Tuesday, July 14, 2015

जजमेंटल मत बनिए :

किसी को भी समझने के लिए पूरी एक उम्र भी काफी नहीं है ! फिर कैसे आप किसी की एक पोस्ट को पढ़कर उसे पूरी तरह समझ लेने का दावा कर सकते हैं ! पोस्टें तो प्रितिक्रिया मात्र है हमारे इर्द गिर्द घट रही घटनाओं की ! जब किसी भी दो व्यक्ति का जेनेटिक-कम्पोज़ीशन एक सा नहीं होता तो विचार कैसे एक होंगें ? विभिन्न विचारधाएं ही तो इस संसार की सबसे बड़ी खूबसूरती हैं ! उसी का आनंद लीजिये ! अधीर होकर लिखने वाले पर आक्रमण मत कर दीजिये ! बाद में आपको ही पछतावा होता है और ग्लानि होती है ! लेकिन अकसर देर हो चुकी होती है तब तक !
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कुछ लोगों का करेंट अफेयर्स पर पकड़ अधिक है तो किसी का दर्शन और साहित्य पर ! कोई शायरी लिखता है अथवा कोई राजनीति पर लिखता है, दोनों से ही उसकी असल ज़िंदगी का पता नहीं लगाया जा सकता ! कुछ लोग अपने गम/ अपनी मुश्किलें पब्लिक में लिखना पसंद नहीं करते ! कमज़ोर नहीं दिखना चाहते और समाज को कमज़ोर भी नहीं बनाना चाहते ! अतः बिना कुछ जाने समझे मत आहत करिये किसी को अपने शब्द बाणों से ! अपशब्द कहकर आप जीतेंगे नहीं , केवल खो देंगे उसे, सदा सर्वदा के लिए !
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यदि फेसबुक पर अलग अलग तरह का लेखन नहीं होगा, तो आपको वैराइटी कहाँ से मिलेगी? पृथक पृथक विचारों से ही तो मन में मंथन होता है और कुछ नया निकल कर आता है ! मुझे तो अपने मित्रों और अमित्रों , सभी की वॉल पर कुछ नया ही मिलता है सदैव ! बेहद उम्दा लिखते हैं सभी ! पढ़कर आनंद आ जाता है ! कुछ मित्रों की टिप्पणियां भी अति उत्कृष्ट होती हैं , बहुत कुछ सीखने को मिलता है उनसे !
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लेकिन कभी-कभी कुछ मित्र अत्यंत नाराज़ होकर अपशब्द लिख देते हैं , व्यक्तिगत आक्षेप लगा देते हैं! ऐसा कहकर वे किस सभ्यता और शिक्षा का परिचय देते हैं?
कल एक मित्र ने कहा आप औरत हो अतः अकल कम है आपके पास!
दुसरे ने मुझे कुंठित और पूर्वाग्रही कहा
तीसरे ने चिढ़कर मेसेज किया --"जाओ खाना बनाओ जाकर"
(बाद में तीनों ने अपनी गलती का एहसास भी कर लिया किन्तु...)
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अब ऐसे लोगों को क्या लिखूं , औरत हो या पुरुष , सभी तो मैडम क्यूरी और आईन्स्टाईन नहीं होते , लेकिन मात्र स्त्री अथवा पुरुष होने भर से ही किसी को कमतर नहीं आँका जा सकता ! किसी को कुंठित और पूर्वाग्रही कहना आपकी स्वयं की कुंठा और पूर्वाग्रह को परिलक्षित करती है ! रही बात खाना बनाने की तो वो खुद ही बनती हूँ भाई , तुम्हारी बीबी आकर नहीं बना जाती ! अतः लेखक/लेखिका पर व्यक्तिगत आक्षेप करने से बचें !
यदि किसी का लेखन और विचार आपको नहीं पसंद आता तो छोड़ दें उसे पढ़ना लेकिन आभासी दुनिया में अनजान और अपरिचित लेखकों का अपमान न करें ! इसका अधिकार शिष्ट जनों के पास नहीं है ! (अशिक्षितों के पास तो सारे अधिकार सुरक्षित होते हैं )
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अतः जजमेंटल मत बनिए ! अधीर मत बनिए ! किसी को समझना ही चाहते हैं तो उस व्यक्ति को लगातार पढ़िए तब थोड़ा थोड़ा समझेंगे ! प्रतिक्रिया सिर्फ पोस्ट पर दीजिये किसी के व्यक्तित्व पर ऊँगली मत उठाईये ! किसी को समझने के लिए एक उम्र भी नाकाफी है आप एक पोस्ट की बात करते हैं?

8 comments:

Anonymous said...

It's an amazing post designed for all the online people; they will take
benefit from it I am sure.

My webpage: DelorseWTrudo

Kavita Rawat said...

किसी के बारे में जल्दबाजी में कोई राय बनाने वाले ओछी मानसिकता वाले होते हैं ...ऐसे लोगों से कुछ कहने से अच्छा किनारा करना ही ठीक .....जितने लोग उतनी बाते .... सबकी अपनी अपनी बुद्धि "मुंडे मुंडे मतिरभिन्ना"

Kavita Rawat said...

किसी के बारे में जल्दबाजी में कोई राय बनाने वाले ओछी मानसिकता वाले होते हैं ...ऐसे लोगों से कुछ कहने से अच्छा किनारा करना ही ठीक .....जितने लोग उतनी बाते .... सबकी अपनी अपनी बुद्धि "मुंडे मुंडे मतिरभिन्ना"

Suman said...

एक जैसा कुछ भी नहीं होता व्यक्तियों के अलग अलग विचार ही लेखन को सुंदर बनाते है उस पर दी गई हमारी प्रतिक्रिया हमारे व्यक्तित्व को दर्शाती है,सार्थक पोस्ट सहमत हूँ !

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन धार्मिक मानसिकता के स्थान पर तुष्टिकरण की नीति में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

सुशील कुमार जोशी said...

सहमत !

priyamathur76@gmail.com said...

kudos! dr saheb. Waiting for your independence day post.

neeraj prajapati said...

ji aapne bilkul sahi kaha, magar kuch log aadat se majbur hote h !! inka kuch nahi kiya ja sakta.....!!!!