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Monday, May 9, 2011

चंदा ने पूछा तारों से , तारों ने पूछा हज़ारों से- "सबसे अच्छा कौन है ? --पापा--मेरे पापा ....


२० वर्ष पूर्व पिताजी द्वारा दिया गया autograph । "A message to my daughter"





आज , नौ मई को
पिताजी के जन्म-दिन पर उनकी बहुत याद रही है , इसलिए ये लेख लिख रही हूँबेटियां होना भी कितना कष्टदाई होता है कभी-कभी जो माता पिता हमें इतने कष्ट उठाकर हमें पढ़ाते लिखाते हैं , और किसी काबिल बनाते हैं , उनसे दूर हो जाना पड़ता है विवाहोपरांत जब वे बूढ़े हैं , और उन्हें हमारी सेवा की ज़रुरत होती है , तो हम लाचार और विवश , उनसे मीलों दूर बैठे हुए होते हैं , चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते सिर्फ याद कर सकते हैं
मेरे आदर्श और मेरे गुरु समान पिताजी अत्यंत optimistic व्यक्तित्व के धनी हैंजीवन भर परेशानियां झेलीं लेकिन अपने बच्चों को सदैव सुख से रखा और उच्च शिक्षा दीउनकी तनखाह से ,ज्यादा हम चारों की स्कूल की फीस थी , लेकिन जैसे तैसे बिना किसी व्यवधान के , यथाशक्ति हमें शिक्षा दिलाई , ताकि भविष्य में हमें कोई कष्ट देखना पड़े
बैंक की नौकरी में , हर तीन साल पर छोटे-छोटे शहरों और कस्बों में होते स्थानान्तरण होने के बावजूद भी उन्होंने अपने परिवार को लखनऊ जैसे महानगर में रखा ताकि हमें कोई कष्ट हो जाड़ा , गर्मी और बारिश में हर सप्ताह शनिवार की रात घर आना और २४ घंटे बाद पुनः निकल पड़ना कर्म-स्थल के लिएबहुत कठिन जीवन-चर्या थी , लेकिन उस एक दिन के अवकाश में घर आते ही , बिना समय नष्ट किये हम चारों को गणित और अंग्रेजी पढ़ाते थेआज उसी पढाई की बदौलत हम कुछ बन सके
पिताजी कहा करते थे -" A single minute wasted at school means a chance of misfortune in future "...उनकी इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर , कभी समय नष्ट नहीं कियासमय का भरपूर सदुपयोग कियाहालाँकि आज जब यही बात अपने बच्चों से कहती हूँ तो वो समय की एहमियत नहीं समझते हैं
पिताजी के कुछ पसंदीदा वाक्य जो वे अक्सर कहते हैं , और फोन पर भी सुनने को मिलता रहता है - "समय से पहले और किस्मत से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता" और " जो हम आज हैं , वो कल नहीं रहेंगे", क्यूंकि बदलाव ही प्रकृति का नियम है , इसलिए सकात्माक बदलाव की तरफ सतत प्रयत्नशील रहना चाहिएपिताजी के अध्यात्मिक विचारों से इतनी प्रभावित हूँ की अक्सर मेरे लेखों में उनकी ही झलक मिलती है

सन २००७ में माँ की मृत्यु बाद से उन्होंने माता और पिता दोनों का दायित्व अपने ऊपर ले लिया है । अपने बच्चों की ही चिंता किया करते हैं, अपनी किसी भी तकलीफ को जाहिर तक नहीं होने देते। इतना भावुक होता है, एक पिता का दिल भी। एक माँ की ही तरह कोमल होता है , पिता का ह्रदय भी । आज जो कुछ भी हूँ , पिताजी के प्रयत्नों और आशीर्वाद से ही हूँ । मन में पिताजी के लिए आभार एवं कृतज्ञता है।

अपने पिताजी के जन्मदिन पर समस्त पुरुष जो पिता का धर्म निभा रहे हैं , उन्हें मेरा नमन। बेटियां कितनी भी दूर क्यूँ न चली जाएँ , सदैव अपने पापा की लाडली ही रहती हैं।

चंदा ने पूछा तारों से , तारों ने पूछा हज़ारों से-
"सबसे अच्छा कौन है ? --पापा--मेरे पापा ....
आभार