Wednesday, May 4, 2011

प्रेम से उपजते शिकारी , बलात्कारी और कातिल -- (obsession)

अब प्रश्न ये है कि क्या प्रेम के कारण किसी में इस तरह के दोष भी सकते हैं ? प्रेम यदि विकृत होकर जूनून [Obsessive love] बन जाए तो व्यक्ति एक मानसिक रोगी हो जाता है जिसकी परिणति शिकारी [stalker], बलात्कारी [rapist] अथवा कातिल [murderer] में होती है।

ये मानसिक रोग हर किसी को नहीं होता ये उसे ही होगा जिसके अन्दर इसके जींस पहले से ही मौजूद होंगे। एक सामान्य व्यक्ति [स्त्री हो अथवा पुरुष] , वो आकर्षित तो हो सकता है किसी से , लेकिन जुनूनी नहीं होगा। इसके विपरीत असामान्य व्यक्तियों में ये प्रक्रिया कई चरणों में घटित होती है , जिसका उसे पता ही नहीं चलता कि कब वह जूनून [obsession] के कारण उन्माद का शिकार हो गया है। इस प्रकार के रोगी दिखने और बात करने में सामान्य लगते हैं , लेकिन ये अपनी बनायी हुयी धारणाओं से बाहर नहीं पाते और अपने जूनून में किसी प्रकार का भी गुनाह कर जाते हैं।

ये प्रक्रिया कुछ इस प्रकार से है --
  • सर्वप्रथम ये एक तीव्रता और गहनता के साथ आकर्षित होते हैं किसी के प्रति
  • फिर शीघ्र ही उसके साथ बिना compatibility का विचार किये , एक निश्चित सम्बन्ध बना लेना चाहते है।
  • बहुत possessive होने लगते हैं धीरे-धीरे।
  • इसके बाद शुरू होती है इनकी unrealistic fantasies ।
  • यहाँ से इनके अन्दर अनियंत्रित जूनून आकार लेना शुरू कर देता है।
  • यहाँ से उस निर्भर रहने कि प्रवृति वाले व्यक्ति में एक प्रकार का भय जन्म लेने लगता है। उसे लगता है कि उसका साथी उसे छोड़कर चला जाएगा , या धोखा दे देगा या फिर उससे छोड़कर किसी और को प्यार करने लगेगा ।
  • वह बहुत ही डिमांडिंग होने लगता है । उसे बार बार आश्वासन कि आवश्यकता होती है । वो साथी कि निकटता का एहसास हर पल करना चाहता है। चाहे फ़ोन द्वारा हो , चाहे पत्रों द्वारा अथवा व्यक्तिगत मुलाकातों द्वारा।
  • उसके अन्दर अविश्वास तेज़ी से पनपने लगता है और वो अवसाद [depression] का रोगी हो जाता है।
  • उसकी नाराजगी भयानक गुस्से का रूप धारण कर लेती है। उसे लगता है कि उसके साथ धोखा हो रहा है।
  • उसकी Rational बुद्धी [विवेक] , उसका साथ छोड़ देती है।
  • यहाँ पर जूनून कि इंटेंसिटी और तीव्र होने लगती है।
  • उसे लगता है कि उसका मित्र सिर्फ उसी तक सीमित होकर रहे , किसी दुसरे से मिले-जुले अथवा बात न करे। वह अपने साथी पर पूरा नियंत्रण रखना चाहता है।
  • जब साथी उसके नाजायज नियंत्रण और डिमांड को पूरा नहीं करता तब यह व्यक्ति हिंसक हो उठता है। उस पर मौखिक और शारीरिक हिंसा पर उतर आता है ।
  • इस अवस्था में obsession और भी तीव्र हो जाता है और वह व्यक्ति 'प्रेम' के बारे में सोचना नहीं बंद कर पाता। उसको पूरा पूरा attention चाहिए होता है ।
  • इस अवस्था में पहुँचने तक साथी व्यक्ति उससे अपना सम्बन्ध पूरी तरह तोड़ लेता है । एवं सम्बन्ध पूर्णतया समाप्त हो जाते हैं।
  • वह व्यक्ति पूरी तरह मानसिक रोग [ Obsessive compulsive disorder] कि चपेट में आ जाता है ।
  • उसे लगता है कि साथी ने उसे धोखा दिया है। फिर वह उसे हर तरह से परेशान [harass] करने लगता है।
  • बार बार उसके घर अथवा ऑफिस पर फोन करता है और उसका attention , डिमांड करता है।
  • जब attention नहीं मिलता तो हिंसक हो उठता है। अभद्र क्रिया कलापों में लिप्त हो जाता है।
  • अंतिम चरण आते आते , वह विनाश कि और अग्रसर हो चुका होता है।
  • अवसाद से ग्रस्त रहने लगता है तथा साथी को खो देने के कारण अपना आत्म-सम्मान [self esteem] भी खो देता है।
  • किसी के समझाने पर सुनता भी नहीं है ।
  • अपनी धारणाओं के प्रति जडवत हो जाता है , उसे लगता है कि वह जो सोच रहा है , वही सही है। जो भी उसे समझाने कि कोशिश करता है , वह उसे भी अपना दुश्मन समझने लगता है
  • ऐसा व्यक्ति जीवन पर्यंत शिकायतों [grudges] को अपने मन में रखता है और उसे पालता पोसता रहता है। वो अपने मन में पैदा होने वाली घृणा से नहीं लड़ पाता , चीज़ों को भुला नहीं पाता और उसकी नकारात्मकता दिन दूनी बढती जाती है।
  • वह कभी खुद को आघात पहुंचाता है और कभी खो गए साथी को अनेक प्रकार से नुकसान पहुंचाने कि कुचेष्टा करता है।
  • धीरे-धीरे वो अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने के लिए , शराब, ड्रग्स , सेक्स आदि में फंस जाता है।

उसका अंत या तो आत्महत्या में होता है , या फिर वह शिकारी [stalker] , बलात्कारी[rapist] अथवा कातिल[murderer] में तब्दील हो जाता है। आजकल 'असफल प्रेमियों' द्वारा ह्त्या के बहुत से किस्से आये दिन प्रकाश में रहे हैं।

इसलिए यदि आप किसी के मित्र हैं , लेकिन वो बहुत ज्यादा डिमांडिंग हो रहा है और आप पर पूरा नियंत्रण रखने कि कोशिश कर रहा है , तो समय रहते सचेत होकर ऐसे लोगों से दूरी बना लीजिये अन्यथा ये आपकी हँसती मुस्कुराती जिंदगी को नरक समान बना देंगे। क्यूंकि 'जियो और जीने दो' क्या होता है , ये इन्हें मालूम ही नहीं होता।

आभार।

91 comments:

घनश्याम मौर्य said...

