Showing posts with label Irfan. Show all posts
Showing posts with label Irfan. Show all posts

Sunday, May 29, 2011

निस्वार्थ प्रेम-- Unconditional love

ये कहानी है एक लड़की की, जिसका नाम है 'गुल' गुल के पास एक बगीचा था जिसमें वो रंग बिरंगे फूल खिलाती थी , जिससे बहुत से लोग लाभ लिया करते थे किसी को शारीरिक बिमारियों से निजात मिलती थी , तो किसी मानसिक शांति मिलती थी। किसी को उन्हीं फूलों से दुनिया की नयी-नयी तसवीरें दिखती थी , तो कोई बिछड़े हुए अपनों से मिल जाता था। किसी के लिए वे फूल प्यार का पैगाम लाते थे तो किसी के लिए मरहम का काम करते थे। कुल मिलाकर 'गुल' के उस 'गुलशन' के विविध रंगी फूलों से पूरे समाज को लाभ होता था 'गुल' निस्वार्थ भाव से छोटे-बड़े , गरीब अमीर , सभी के लिए उस गुलशन में फूल उगाती थी। और हर किसी को उस गुलशन में आने जाने की पूरी स्वतंत्रता थी। कोई भी ज़रुरतमंद वहां से अपनी पसंद का फूल चुन सकता था। किसी प्रकार की कोई बंदिश नहीं थी।

गुल अकेली ही उस गुलशन का ध्यान रखती थी जिसके फूलों पर लाखों जिंदगियां बसर रही थीं। गुल चाहती थी कोई ऐसा हो जो उसकी इस नेक काम में मदद करे , लेकिन कोई भी नहीं था जो उसका साथ देता। एक दिन उसका एक बचपन का मित्र 'गुलफाम' वहां आया , उसे देखकर गुल को बहुत ख़ुशी हुई उसे लगा अब इस गुलशन का ध्यान रखना अब बहुत आसान हो गया है। गुलफाम के जाने से गुल को बहुत अच्छा लगता था। गुलफाम के छू देने से फूलों का आकार बढ़ जाता था और उसके रंग भी गहरे हो जाते थे। धीरे धीरे गुलफाम में अहंकार आने लगा। उसने सोचा मैं क्यूँ मदद करूँ गुल की। इसमें मेरा क्या लाभ है भला , नाम तो गुल का हो रहा है , फिर मैं अपना योगदान क्यूँ करूँ ? फिर उसने फूलों को छूना बंद कर दिया। उसने गुल से कहा - तुम बहुत ज्यादा फूल खिला रही हो , बहुत तेज़ी से लोग इसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं मैं चाहता हूँ तुम अपना काम धीरे-धीरे करो

गुल समझ गयी गुलफाम उसकी मदद नहीं करना चाहता है गुल ने कुछ नहीं कहा , वो उसी लगन और मेहनत से अपने काम में जुटी रही। वो जानती थी की कोई भी व्यक्ति निस्वार्थ नहीं होता इसलिए लम्बे समय तक उसकी खातिर उसके गुलशन में उसका सहयोग नहीं कर सकता गुलफाम जैसे मित्र उससे अपेक्षा तो बहुत रखते हैं , लेकिन उसके लिए निस्वार्थ रूप से सहयोग नहीं कर सकते। समय बीतता गया और गुल अपने काम में वापस व्यस्त हो गयी फूलों का रंग गहरा सही , बड़ा आकार सही , लेकिन वो अपनी बगिया में फूल खिलाती रही और लोग चुन-चुन कर ले जाते रहे।

कुछ समय बाद एक दिन अचानक सुबह उठी तो देखा गुलशन के सारे फूल बहुत ही बड़े-बड़े और गहरे रंग के हो गए हैं और बहुत ही सुन्दर सुगंध से पूरा गुलशन गमक रहा है गुल आश्चर्यचकित हो गयी , आस पास देखा तो कोई नहीं था अब तो ये रोज़ का ही नियम हो गया था , गुलशन के फूलों का रंग , आकार और खुशबू बढती ही जा रही थी। गुल बहुत प्रसन्न रहने लगी कोई अनजाना निस्वार्थ होकर मदद कर रहा था और अनेकों जरूरतमंदों की मदद में गुल का सहयोग भी कर रहा था।

गुल की इच्छा बढ़ गयी उस अजनबी फ़रिश्ते से मिलने की , लेकिन वो तो चुपचाप अपना काम करके चला जाता था। एक दिन गुल घूमते-घूमते बहुत दूर निकल गयी उसने देखा एक छोटा सा गुलिस्तां है वहां और अनेक फूल भी खिले हैं , लेकिन सभी बहुत छोटे आकार के हैं और खुशबू भी नहीं है।

फूलों से बेहद प्यार करने वाली गुल ने उन फूलों को धीरे से सहलाया। देखते ही देखते सारे फूलों का आकर बढ़ गया और उनमें भी सुन्दर सुगंध गयी हर तरफ खुशबू फैलते ही अचानक एक युवक 'इरफ़ान' दौड़ता हुआ वहां आया। उसने गुल को धन्यवाद दिया और कहा -"मेरी बगिया तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही थी इतने दिनों से गुल ने पूछा -तुम कौन हो और मुझे कैसे जानते हो? इरफ़ान ने गुल को बताया , मैं ही तुम्हारे गुलशन के फूलों को खुशबू देता हूँ। गुल चौंक गयी पूछा- "तो तुम अपनी बगिया को क्यूँ नहीं सुवासित करते? तुम्हारे पास तो ये अद्भुत हुनर है।

इरफ़ान ने कहा - " नहीं , ये हुनर हम दोनों के ही पास है लेकिन जब हम अपने लिए करते हैं तो वो स्वार्थ से ग्रस्त हो जाता है इसलिए फूलों में खुशबू नहीं पाती , लेकिन जब हम निस्वार्थ होकर किसी गैर के लिए कुछ करते हैं तभी पूरे चमन में ये खुशबू फैलती है।

गुल ने पूछा - " लेकिन तुमने मुझे पहले क्यूँ नहीं बताया , मैं भी तुम्हारी बगिया के लिए कुछ कर सकती इरफ़ान ने कहा - "यदि मैं तुमसे कुछ मांग लेता तो मैं निस्वार्थ नहीं रह जाता और फिर तुम्हारे गुलशन को सुवासित करने की शक्ति भी जाती रहती , इसलिए मुझे छुपकर ही ऐसा करना पड़ा, और मैं भी दिल ही दिल में तुम्हारे आने का इंतज़ार करता था। जानता था तुम ज़रूर आओगी। मेरा विश्वास अटल था।

उस दिन के बाद से गुल और इरफ़ान ने मिलकर लोगों के लिए फूलों को खिलाना शुरू कर दिया। पहले एक थी , फिर अनेक बगिया हो गयी।

कहानी के पात्र वास्तविक हैंलेकिन उनके नाम काल्पनिक हैंरोचकता बढाने के लिए आप यदि गुल , गुलशन , गुलफाम और इरफ़ान को पहचान सकें तो टिप्पणियों का आनंद दोगुना हो जाएगा

तीन पात्रों को पहचानना आसान है लेकिन जो 'इरफ़ान' को पहचानेगा , वही विजेता घोषित होगा

आभार