Thursday, May 24, 2012

पलायमान ब्लॉगर्स

कोई भी क्षेत्र हो,पलायन तभी होता है जब व्यक्ति उस संस्था से, पद्धति से, अनियमितताओं से , गुटबाजियों से अथवा पक्षपाती रवैय्ये से निराश हो चुका होता है।

ब्लोगजगत में भी बहुत कुछ ऐसा घट रहा है , जिसके कारण अनेक अच्छे ब्लॉगर्स लेखन के प्रति उदासीन हो चुके हैं। बहुतों ने लेखन छोड़ दिया है और अनेक हैं जो पलायन के कगार पर हैं।

कुछ लोग हाथ धोकर पीछे पड़ जाते हैं किसी एक ही ब्लॉगर के और उसे इतना हतोत्साहित करते हैं की वह यहाँ से पलायन करने को विवश हो जाए।

फिर उस ब्लॉगर की उस समय की कमज़ोर मनः स्थिति को भांपकर ये लोग उसके ताबूत में अंतिम कील भी ठोंक देते हैं उस पर अपमान जनक "टंकी चढ़ने" जैसा आलेख लिखकर।

कई ब्लॉग्स पर तो अश्लीलता और अभद्रता अपनी दुर्गन्ध से पूरा वातावरण दूषित कर रही है। फिर भी उस पर उमड़ने वाले तथा टिप्पणी करने को लालायित ब्लॉगर्स , विषय की गन्दगी को नज़र अंदाज़ करते हुए फिकरा कसने में कोई कसर नहीं छोड़ते । कुछ तो अनावश्यक रूप से भोले बनकर टिप्पणी की हाजिरी दे आते हैं , ताकि अमुक व्यक्ति उनके यहाँ भी आता रहे। किस गन्दगी में हो आये हैं , इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं होता।

इस बढती गन्दगी ने संजीदा लेखकों को उदासीन किया है और पलायन करने को विवश।

कुछ छोड़कर चले गए, कुछ ने टिप्पणी का ऑप्शन ही बंद कर दिया तो कुछ ने अपने ब्लॉग पर चुनिन्दा लोगों के लिए ही टिप्पणी का विकल्प रखा है।

बेहतर होगा यदि ब्लॉगर्स अपनी लेखनी के प्रति संजीदा और जिम्मेदार रहे।

Zeal

22 comments:

  1. कक्षा में डांटे गए, डटे रहे डग खूब |
    पक्षपात शिक्षक करे, जात-पांत में डूब |

    जात-पांत में डूब, ऊबते लेकिन सारे |
    करूँ टेंथ में टॉप, प्रभू संकल्प सहारे |

    छोड़ बढ़ो नैराश्य, यही रविकर की इच्छा |
    जीवन का संघर्ष, हमेशा बेढब कक्षा ||

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  2. पहले मैं भी ब्लॉग जगत में सक्रीय भूमिका निभाता था किन्तु अब यहाँ भ्रमण करने की इच्छा ही नहीं होती। क्योंकि अधिकतर ब्लॉगर्स बिना किसी उद्देश्य के ब्लॉगिंग करते हैं। केवल खुद पर लेखक की छाप बनाए रखना ही इनका एक मात्र उद्देश्य है। निरर्थक बातों में अधिक समय नष्ट करने वाले अधिकतर ब्लॉगर्स के बीच रहने का अब मन नहीं करता।
    चाँद-सितारों पर कवितायेँ कब तक लिखते रहेंगे?
    कुछ मठाधीशी के चलते केवल एक दुसरे पर आक्षेप ही लगाते हैं। शूर्पणखां की आड़ लेकर ब्लॉग पर अश्लील तस्वीरें चिपकाते हैं। समझ नहीं आता कि ब्लॉगिंग कर रहे हैं या मनोहर कहानियां लिख रहे हैं? टिप्पणी करने वालों को भी केवल अपनी दूकान की परवाह है। कंटेंट में क्या है, इससे उन्हें कोई मतलब नहीं।
    हाथ धोकर किसी के पीछे पड़ जाना, बार-बार आक्षेप लगाना, अमुक की पोस्ट पर आपत्ति जताना बस यही रह गया है ब्लॉगिंग में। दरअसल ये लोग ब्लॉगिंग की आड़ में सोश्यल नेटवर्किंग करते हैं। इन्हें फेसबुक अथवा ट्विटर का उपयोग करना चाहिए था। ब्लॉग जगत पर कब्ज़ा जमा कर इसे संक्रमित कर दिया।
    इसीलिए कुछ सार्थक लिखने वाले लेखकों ने ब्लॉगिंग छोड़ फेसबुक की ओर रुख किया क्योंकि वहाँ एक उद्देश्य के साथ लेखन हो रहा है। सोश्यल नेटवर्किंग को हथियार बना कर हमने इसे उपयोग में लिया है।