आज से नहीं, बल्कि बरसों से बलात्‍कार बदला लेने और अपमानित करने के हथकण्‍डे के तौर पर इस्‍तेमाल किया जा रहा है। यदि किसी महिला से बदला लेना हो तो भी, और यदि किसी पुरुष या उसके परिवार से बदला लेना हो तो भी, उस परिवार की महिला को ही शिकार बनाया जाता है।

Sunil Kumar said...

आज तो आपने डाक्टर दिव्या श्रीवास्तव का काम किया मेडिकल से सम्बंधित जानकारी दे डाली सार्थक पोस्ट आभार

निरामिष said...

हीन-बोध से ग्रसित व्यक्ति प्रेम को सहज नहीं ले पाता। प्रतिकूल स्थिति में उसमें विकार जन्म ले लेते है। और धीरे धीरे उसकी मानसिकता ही विकृत हो जाती है।

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (5-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

प्रेम वही कर सकता है जिसमें जुनून होगा... जिसमें जुनून और पाने की चाहत ही नहीं वो किसी भी काम को नहीं कर सकता..

DR. ANWER JAMAL said...

ऐसे विकारी शिकारी अगर कलामे हाली पढ़ते और नेक सोहबत में रहते तो उनके जींस फिर नेकी के लिए डिमांड करते।
http://mankiduniya.blogspot.com/

vishwajeetsingh said...

प्रेम का आधार त्याग होता हैं , लेकिन कुछ खण्डित मानसिकता के युवा केवल दैहिक आकर्षण को ही प्रेम समझने लगते है और इच्छित कामना की पूर्ति न होने पर जबरदस्ती पर उतर आते है , जिसके कारण प्यार का नाम बदनाम होता हैं ।
वैज्ञानिक सोच पर आधारित तथ्यात्मक सुन्दर प्रस्तुती ...... आभार ।

vishwajeetsingh said...
This comment has been removed by the author.
shikha varshney said...

ज्ञान परक रही पोस्ट
आभार

रूप said...

Bahut upyogi wishay chunti hain aap. Samajik chetna hetu aapko badhai. Likhte rahein. Samaj ka bhala hoga. Sadhuwad !

Kunwar Kusumesh said...

पढ़ने लायक पोस्ट है और सभी के काम की भी.

अरविन्द जांगिड said...

बहुत इस उपयोगी एंव ज्ञानवर्धन जानकारी दी है आपने, साथ ही बहुत ही सुन्दर तरीके से विश्लेषण भी किया है. वक्त रहते उपरोक्त बिंदुओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए, आमतौर पर महिलाए इसे सहज लेती हैं जो आगे जाकर गले की हड्डी बन जाती है. वैसे मेरे अनुसार बहुत ही कम महिलायें ऐसी होती हैं जो मर्यादा को तोडती हैं, ये आदत पुरुषों में ज्यादा होती है.

सुन्दर लेखन हेतु आपका आभार.

AlbelaKhatri.com said...

upyogi

atyant upyogi post !

dhnyavaad is aalekh ke liye

ashish said...

अच्छे से व्याख्या की है आपने इस मानसिक दुर्गुण की जो बहुत ही घातक हो सकता है . जियो और जीने दो वाला जीवन सूत्र हमने पहचान लिया है .

ehsas said...

मैं आपकी इसमें कही हुई सारी बातों से सहमत हुॅ। बेहद प्रभावशाली रचना। आभार।

प्रतुल वशिष्ठ said...

पिछले दिनों मैं ऐसे ही एक व्यक्ति से मिला था.... उसके दो दिन बाद आपको सर्वश्रेष्ठ ब्लोगर वाला स्वप्न आया. उस स्वप्न में जिसने आपको मूर्ख कहकर संबोधित किया था ... शायद वही तो नहीं.

Kailash Sharma said...

बहुत सार्थक जानकारी से परिपूर्ण पोस्ट..आभार

अमित श्रीवास्तव said...

आप द्वारा लिखे गये बिन्दुओं में से दो-चार बिन्दु तो लगभग बहुत से लोगों में प्रायः परिलक्षित हो जाते हैं ,अब सचेत रहेंगे । बहुत बहुत आभार

Jagan Ramamoorthy said...

Dr. Divya, This is a very well written post from your thought provoking "Pen" indeed, deeply thought out and analyzed with an in depth study of a very sensitive (Few maybe) Archetypes of human behavior specially at the ages of early adulthood to mid-life. There is indeed a lot of reasons behind each of these behavior patterns found in such "Obsessive lovers" or even stalkers, that you have brought to light here, through this blog article. What I have learned over years of interaction with people of all races and countries, cultures and heritage -- that human beings, specially those who get to this line of thought within, are ridden with one or more of the archetypal behavior pattern such as:
A) Hero Worship
B) Victim
C) Abuser
D) Abused turned Abuser
E) Prostitute archetype (I am talking about Males here, not the typical understanding that only females are Prostitutes in this world).
F) Inner child molested --- this is the most crucial in this list.
G) Predator -- This one is where your analysis lands ABSOLUTELY into a canyon and stays there -- for more clarity sought by all. (There's a common misunderstanding among people, that just as a Predator is looking for a prey, the prey also follows a line of thoughts, feelings and acts of his/her predator, to finally fall "Prey". This is very unfortunate, indeed).
H)Last but not the least, the Obsessive Lovers-Stalkers -- which you have so beautifully explained here, from a medical and a Spiritual point of view too.

This should be taken very seriously by both kinds of people, at the receiving end and at the giving end.

Overall, a very thought provoking post indeed. Keep going with such great articles of grave importance for the society and human kind.
Much gratitude. Yours, J.

Vaanbhatt said...

दुनिया की विविधता का ये भी एक रूप है...आप सैकोलोजिस्ट भी हैं...मानवीय विकारों पर अच्छी पकड़ है...

श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’ said...

दिव्या जी .. !

प्रस्तुत आलेख के बारे में ... संभवत: जो भी कहा जाय वह कम ही है। एक सार्थक और बहुउपयोगी लेख है।


अपनी कविता नारी नदी का प्रवाह ...... [कविता एवं स्वर] - श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’
तृषा'कान्त': trishakant.blogspot.com
पर आपकी टिप्पणी से यहां तक पहुंचना सार्थक लगा ।

आलेख में प्रस्तुत जानकारी का उपयोग भावी चर्चाओं में मेरे काम आयेगा। - आभार

SAJAN.AAWARA said...

