Monday, July 21, 2014

अलबेलों का मस्तानों का ...

ये देश है वीर-खुलासों का ,
रेपों का , आतंकों का !
इस देश का यारों क्या कहना, 
ये देश है दुनियादारों का !
यहाँ चौड़ी छाती नेता कि 
यहाँ भोली शक्लें मीडिया कि
यहाँ गाते हैं राँझे मस्ती में ...

यहाँ आग लगे हर बस्ती में..

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ये देश है वीर जवानों का 
अलबेलों का मस्तानों का


Zeal

4 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (22-07-2014) को "दौड़ने के लिये दौड़ रहा" {चर्चामंच - 1682} पर भी होगी।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Pratibha Verma said...

nice one...

Pratibha Verma said...

nice one ...

Anonymous said...

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