    व्यर्थ प्रलाप करने वाले ब्लॉगर्स यदि ब्लॉग जगत का बेहतर व सम्माननीय भविष्य चाहते हैं तो अभी से सचेत हो जाने की आवश्यकता है। अन्यथा तो कुछ सालों बाद इसे सस्ते साहित्य अथवा पोर्न साइट्स की श्रेणी में रख दिया जाएगा।

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  3. नकारात्मकता प्रत्येक स्थान पर दुखदायी होती है। इसका खामियाजा ब्लॉग जगत को भी भुगतना पड़ रहा है। 4 वर्षों के इस दौर में कई ब्लॉगर पलायन कर गए।

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  4. लेखक संवेदनशील होता है शायद इसलिए वो पलायन करता है ... पर ब्लॉग से पलायन ठीक नहीं ... किसी की परवा क्यों करें ... जो अपना विचार है निर्भीक हो के कहें ...

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  5. 'अपनी लेखनी के प्रति संजीदगी और ज़िम्मेदारी'-
    यही तो कुंजी है हम सभी के लिए. आपका आभार.

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  6. हर ब्लोगर को संजीदगी से इस ओर ध्यान देना होगा,..

    MY RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि,,,,,सुनहरा कल,,,,,

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  7. विचारणीय आलेख

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  8. सहमत हूँ, यदि लम्बा जाना है तो ऊर्जा को व्यर्थ के कामों से बचाना होगा।

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  9. अलग से कहने के लिए कुछ बचा नहीं है...आपने ठीक ही कहा है!...सच पूछो तो मुझे इस संस्था से ही शिकायत है कि यहाँ ब्लॉगर्स की मेहनत का सही मूल्यांकन नहीं होता!..इतने अच्छे अच्छे लेख यहाँ लिखे जाते है,कविताएँ और अन्य सामग्री भी स्तरीय होती है...लेकिन बदले में ब्लॉगर्स को क्या मिलता है?...आपस में जरुर एक दूसरे की प्रशंसा सभी करते है..लेकिन संस्था ने सिर्फ लिखने के लिए एक प्लैटफॉर्म दे रखा है...और क्या किया है?...सभी के परिवार वाले यही समझतें होंगे कि ब्लॉग लिखना सिर्फ टाइम पास है...दूसरे नशों की तरह एक नशा है!...ब्लॉगिंग को गौरवपूर्ण स्थान तब प्राप्त होगा जब ..ब्लॉगिंग आयोजित करने वाली संस्था की तरह से प्रशस्ति पत्र और इनाम दिए जाएंगे!
    ...मैं अपने आप को अच्छे ब्लॉगर्स की लिस्ट में शामिल नहीं कर रही...लेकिन उपर्युक्त विचारों को ले कर ही मैंने ब्लॉग न लिखने का निर्णय लिया है!...आपने सही मुद्दा उठाया है झील...धन्यवाद!

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  10. बिल्कुल सही कहा दिव्या....सार्थक और विचारणीय आलेख ....