MAM AAJ KE JMANE ME LOGON ME SAHANSHILTA OR AATM NIYANTRAN KI KAMI HAI. AGAR HMARI WILL POWER STRONG HAI TO HAM APNE AAP PAR CONTROLL KAR SAKTE HAIN. OR AGAR LOG APNE AAP KO THODA SA BUSY KAR LEN TO UNKE MAN ME JO GANDI BHAWNAYEN AATI HAI WO KAM HO JAYENGI. . . . . ISME HMARE SMAAJ KI BHI GALTI HAI MAA BAAP KI BHI GALTI HAI. AGAR BACHA PAHLI BAAR KOI GALTI KARTA HAI TO USKO TABHI SAMJHANA CHAHIYE SAHI GALAT KE BARE ME BTANA CHAHIYE, ISSE WO FUTURE ME KO GALTKAM KARNE SE PAHLE SO BAAS SOCHEGA LEKIN ESA NAHI HOTA BOLA JATA HAI KI BACHA HAI BDA HO KAR KGUD SAMJH JAYEGA, JO EK BAHUT BDI GALTI HAI, JISKA PARINAAM HUMKO EK BAHUT BDI GHTNA KE RUUP ME DEKHNE KO MILTA HAI. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . ME IS TOPIC PAR EK RACHNA JRUR LIKHUNGA SHAYAD USE PADHKAR KISI KO TO AKAL AAYE. . . . . . . . . . . . . OR MAM AAPKI PURANI RACHNAYE, LEKH PADHE JO KUCH SIKHATE HAIN OR SOCHNE KO MAJBUR KARTEN HAIN. . . . . . . . . . . . . JAI HIND JAI BHARAT

निशांत said...

sahanshilta bahut jaroori hai aaj ke jagat me..aur saath saath adjustment......
par itna jaroor kahunga ki aisi ghatna nindaniya hai..
par iska ilaaz sambhav hai...

an empty mind is devil's house..so apne ko acche karyon me lagana chahiye...
life shows always a way...
lot of problems to deal with but we should amuse ourselves with our creativity...as writing ,reading ,listening songs....and also no one needs so much attention and no one needs violation ..all needs appreciation ...and appreciation for their good work.....i personally feel that we should not except so much ...because "ati sarvatra varjayate"......

मोहिनी said...

Films are big contributers and provokers, wrong feelings in the minds of the guys, which lead to simple beautiful relation of friendship or love, into psychological illness.

अरुण चन्द्र रॉय said...

अदभुद ! बहुत उपयोगी जानकारी.. आपकी विविधता से प्रभावित हूँ...

cmpershad said...

इसे प्रेम कहें या केवल कामुकता कि किसी लड़की ने अपने प्रेमी के साथ आना नहीं माना तो उस पर तेज़ाब फ़ेंक किया या गला रेत दिया :(

कौशलेन्द्र said...

दिव्या जी ! मुझे लगता है कि किंचित मात्रा में यह ओब्सेसिव बिहैवियर आजकल आम हो गया है......विपरीत लिंगियों में ही नहीं बल्कि अन्य पारिवारिक-सामाजिक रिश्तों में भी ......इस तरह के लोग सचमुच में स्वयं के अतिरिक्त और किसी से प्रेम नहीं करते .......उन्हें केवल स्वयं की चिंता होती है.....दूसरे की नहीं ......दूसरे को तो वह स्तेमाल करना चाहता है अपने लिए . आप ध्यान से देखेंगी तो पता चलेगा कि आज के अभिवावकों का व्यवहार भी अपने बच्चों के प्रति कुछ ऐसा ही होता जा रहा है ......वे अपनी अपूर्ण अभिलाषाएं अपने बच्चों में पूरी होते देखना चाहते हैं. बच्चों की रूचि ..उनकी इच्छाएं उनकी क्षमताओं का कोई मूल्य नहीं. वे अपने निर्णय थोप देते हैं बच्चों पर ....उनका व्यवहार बच्चों को असमय में ही बुज़ुर्ग बना देता है ...उनके बचपन की ह्त्या हो जाती है ..उनके अपने ही माँ-बाप के द्वारा .

ओब्सेसिव बिहैवियर वालों के प्रेम को आकर्षण कहना अधिक उचित होगा. .....प्रेम तो देता है ......केवल और केवल देता है...वह कुछ चाहता नहीं प्रतिदान में ......जो प्रेम का प्रतिदान मांगता है वह आत्मप्रेमी और स्वार्थी होता है.

बहुत ही अच्छी पोस्ट दिव्या ! सामयिक भी .......लोगों को आवश्यकता है इस प्रकार की जानकारी की .

kshama said...

Bahut badhiya jaankaaree milee! Ekdam sahee vishleshan hai!

प्रवीण पाण्डेय said...

प्रेम की सरलता कठिनतम है।

mahendra verma said...

Abnormal Psychology के एक महत्वपूर्ण विषय वस्तु पर आधारित यह प्रस्तुति सामयिक और जन-सामान्य के लिए उपयोगी है।
जागरूकता संचारित करने में सक्षम इस आलेख के लिए आपका आभार।

सुज्ञ said...

ऐसे बिमार विकारी,शिकारी और अनाचारी, अधिकांश समाज में सामान्य लोगों की तरह रहते है। जब तक परिस्थितियां नहीं बनती, उनके विकार सुसुप्त अवस्था में रहते है। सामान्य व्यवहार करते से नजर आते है, हमारे आस पास, समाज में, कार्यस्थलों पर, सोशल नेट या ब्लॉग जगत में भी हो सकते है। उनके अहं के प्रतिकूल स्थिति आने पर वह विकृति उभर आती है।

Rajesh Kumari said...

divya ji is article ki jitni taareef ki jaye vo kum hai.aapne sahi kaha hai ki iska mukhya kaaran genes me chupa hota hai.kuch paristhitiyan aur mansik vikrata yese asamajik tatv paida karti hai.
is adbhud lekh ke liye bahut bahut badhaai.

Rakesh Kumar said...

गहन विश्लेषण ,सार्थक चिंतन.
उम्दा जानकारी के लिए बहुत बहुत आभार.

राज भाटिय़ा said...

सब से पहले तो हम मे से बहुत कम लोगो को प्रेम के बारे पता हे, प्रेम हे क्या?सुंदर चेहरा देखा ओर प्रेम हो गया? क्या यही प्रेम हे? ओर जो प्रेम करते हे उन के दिल मे बदले की भावना कभी नही आती मुर्ख आदमी भी अगर प्रेम करेगा तो कभी भी अपने प्रेमी को दुख नही पहुचायेगा, ऎसा काम तो एक दहशत कारी ही करते हे, लफ़ंगे, घटिया ओर जिन्हे अपनी ताकत पर घमंड होता हे,अकल पर घमंड होता हे...

मदन शर्मा said...

इतनी अच्छी जानकारी के लिए आभार आपका ! मेरी हार्दिक शुभ कामनाएं आपके साथ हैं !!

