Friday, November 21, 2014

कलम


चित्रगुप्त की संतानें , कलम की पूजा करती हैं , उनका सौदा नहीं करतीं ! कलम यदि चरण-वंदना में लिप्त हो जाए तो इससे बड़ा अपमान दूसरा नहीं हो सकता एक कलम का !


2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (22-11-2014) को "अभिलाषा-कपड़ा माँगने शायद चला आयेगा" (चर्चा मंच 1805) पर भी होगी।
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चर्चा मंच के सभी पाठकों को
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kajal Kumar said...

सही बात है.