Saturday, June 22, 2013

धारी देवी मंदिर

उमाभारती के भारी विरोध के बावजूद उत्तरांचल सरकार ने धारी देवी मंदिर की प्राचीन प्रतिमा को हटा दिया। इस विस्थापन के तत्काल बाद ये प्राकृतिक कहर अब सबके सामने है। चारों धाम की रक्षक धारी देवी की महिमा को ये इसाई सरकार क्या समझेगी। ये तो बस भारत निर्माण के नाम पर भारत विध्वंस में लगी हुयी है।

8 comments:

पूरण खण्डेलवाल said...

सटीक बात !!

तुषार राज रस्तोगी said...

आपकी यह पोस्ट आज के (२२ जून, २०१३, शनिवार ) ब्लॉग बुलेटिन - मस्तिष्क के लिए हानि पहुचाने वाली आदतें पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

प्रतिभा सक्सेना said...

लोक-विश्वासों और प्राचीन मान्यताओं का उचित सम्मान होना चाहिये !

अरुन शर्मा 'अनन्त' said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (23-06-2013) के चर्चा मंच -1285 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

kunwarji's said...

ऐसी बातो को मात्र अन्धविश्वाश मानना ही अन्धविश्वाश है, सही कहा आपने 'इसाई सरकार' तो नहीं समझेगी पर जनता ये कब समझेगी...???

Bhola-Krishna said...

ये कैसा सेक्यूलरिज्म है ? किसी एक की मान्यताओं को अपमानित करो और दूसरों को सिर आँख पर बिथावो !केवल वोट के लिए !

Madan Mohan Saxena said...

वाह

priya said...

Several such instances are well known in Bharat. Railway lines , bridges and roads have been diverted to respect to dieties, sadhus, fakeers. Once an english officer eveytime fell from the cot at night as he tried to bulldoze RAM SANEHI BABA'S samadhi.

Nikas ke naam par log drishtiheen ho rahe hain.