मनोज भारती said...

प्रेम के खतरों पर एक बेहतरीन जानकारी देती पोस्ट। अति सर्वत्र वर्जयेत !!! धन्यवाद इस पोस्ट के लिए।

मनोज कुमार said...

बेहतरीन पोस्ट। उपयोगी, जानकारी परक। आपके लेखों की विविधता न सिर्फ़ प्रभावित करती है बल्कि समाजोपयोगी भी होती हैं।

udaya veer singh said...

Your inspection of social issues tested by medico point of view,its seems miraculous .Its very scientific and acceptable .Well done .A seer congratulation .

दर्शन कौर धनोए said...

बेहतरीन पोस्ट। इतनी अच्छी जानकारी धन्यवाद...

डा० अमर कुमार said...

.
कुछ अधूरा सा किन्तु उत्तम आलेख
जिसे आपने प्रेम की सँज्ञा दी है, वह महज़ वासनाजनित आकर्षण है.. मँतव्य पूरा न होते देख जिसकी परिणति इन अपराधों में होती है । निश्चय ही यह एक असामान्य मनोदशा है, जो विकृत जींस की उपस्थिति में कुसँस्कार और परिस्थितिजन्य कारणों से सामने आती है । जो पहलू छूट गये हैं, उनमें
नशे का उन्माद,
सेन्सेशन पैदा करने की चाहत,
थ्रिल का किशोर रोमाँच,
अपमानित करने की कुँठा,
विजयी होने का जश्न एवँ
पुरुष अहँ की तुष्टि इत्यादि अन्य गिनवाये जा सकते हैं !
दूसरे यह कि बल प्रयोग द्वारा हरण को बलात्कार कह दिया गया है किन्तु छल के द्वारा देह-वरण को आप क्या कहेंगी ।
दोनों ही स्थिति में नारी अस्मिता खँडित हो रही है । मैं समझता हूँ एकाँगी सामान्यीकरण से बचा जा सकता था !
मेरी तात्कालिक समझ में जो मन में आया, परिचर्चा की दृष्टि से वह यहाँ बघार दिया... इसके मायने यह नहीं है कि आपने प्रभावशाली नहीं लिखा है ! अच्छी प्रस्तुति !

देवेन्द्र said...

प्रिय दिव्या जी, अति तर्कपूर्ण,स्पष्ट व सुन्दर अभिव्यक्ति।
इस उन्माद में मनुष्य का विवेक व उसकी मनुष्यता नष्ट हो जाती है और वह हिंसक जानवर से भी हिंसक व खतरनाक हो सकता है। इसी तरह के विचारों के साथ मैंने एक कविता
.......क्षण का उन्माद। भी अपने ब्लॉग पर पोष्ट किया है। समय निकालकर अवश्य पढियेगा।

Markand Dave said...

मेरी प्यारी बहना सुश्रीदिव्याजी,(झीलजी)

"जो खुद निर्मल मन के होते हैं,वही अच्छे गीत का आनंद उठा पाते हैं", आप भी बड़े उम्दा स्वभाव की धनी है । अब अपनी बहन से कोई शुक्रिया कहता है भला..!!

आपका मेल एड्रेस न होने की वजह से,मेरे पोस्ट की टिप्पणीका उत्तर मैने यहाँ दिया है ।

मार्कण्ड दवे।

एम सिंह said...

आपकी बात तर्कसंगत है. इस पर गौर किया जाना चाहिए.

दुनाली पर स्वागत है-
‌‌‌ना चाहकर भी

वाणी गीत said...

प्रेम का यह रूप मेरी समझ में कभी नहीं आया ...जिससे प्रेम किया उसके बर्ताव से दुःख हो सकता है , नाराजगी भी हो सकती है मगर नफरत कैसे !!

मीनाक्षी said...

ऐसे व्यवहार को प्रेम का नाम तो कभी नहीं दिया जा सकता..महज एक आकर्षण जिसके वशीभूत इंसान उन्मादी होकर कुछ भी करने को अमादा हो जाता है...

Suman said...

achhi post divya ji,
bahut badhiya........

aarkay said...

प्रथम दृष्टया ऐसे व्यवहार वाले व्यक्ति को प्रेमी मान लेने को दिल नहीं मानता , और न ही ऐसे व्यवहार को प्रेम. प्रेम तो एक कोमल भावना है जिस के वशीभूत हो कर व्यक्ति अपने प्रेमी या प्रेमिका के लिए कुछ भी बलिदान करने को तत्पर रहता है . दिव्या जी , जिस प्रकार के possessive प्रेमी का आपने वर्णन किया है , वह एक प्रेमी न हो कर psychopath ही हो सकता है , जैसा कि Shakespeare का Othello . इस लिए मीनाक्षी जी ने जो कहा उस से भी पूरी तरह सहमत हूँ.
बढिया विश्लेषण एक सामायिक समस्या को ले कर !

amrendra "amar" said...

सुन्दर प्रस्तुती ... आभार ।

ZEAL said...

कुछ अधूरा सा किन्तु उत्तम आलेख
जिसे आपने प्रेम की सँज्ञा दी है, वह महज़ वासनाजनित आकर्षण है.. मँतव्य पूरा न होते देख जिसकी परिणति इन अपराधों में होती है । निश्चय ही यह एक असामान्य मनोदशा है, जो विकृत जींस की उपस्थिति में कुसँस्कार और परिस्थितिजन्य कारणों से सामने आती है । जो पहलू छूट गये हैं, उनमें
नशे का उन्माद,
सेन्सेशन पैदा करने की चाहत,
थ्रिल का किशोर रोमाँच,
अपमानित करने की कुँठा,
विजयी होने का जश्न एवँ
पुरुष अहँ की तुष्टि इत्यादि अन्य गिनवाये जा सकते हैं !
दूसरे यह कि बल प्रयोग द्वारा हरण को बलात्कार कह दिया गया है किन्तु छल के द्वारा देह-वरण को आप क्या कहेंगी ।
दोनों ही स्थिति में नारी अस्मिता खँडित हो रही है । मैं समझता हूँ एकाँगी सामान्यीकरण से बचा जा सकता था !
मेरी तात्कालिक समझ में जो मन में आया, परिचर्चा की दृष्टि से वह यहाँ बघार दिया... इसके मायने यह नहीं है कि आपने प्रभावशाली नहीं लिखा है ! अच्छी प्रस्तुति !

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१-@-कुछ अधूरा सा किन्तु उत्तम आलेख...

डॉ साहब , मेरी समझ से यह लेख सम्पूर्ण है । यही आपको अधूरा लग रहा है तो कृपया कमेन्ट के माध्यम से इसे पूरा कर दीजिये । ताकि पाठकों के साथ-साथ मेरा भी ज्ञानवर्धन हो ।

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२-@-आपने प्रेम की सँज्ञा दी है, वह महज़ वासनाजनित आकर्षण है...