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  11. आपकी बातो से मै पूरी तरह सहमत हूँ| लोग अपने को एक अलग या भीड़ में अलग दिखने के चक्कर में खुद ही निचे चलते जाते हैं और समझ नहीं पाते हैं| आज बहुत से ब्लॉगर को निशाना बनाया जा रहा है या तो उनके भारत से बाहर रहने पर या उनके बातों पर क्युकी उनकी बाते सही होती हैं और इससे उनको डर लगने लग गया है की कही ऐसे ही पूरा देश ना जाग जाये| ब्लॉग एक विचार होते हैं एक सच्चाई होते हैं जो आज के दौर में हमारे किताबों से दूर करी जा रही हैं या मीडिया उनको नहीं दिखा रही है या कुछ बहुत ही दुर्लभ चीजें हमें ब्लॉग पर मिल जाती हैं| इस लिए ब्लॉगर को अपने स्तर को निचा गिराने की जरुरत नहीं है बल्कि अपने विचारों को दृढ़ता से दिखने की जरुरत है ताकि लोग सच्चाई जान सके और कुछ सीख सकें|

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  12. सामयिक और महत्वपूर्ण विषय है,
    इस मुद्दे पर गंभीरतापूर्वक विचार किए जाने की आवश्यकता है।
    अच्छा लिखने वालों को प्रोत्साहित करना ही चाहिए न कि हतोत्साहित।

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  13. आपने सही लिखा है।.... हो सकता है झूठी टिप्पणी करने वालों में मै भी हूँ. अब एक बार फिर से आत्मावलोकन करना होगा।

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  14. विवादों से तटस्थता एकमात्र उपाय

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  15. सार्थक बात कही है .....!!
    शुभकामनायें...

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  16. दिव्या जी आपको ऐसे ब्लॉगरों से तकलीफ पहुँची है पर आप अपना काम करते रहिये इनको अनदेखा कर के । जो ब्लॉग आपको पसंद है वहीं जाइये ।
    इनसे डर कर भागना तो कोई हल नही समस्या का ।

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  17. कहने-सुनने से कुछ नहीं होगा, जब तक लोग आत्मावलोकन द्वारा स्वयं को संयत नहीं करेंगे !

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  18. अच्छे-बुरे लोग हर जगह होते है . लेकिन इसका मतलब ये नही की हम पलायन कर जाये . हमारा समाज भी साधुओ से नही भरा नही पड़ा . इस समाज ने तो भगवान् राम को नही छोड़ा फिर आप-हम तो बहुत तुच्छ प्राणी है . अगर कीचड़ में पत्थर फेंका जाये तो वह अपने ऊपर ही आएगा . जैसे ये लोग सामूहिक रूप से गंदगी फैला रहे है , उसी तरह से अच्छे लोग भी एकजुट हो सकते है , इनके खिलाफ लिखने से कुछ नही होने वाला है .क्योंकि लातो के भूत बातों से नही मानते है . सबसे अच्चा तरीका है , इन पर ध्यान ही न दे , चाहे ये कुछ भी लिखे , फिर अपने आप शांत हो जाये या भगवान् उन्हें सद्बिद्धि दे दे .

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  19. मुझे भी महसूस होती यह पीड़ा.... कई ऐसे ब्लोगर हैं जो अब ब्लॉग-जगत में उदासीन भाव से, हिचकिचाते हुए टिप्पणी दे रहे हैं.... कीचड़ को पहचानकर भी उसमें अपनी टिप्पणी का कमल खिलाते हैं.

    आपने ब्लोगर की सभी मनःस्थिति को भली प्रकार व्यक्त किया है.... यही होती है संवेदनशीलता.

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  20. अगर पाठक ब्लॉगर को कमेन्ट ही नहीं देंगे तो ब्लॉगर को ब्लॉग्गिंग छोड़नी पड़ती है, क्योंकि वह सोचता है की जब कोई अपनी राय ही नहीं देता है तो क्या लाभ ब्लॉग्गिंग करने का?
    अब हमने भी ब्लॉग्गिंग को बहुत कम कर दिया है, अब सिर्फ ब्लॉगर लेखकों की पोस्टो पर कमेन्ट करेंगे ताकि वह मेरी तरह ब्लॉग्गिंग से मुंह ना मोड़े......

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