Thursday, December 6, 2012

रंगे सियार ..


आखिर दोनों रंगे सियारों ने कल संसद में अपनी जात दिखा ही दी !

जय हिन्द !


22 comments:

  1. बहुत ही बढ़िया सत्य फ़रमाया है आपने,

    अरुन शर्मा
    www.arunsblog.in

    ReplyDelete
  2. कच्चे रंग पहली बारिश में उतर जाते हैं.....
    :-)

    अनु

    ReplyDelete
  3. होता पर्दाफाश है, खा खरबूजा खाज ।

    हुक्कू हूँ डट के किया, जोर-शोर का राज ।

    जोर-शोर का राज, ऊँट किस करवट बैठे ।

    बड़े मतलबी दोस्त, रहे बाहर से ऐंठे ।

    अन्दर मेल-मिलाप, बना सत्ता का तोता ।

    यू पी माया विकट, मुलायम मूषक होता ।

    ReplyDelete

  4. ये माया और मुलायम अली दोगले हैं हाई ब्रीड उपज हैं राजनीति की क्रोस ब्रीड हैं .भाषण में इनके लिए प्रत्यक्ष विदेशी पूँजी निवेश भारत को गुलाम बनाने की सजाइश है और व्यवहार में ये इसके साझीदार हैं .चर्च की एजंट के दल्ले हैं .

    ReplyDelete
  5. Liked the way you have expressed it.

    ReplyDelete
  6. रंगे सियार कुछ भी बर्दाश्त करेंगे किन्तु सांप्रदायिक शक्तियों को नहीं।
    इन भूखे भेडियों से तो यह प्रश्न पूछने की औकात अरविन्द केजरीवाल की भी नहीं कि अर्थ नीति में संप्रदाय बीच में कहाँ से आ गया

    ReplyDelete
  7. यही है डबल गेम....
    जनता सब समझती है....

    ReplyDelete
  8. well mam, the khadi wearing leaders have shown their colors a lot of time , its us who dont see them often

    not their fault we let them do it :)
    and they will continue doing it till WE the people put a stop to it

    Bikram's

    ReplyDelete
  9. जी सच ही तो है कि सरकार सीबीआई चला रही है

    ReplyDelete
  10. जिनका जैसा आचरण होता है वैसा ही व्यवहार करता है और उल्टा तो तब होता जब ये सरकार के खिलाफ वोट करते जो हुआ वो तो सब जानते ही थे !!

    ReplyDelete
  11. जनता मूर्ख कब तक बनेगी। अब तो कलई खुल गयी है।

    ReplyDelete
  12. इन्होने देश को बेचना तो कब का शुरू कर दिया था अब तो जनता को थोडा सा रंग दिखाया है.

    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://rohitasghorela.blogspot.in/2012/12/blog-post.html

    ReplyDelete
  13. बिल्कुल सही कहा आपने 1

    ReplyDelete
  14. ऍफ़ डी आई के मुद्दे पर लोकसभा में जो कुछ भी हुआ ,तथा 'सपा 'और 'बसपा 'ने जो कुछ किया उस पर टिपण्णी करने की तो देश को कोई ज़रुरत नहीं है ,पर जो कुछ इस देश ने महसूस किया है उस

    पर विचारक कवि डॉ .वागीश मेहता की ये पंक्तियाँ पठनीय हैं :

    सत्ता जीती संसद हारी ,

    हारा जनमत सारा है ,

    चार उचक्के दगाबाज़ दो ,

    मिलकर खेल बिगाड़ा है .

    एक प्रतिक्रया ब्लॉग पोस्ट :

    11
    रंगे सियार है ये राजनीति के
    Virendra Kumar Sharma
    कबीरा खडा़ बाज़ार में एवं
    A
    रंगे सियार ..
    ZEAL

    होता पर्दाफाश है, खा खरबूजा खाज ।
    हुक्कू हूँ डट के किया, जोर-शोर का राज ।
    जोर-शोर का राज, ऊँट किस करवट बैठे ।
    बड़े मतलबी दोस्त, रहे बाहर से ऐंठे ।
    अन्दर मेल-मिलाप, बना सत्ता का तोता ।
    यू पी माया विकट, मुलायम मूषक होता ।

    ReplyDelete


  15. इनके पिछलग्गुओं में अगर अपनी औलाद और अपने देश के प्रति चिंता है तो चुनावों के वक्त इन्हें करारी मात दे'कर सबक सिखाएं …
    … …
    … … …
    वरना चाटते रहें इनका पिछवाड़ा !

    ReplyDelete
  16. BAHUT KHOOB,NAGNTA KI PARAKASTHA

    ReplyDelete
  17. 'गागर में सागर' भरती पोस्ट |
    :)

    ReplyDelete