प्रेम की संज्ञा मैंने नहीं दी है । इस प्रकार के प्रेम को "obsessive love" कहते हैं । यह एक रोग है तथा ऐसा व्यक्ति रोगी है । ' obsession' अपने आप में विकार है । तथा obsessive love रुग्ण व्यक्ति की पहचान है । सामान्य व्यक्ति इस प्रकार अपने साथी की जिंदगी को obsessed होकर अपमानित, प्रताड़ित नहीं करता ।

सामान्य व्यक्ति का प्रेम एक सुखद एहसास देता है , जबकि 'obsessive love' किसी के जीवन में विष` घोल देता है ।

obsessive love , प्रेम नहीं है , उसका विकृत स्वरुप है , जो एक रोगी के अन्दर ही देखने को मिलेगा , सामान्य व्यक्ति में नहीं। फिर भी इस रोग के नामकरण में "प्रेम " [obsessive love] शब्द तो है ही।

इस 'विकृत प्रेम' को समझाने के लिए ही तो इतनी मेहनत की है इस लेख में ।

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३-@-दूसरे यह कि बल प्रयोग द्वारा हरण को बलात्कार कह दिया गया है किन्तु छल के द्वारा देह-वरण को आप क्या कहेंगी ।

पहली बात तो यह की ये विषयांतर है , जिसे एक पृथक आलेख में डील किया जाएगा, ताकि इस लेख के विषय के साथ न्याय हो सके। दूसरी बात - छल , रोगी-मानसिकता का परिचायक नहीं अपितु सामान्य व्यक्ति की कुटिल-मानसिकता" का परिचायक है ।

इस लेख में हम "obsessive -compulsive disorder " की ही चर्चा करेंगे ।

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४-@- मैं समझता हूँ एकाँगी सामान्यीकरण से बचा जा सकता था !...

समझ नहीं आया की आपको ऐसा क्यूँ लगा की मैंने कहीं एकांगी सामान्यीकरण किया है । यहाँ तो एक मानसिक रोग की चर्चा की गयी है । और मानसिक रोगी तो कोई भी हो सकता है । स्त्री हो अथवा पुरुष ।

शायद आपने ध्यान नहीं दिया है । लेख में भी स्त्री और पुरुष दोनों का जिक्र है। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं की इस रोग से ज्यादातर पुरुष ही ग्रसित दिखते हैं । महिलाओं में यह विकृति कम ही पायी जाती है।

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पुनश्च, आपको यह लेख पसंद आया , इसके लिए आभार।

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ZEAL said...

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वाणी गीत said...

प्रेम का यह रूप मेरी समझ में कभी नहीं आया ...जिससे प्रेम किया उसके बर्ताव से दुःख हो सकता है , नाराजगी भी हो सकती है मगर नफरत कैसे !!
May 5, 2011 10:07 AM


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वाणी जी ,

आपने बहुत सही बात कही है। प्रेम में बुरा माना जा सकता है , नाराज़ हुआ जा सकता है , लेकिन 'नफरत' नहीं हो सकती । जब ये नफरत किसी मनुष्य के ह्रदय में प्रवेश कर जाती है तभी वह व्यक्ति 'रोगी' कहलाता है और प्रेम -"रुग्ण प्रेम" अर्थात "obsessive love।

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rashmi ravija said...

क्यूंकि 'जियो और जीने दो' क्या होता है , ये इन्हें मालूम ही नहीं होता।

सच है....येन-केन-प्रकारेण....चोट पहुंचाने की कोशिश में लगे होते हैं,ऐसे जीव....जबकि दुनिया इतनी बड़ी है...जरा सी कोशिश से उन्हें अपना मनोनुकूल साथ मिल जा सकता है.,मिल जाता भी है.......फिर भी rejection का अहसास उन्हें जीने नहीं देता...

इसका soft version कई बार मित्रता में भी देखने को मिल जाता है...

SAJAN.AAWARA said...

MAM AAPKA YE LEKH PADHKAR MENE EK RACHNA ISI TOPIC PAR BNAKAR POST KAR DI HAI, KABI TIME MILE TO JRUR PADHIYEGA... JAI HIND JAI BHARAT.

SAJAN.AAWARA said...

MAM AAPKA YE LEKH PADHKAR MENE EK RACHNA ISI TOPIC PAR BNAKAR POST KAR DI HAI, KABI TIME MILE TO JRUR PADHIYEGA... JAI HIND JAI BHARAT.

डा० अमर कुमार said...

.@ क्षमा करें डॉ. दिव्या
क्षमा करें...आपके आलेख में " ये मानसिक रोग हर किसी को नहीं होता ।" यह पँक्ति मुझसे पढ़ने में छूट गया था, साथ ही मैं पूरा आलेख शीशक मे दिये प्रेम के सँदर्भ में पढ़ गया । इसी वजह से ऎसे कृत्यों के कारण में मैंनें नशे का उन्माद, सेन्सेशन पैदा करने की चाहत, थ्रिल का किशोर रोमाँच, अपमानित करने की कुँठा, विजयी होने का जश्न एवँ पुरुष अहँ की तुष्टि जैसे अन्य सामजशास्त्रीय तत्व गिनवा दिये ।
यदि आपने मनोरोग के परिप्रेक्ष्य से लिखा है, तो बात यहीं खत्म हो जाती है !
सँदर्भतः OCD यानि मनोग्रस्ति-बाध्यता-विकृति हमेशा सेक्स मनोविकृति से नहीं जुड़ी होती । परिभाषानुसार " मनोग्रस्तता अँतर्वेधी एवँ पुनरावर्ती चिंतन, आवेग एवँ प्रतिमायें होती हैं, जो मन में अनचाहे या स्वैच्छिक रूप से आती हैं और अनुभव करने वाले व्यक्ति के लिये असँगत एवँ अनियँत्रनीय होता है, साथ ही अवाँछित व अतार्किक क्रिया को बाध्य करती हैं ।
बलात्कार जैसे कृत्य को Yeilding Compulsion भले मान लें किन्तु इसे Obsessive Impulse में नहीं रखा जा सकता
( सँदर्भ: Akhtar et al 1975 एवँ Davidson and Neale, 1976 )

ZEAL said...

