Sunday, January 11, 2015

सत्यमेव जयते...??


जिस देश में आतंकवादियों को प्रशय दिया जाता हो, राजनीतिक पार्टियों में टिकट दिया जाता हो . वोटों की लालच में उनका तुष्टिकरण किया जाता हो , उस देश में पत्रकार सत्य बोलकर या लिखकर क्या करेगा? जान से हाथ ही तो धोएगा ना ? क्यों करे वो ऐसा ? उसके बीबी बच्चे नहीं हैं क्या ? नेताओं को मिले जेड-सिक्युरिटी और पत्रकारों को मिले "बिकाऊ" का तमगा ! बिकाऊ तो मलाई खाने वाले नेता हैं ! देश का पैसा भी खाते हैं और हमारे वोट भी ! वो अपनी TRP बढ़ाते हैं तो तुम लोग कौन सा सत्य लिखते हो? बस "लहर वाले लाइक्स" जिस पर मिले , वही भुनाते चलते हो ! दम है तो देश का राशन खा रहे गूंगे नेताओं के खिलाफ लिखो ! वही हैं असली अपराधी !पेरिस में मीडिया का हश्र देखने के बाद पत्रकारों के साथ सहानुभूति है ! बेचारे रोटी कपडे और मकान की फ़िक्र करें की सत्य के हवन में आहुति दें !

2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (12-01-2015) को "कुछ पल अपने" (चर्चा-1856) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Vaanbhatt said...

विचारोत्तेजक लेख...आज हम जहाँ भी हैं सत्य के प्रहरियों की वज़ह से ही हैं...कलम के सिपाहियों...सलाम...