे समर्थक छह शतक , दिव्या दिव्य कमाल ।
ReplyDeleteबढे चढ़े उत्साह नित, जियो जील के जाल ।
जियो जील के जाल, गजल का शायर बोलो ।
है रचना उत्कृष्ट, हास्य पर कुछ दिन डोलो ।
होय ईर्ष्या मोय, बताओ औषधि डाक्टर ।
शतक समर्थक पूर, करे कैसे यह रविकर ।।
बहुत खूबसूरत कहा है
ReplyDeleteबहुत खूब
ReplyDeleteसच में बहुत अच्छी हैं।
ReplyDeleteमुझे तो लगा आपने ही लिख डाली हैं उपरोक्त
ReplyDeleteपंक्तियाँ.
बहुत ही भावपूर्ण है.
शेयर करने के लिए आभार.
दो बार पढ़ गया हूँ. दोनों बार यह ग़ज़ल अच्छी लगी.
ReplyDeletesawaal jaga hua hai, jawaab neend me hai ...shreshth!
ReplyDeleteगज़ब की पंक्तियाँ हैं। दरअसल मैं भी इस ग़ज़ल को गाना चाहता हूँ।
ReplyDeleteआपको बता दूं कि ये ग़ज़ल फिल्म "एक विवाह ऐसा भी" की है, जिसने नायक (सोनू सूद) अपनी नायिका (ईशा कोप्पिकर) को ट्रेन में सोते हुए देखते समय लिखता है। असल में ये ग़ज़ल गीतकार रविन्द्र जैन ने लिखी है, संगीत भी उन्ही का है और इसे गायक शान ने अपनी शानदार आवाज़ म गाया है।
मुझे यह ग़ज़ल बहुत पसंद है।
इस गीत को यहाँ देखिये
ReplyDeletehttp://www.youtube.com/watch?v=0uAX9IEPV9k
एक तो इस ब्लॉग पर गज़ल देखते ही दिल निसार हो गया :-)
ReplyDeleteबहुत सुन्दर!!!
अनु
वाह !
ReplyDeleteहमने तो सोचा था की आप ने लिखी है यह रचना |
ReplyDeleteपर है अच्छी |
आशा
बढिया, क्या बात
ReplyDeleteमेरे नए ब्लाग TV स्टेशन पर देखिए नया लेख
http://tvstationlive.blogspot.in/2012/10/blog-post.html
बहुत खूब ...
ReplyDeleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ReplyDeleteआपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (06-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
ग़ज़ल खूबसूरत है और अच्छी है , पढना सुखद लगा
ReplyDeleteबहुत ख़ूब! वाह!
ReplyDeleteकृपया इसे भी देखें-
नाहक़ ही प्यार आया
बहुत खूब है पसंद आपकी .
ReplyDeleteलीजिए एक शैर इसी पर -उनसे छींके से कोई चीज़ उतरवाई है ,काम का काम है अंगडाई की अंगडाई है .
ram ram bhai
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शनिवार, 6 अक्तूबर 2012
चील की गुजरात यात्रा
मैने पहले भी इसे पढा है,
ReplyDeleteअच्छी रचना है।
पसंद करने लायक हैं भी....!
ReplyDeleteवाह
ReplyDeleteबहुत बढ़िया..
:-)
वाह
ReplyDeleteबहुत बढ़िया..
:-)
बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........
ReplyDeleteबहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........
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