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डॉ अमर ,

इतना तो आप भी जानते होंगे की किसी भी रोग से ग्रसित हर व्यक्ति में सभी लक्षण एक जैसे हों ऐसे नहीं होता । OCD से ग्रसित हर व्यक्ति , बलात्कारी होगा , ऐसा तो मैंने कहीं नहीं लिखा है । लेकिन इस मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्ति , obsession के बढ़ने के साथ अनेक प्रकार के crime में लिप्त हो जाते हैं , जो सामान्य pestering से लेकर, बलात्कार अथवा murder तक कुछ भी हो सकता है। नफरत में अंधे होकर obsessed pateints कुछ भी कर सकते हैं।

उदाहरण -
१-उत्सव जैसा युवक जो 'नफरत' में फसकर दो बार चाकू से दोषियों को मारने की चेष्टा , निश्चय ही किसी न किसी प्रकार के obsession से ग्रस्त है ।
२- अभी हाल में मुंबई में ही एक महिला ने ३०० लोगों को एड्स का संक्रमण दे दिया । ये उसका obsessed behaviour ही है । उसे नफरत का कारण है उसका पति जिसने उसे HIV संक्रमित किया।

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गिरधारी खंकरियाल said...

क्या ये केवल पुरुषों में ही पाया जाता है या महिलाओं में भी ? क्या महिला भी एक रेपिस्ट हो सकती है ? या संज्ञा दी जा सकती है सेक्स अतिशयता में ?

ZEAL said...

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गत वर्ष , समाचारों में कानपुर IIT का छात्र [२५ वर्ष] , जो पढाई में बेहद ज़हीन था , ने अपनी पड़ोस में रह रही उन्नीस वर्षीय मणिपुरी लड़की को propose किया। लड़की ने उसकी दोस्ती से इनकार कर दिया । उस लड़के ने मौका पाकर उस लड़की को gas stove की आग से जला कर मार डाला। उस लड़के ने अपने सभी भाव अपनी डायरी में लिख रखे थे।

वो लड़का दिखने में सभ्रांत , पढाई में topper , तथा बेहद संजीदा किस्म का था , फिर भी उसने ऐसा किया । किसी को उस पर किंचित भी शक नहीं हो सकता था। लेकिन वह लड़का उस लड़की के द्वारा मिला rejection स्वीकार नहीं कर पा रहा था। उसके मानसिक विकार ने उसकी सोचने समझने की शक्ति को जड़ कर दिया था। ऐसे लोग obsessed कहलाते हैं और आजीवन किसी grudge [शिकायत] , को अपने मन में रखते हैं और उसी पर मनन करते रहते हैं तथा अपनी धारणाओं को पोषित करते रहते हैं।

ऐसे लोगों को अपने कृत्यों का ज़रा भी पछतावा नहीं होता। वे अपने कृत्यों को बार-बार दोहराते हैं । उनकी सही-गलत विभेदक बुद्धि नष्टप्राय होती है।

आप के आस-पास के परिवेश में , ब्लॉगजगत में या फिर आफिस आदि कार्यस्थल पर यदि कोई अकारण ही आपसे द्वेष रखता है और आपको harass करने का कोई अवसर नहीं चूकता तो निश्चित जानिये की ऐसा व्यक्ति obsessed है। सामान्य दीखते हुए भी ये मनोरोगी होते हैं।

इनके अन्दर "Fear of rejection" बहुत गहरे बैठ जाता है । ये बेहद कुंठाग्रस्त हो जाते हैं । अभी तक तो ये रोग लाइलाज है । इसकी चिकित्सा "psychiatry' के अंतर्गत आएगी।

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ZEAL said...

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@-क्या ये केवल पुरुषों में ही पाया जाता है या महिलाओं में भी ? क्या महिला भी एक रेपिस्ट हो सकती है ? या संज्ञा दी जा सकती है सेक्स अतिशयता में ?...

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गिरधारी लाल जी ,

कोई भी मनोरोग [mental illness] , स्त्री अथवा पुरुष दोनों में हो सकती है। लेकिन पुरुष इश्वर द्वारा ही थोड़े आक्रामक स्वभाव के बनाए गए हैं। rejection उनके पुरुष दर्प को ज्यादा आहत करती है और वो जल्दी कुंठा के शिकार होते हैं । इसलिए स्त्रियों की अपेक्षा पुरुष ज्यादा शिकार होते हैं कुंठा का।

यदि पश्चिम के देशों की बात करें तो वहाँ की स्त्रियों और पुरुषों के स्वभाव में विशेष अंतर नहीं होता । क्यूंकि उनके यहाँ gender discrimination भी नहीं है । इसलिए वे आक्रामक भी पुरुषों की तरह होती हैं और कुंठा का शिकार ज्यादा होती हैं , भारतीय स्त्रियों की तुलना में । भारतीय स्त्रियाँ थोडा ज्यादा बर्दाश्त करने वाले स्वभाव की होती हैं , और किसी भी परिस्थिति में इतनी जल्दी धैर्य नहीं खोती हैं ।

बलात्कार सम्बन्धी --

भारत के क़ानून में स्त्रियों द्वारा बलात्कार मान्य नहीं है , ना ही ऐसी कोई घटना आज तक प्रकाश में आई है। लेकिन पश्चिम देशों में स्त्री तथा पुरुष दोनों पर rape करने के आरोप लग सकते हैं , वहाँ के क़ानून के अनुसार स्त्रियाँ भी rapist हो सकती हैं।

भारत की संस्कृति और सभ्यता स्त्रियों को बहुत से अपराधों से बचा कर रखती है।

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संजय भास्कर said...

बहुत ही अच्छी पोस्ट दिव्या जी!

OM KASHYAP said...

jaankari se bharpoor
comment dene par karti majboor
jabardast post

OM KASHYAP said...

charchamanch par chune jane ke liye bahut bahut badhai

आचार्य परशुराम राय said...

जुनून-ग्रस्त लोगों के मानसिक लक्षणों को आपने बड़े ही अच्छे ढंग से विवेचित किया है। आपके द्वारा किया गया मनोवैज्ञानिक विश्लेषण बहुत ही रोचक है। साधुवाद।

डॉ टी एस दराल said...

इसीलिए ज़रूरी है अच्छे बुरे की पहचान होना ।
आरम्भ में ही पहचान लिया जाए तो पीछा छुड़ाया जा सकता है ।
लेकिन अक्सर जवानी के जोश में देर हो चुकी होती है ।

सार्थक लेख दिव्या जी ।

जयकृष्ण राय तुषार said...

उन्माद का सुंदर सार्थक जनोपयोगी और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए आपको बधाई |

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

बिलकुल सही जानकारी दी है आपने...कॉलेज के दिनों में मैंने भी कुछ कुछ एक ऐसा ही उदाहरण देखा है...मेरे साथ नहीं हुआ, एक दोस्त को देखा है...ईश्वर की दया से मैं इन सब बातों से हमेशा दूर रहा हूँ| किन्तु एक दोस्त को इसी प्रकार एक लड़की के पीछे तिल तिल कर मरते देखा था| उसे हम सब ने बहुत समझाया था, किन्तु वह समझता ही नहीं था| फिर कुछ घटनाएं ऐसी घटी जिससे कि उसका ध्यान उस लड़की से दूर हटा| उन दोनों की कहानी में पहले तो हमने यही देखा था कि दोनों एक दुसरे से प्रेम करते थे, फिर पता नहीं क्या हुआ लड़की उससे दूर दूर रहने लगी जिससे वह असुरक्षित महसूस करने लगा| दोस्तों के सामने कभी रोता, कभी गुस्सा करता, कभी अजीब अजीब बातें करता तो कभी कुछ| अब वह लड़की कैसी थी यह तो मै नहीं जानता था किन्तु एक बार उसने कुछ लड़कों को भेज कर उसका झगडा करवा दिया| इस घटना में उसके गाल पर व सर में लड़कों ने काफी जख्म दे दिए थे| अब तो उसकी हालत हमसे देखी भी नहीं जाती थी| इस घटना के कुछ महीनों बाद उस लड़के की माँ का देहांत हो गया| इससे वह बुरी तरह टूट चूका था| हम उससे बात करते तो कभी कभी वह कुछ बोलता भी नहीं था| मन में हमेशा यही डर लगा रहता कि अब पता नहीं इसका क्या होगा| कहीं यह आत्म हत्या न कर ले| हम सब दोस्त हमेशा उसे अपने साथ ही रखते थे, उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते थे| धीरे धीरे इस प्रकार की कुछ घटनाओं के बाद वह उस लड़की से दूर होता गया और पढ़ाई में अपना मन लगाने लगा| आज मुझे ख़ुशी है कि उसने अपना जीवन बरबाद होने से बचा लिया| आज वह एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर है| जहां उसकी काफी इज्ज़त भी है| उसमे एक आत्म विश्वास है| उसे देख कर कई बार विश्वास नहीं होता कि यह मेरा वही दोस्त है जिसके लिए मै डरता था कि कहीं यह कुछ अनर्थ न कर बैठे| किन्तु आज वह जब व्याख्यान देता है तो उसका ज्ञान व आत्मविश्वास देख कर सभी छात्र व अन्य शिक्षक उसका सम्मान करते हैं| ऐसा मुझे इसलिए पता चला क्यों कि एक बार मै भी उसकी कक्षा में बैठ चूका हूँ उसकी प्रतिष्ठा देखने के लिए| मै सच में यह देख कर बहुत खुश हुआ|

Dr Varsha Singh said...

A teenage girl student was on Wednesday beheaded in the campus of the prestigious St Xavier's College in Ranchi by her jilted lover, police said.

"Kusum Kumari (17) was beheaded with a sharp weapon in the campus of St Xavier's College by a young man who was identified as Vijendra Prasad," Superintendent of Police Sambhu Thakur told PTI.

Senior Superintendent of Police Praveen Kumar said Prasad admitted during interrogation that both he and Kumari hailed from Sonari area of Jamshedpur in Jharkhand and he loved her for the past five years.

However, it was a one-sided affair, the SSP said, adding, Prasad had the intention of committing suicide after killing her but was overpowered by students before he could do that.
what's that ...? LOVE OR ....

निशांत said...

dinesh gaur ji ne jo kaha usase bahut kuch sikhne ko mil sakta hai..
main bhi unke dost ke liye bahut khush hoon....
jeevan me prem kuch accha karne ka sahas deta hai..
aatmvishwas deta hai....
unke liye aur unke family ke liye hamari or se best of wishes..

निशांत said...

jaise dinesh ji aur unke doston ne apne dost ka saath nahi chora aur unki apni mehnat aur prem ke shakti par vishwas ...aisa karne se bahut had tak ek jeevan jyoti dikhayi jaa sakti hai....
aur yatha sambhav prayas karte rahna chahiye ...

ZEAL said...

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भाई दिवस, डॉ वर्षा जी ,

बहुत सटीक उदाहरण आपने बताये वैसे ही अनेक प्रकरण हम रोज ही समाचारों में सुनते हैं और अपने आस-पास परिवेश में देखते हैं। जरूरत है की हम समझें ध्यान से मनुष्य के विकृत होते स्वभाव और मानसिकता को । यदि हम्मे जागरूकता नहीं रहेगी तो हम भी कभी न कभी इन्हीं stalkers का शिकार बन सकते हैं। कभी-कभी हमारा भोलापन ही हमें डस लेता है । ज़रुरत है , ऐसे मानसिक रोगियों से अति-सावधान रहने की । जो ऊपर से सभी दीखते हैं लेकिन अन्दर से विकृत हो चुके होते हैं।

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हिंदी में एक बढ़िया गाने की पंक्ति है ....

" तुम मुझे न चाहो तो कोई बात नहीं ...
गैर के दिल को सराहोगी तो मुश्किल होगी ..."

स्त्रियाँ स्वभाव से थोडा कोमल होती हैं, विवाद में अधिक नहीं पड़तीं और अपना रास्ता बदलकर ऐसे व्यक्तित्वों से दूरी बना लेती हैं। आखिर एक स्त्री को भी अपने मनोनुकूल जिंदगी जीने का अधिकार है , और यदि कोई जबरदस्ती का हक जमा जा रहा है तो उससे दूरी बनाकर सुकून से जीने का भी हक है ....

यही दूरी कुछ को 'rejection' लगती है , और अपमान लगता है । और वे प्रतिशोध की आग में निरंतर जलते रहते हैं । इस आग में एक दिन वे अपना सर्वस्व नष्ट कर लेते हैं ।

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ZEAL said...

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सच्चा प्रेम समर्पण और बलिदान सिखाता है , लेकिन किसी से आकर्षित होकर उस जीते-जागते व्यक्ति को अपनी "जागीर" समझ लेना और अनावश्यक अधिकार जाताना , फिर दूरी आने पर , मन में नफरत को पोषित करना और प्रतिशोध की युक्तियाँ सोचते रहना ही Obsessive love है ।

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निशांत said...

prem sirf dena jaanta hai
koi kisi se jab prem karta hai to uski har khusiyaan use acchi lagti hai...
aur rejection kuch nahi hota....rejection to us prem ke sone ko aur kundan banata hai...
mera maanana hai ishwar nyay karta hai....
aur manushya ko us ishwar ko saakshi maankar hi prem karna chahiye..mere dwara likhe gaye kuch shabd rakhna chahunga...
तुम मुझे न चाहो तो कोई बात नहीं ...
गैर के दिल को सराहोगी तो मुश्किल होगी ..
ye prem nahi ye aakarshan hai...prem to sampoorna tyag hai jiske baad hi koi manushya ban paata hai aur jeevan mukt ho apne kartavyon ka nirvahan karte hue sadgati ko paata hai....
jeevan sangharsh hai ...aur yahan santulan banaye rakhna hota hai....jisne prem kiya ....usne viyog ka arth bhi jaana..aur jise viyog hua ..use hi prem hua.....to premi hamesha burai se acchai ki or jaane waale raaste par hi chalte hain...
jai shri raahde krishna

akshay tritya par sabko badhai aur sabhi padhe sabhi badhe...
प्रेम दया है ..प्रेम कृपा है
प्रेम दुआ है ...प्रेम दवा है
प्रेम से ही है सृष्टि सारी
प्रेम की ही जीत सदा है

प्रेम वीरता ...प्रेम धैर्य है
प्रेम दृढ़ता ..प्रेम शौर्य है
प्रेम ही भक्ति ..प्रेम मोक्ष है
प्रेम ही इस जीवन का ध्येय है

god bless you all ....on this pious day...every pious and worthy wishes will be fulfilled by the almighty

निशांत said...

प्रेम दया है ..प्रेम कृपा है (love is compassion..love is kindness)
प्रेम दुआ है ...प्रेम दवा है (love heals pain)
प्रेम से ही है सृष्टि सारी (love is life)
प्रेम की ही जीत सदा है (love always wins)

प्रेम वीरता ...प्रेम धैर्य है (love for the motherland )
प्रेम दृढ़ता ..प्रेम शौर्य है (love for the integrity)
प्रेम ही भक्ति ..प्रेम मोक्ष है (love for the devotion)
प्रेम ही इस जीवन का ध्येय (love is the ultimate goal )

jai shri raadhekrishna....

निशांत said...

prem bhav hai jo nadi jaisa bahta rahta hai hriday me...isme aatma aur antarman me ek rishta banta hai...
aur isme bhautik kuch bhi nahi ...

saanch barabar tap nahi
jhooth barabar taap
jinke hridaye saanch hai
unke hriday aap

aur jinke hriday me thoda sa bhi ye anubhooti hai ki koi ishwariya shakti hai ...wo prem ka arth jaanate hain..aur sahi maarg par kadam badhate hain..ladkhaate hain..par us prem ki shakti se sambal paate hain...

ZEAL said...

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निशांत जी ,

एक बात की तरफ ध्यान दिलाना चाहूंगी की ये आलेख 'प्रेम' पर नहीं , अपितु "Obsessive love " नामक मानसिक व्याधि पर है।

आभार।

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निशांत said...

सच्चा प्रेम समर्पण और बलिदान सिखाता है

maine prem ke sacche arth aur uski viratata ko darshaya hai jaise aapne likha hai...
aur jahan vish hain wahan amrit bhi to rahne chahiye....

good wishes ..

निशांत said...

aur jo aisa kritya karte hain wo love nahi ..lust hota hai..isliye obessive lust sahi rahta is vyadhi ka naam....amendement can be done in medical terms ..

निशांत said...

prem se upajate..ke badle ....laalasa se upajate accha rahta..

prem to karuna hai...prem to ishwar hai....

निशांत said...

IN BOLD WORDS..

CRIME OF ANY TYPE IS EVIL....

SO ALL SHOULD FOLLOW THE GOD (GOODNESS,ONENESS,DIVINITY)

निर्मला कपिला said...

अच्छी जानकारी है लेकिन इसे प्रेम का नाम नही दिया जा सकता ये आसक्ति है जिस मे हिंसा का समावेश तो होता ही है। आभार।

kunwarji's said...

आहा! क्या विस्तार से समझाया गया है...

आभार!

कुंवर जी,

Babli said...

बहुत सुन्दर, लाजवाब और ज्ञानवर्धक पोस्ट रहा! बधाई!

Guddu said...

I think, all the Pathology in the given Topic takes birth in an individual becouse of the Restrictions of the society. Some restrictions should be there But Restrictions in thier selves are Pathological, Then we should look on it and try to Solve it.
Social Values should be Saved But not Insisted on any perticulars. In India 98 % of Marriages are not by love But by Arrangements by the Rules of Society. It is more or less like Simbiosys.

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

श्रीमान जी, क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी कल ही लगाये है. इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.

निशांत said...

love don't means love marriage only...

love means compassion..kindness...and it should be by heart...the values should be preserved ...
love for nature,love for doing the good work ...

the issue is the brutal crime which is happening ..and it should be eradicated.love should not be misinterpreted...as a terrorist has no religion so the person who do such brutal crime do not know the meaning of love..

very serious topic ...and
for security everyone should be independent and do not believe in strangers

and for cure .....judiciary,press ,blogs and the almighty will help

the victim needs our support and we should support openly...

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

'प्रेम' के कारण पैदा होने वाली भयंकर परेशानियों का बहुत ही सुन्दर ढंग से चिकित्सकीय विश्लेषण प्रस्तुत किया है आपने अपने जीवनोपयोगी लेख में | अति सराहनीय ...

ZEAL said...

आज के समाचार में , दिल्ली के २० वर्षीय , इंजीनियरिंग के छात्र - शोभित को हत्या कर दी गयी । हत्या का कारण प्रेम-त्रिकोण बताया गया। एक और उद्दाहरण obsessive love का।

Amrita Tanmay said...

बात को बहुत असरदार ढंग से पेश किया है

निशांत said...

isliye prem to man se kiya jaata hai
jahan jalan aa jaaye ,paisa aa jaaye ,swarth aa jaaye wahan hatya jaisi krur ghatna ho jaati hai ..isliye sachet rahen aur aatmbal banaye rakhen ham log..

सदा said...

दिव्‍या जी, बिल्‍कुल सच कहा है आपने ... बेहद सशक्‍त एवं सार्थक प्रस्‍तुति ।

Ravikar said...

Dr. ki najar hai,
achchha pahchana hai ---ekdam sateek
रे पुष्पराज-
सुगंध तेरी पा
सम्मोहित सी मैं
कर कांटो की अनदेखी
आत्मविश्वास से लबरेज
तेरे पास आ गई -
और धोखा खा गई .
तूने छल-कपट से
धर-पकड़ कर
गोधूलि के समय
कैद कर लिया
व्यभिचार भी किया
सुबह होने पर धकेल दिया
कटु-सत्य !
तू तो महा धूर्त है.
मद-कण से युक्त महालोलुप है .
तेरे गुल का अर्थ है-
केवल दाग
सरसों का सौंदर्य देख-
संसार को देता है सुगंध और स्वाद

Ravikar said...

http://kushkikritiyan.blogspot.com/
mere suputra ka blog hai kuchh comments udhar bhi...
print liya hai, apni suputri ko jo TCS, Trivedrum me hai pass kar diya hai.