राहुल जी जब भी बाहर जाते हैं,
बस एक ही चिंता लगी रहती है,
कहीं एक और बहू न आ जाये गोरी चमड़ी वाली
और बेगैरतों के समर्थन से देश फिर से ,
कुछ दशकों के लिए गुलाम ना हो जाए !
बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही गोरी काफी है
बस एक ही चिंता लगी रहती है,
कहीं एक और बहू न आ जाये गोरी चमड़ी वाली
और बेगैरतों के समर्थन से देश फिर से ,
कुछ दशकों के लिए गुलाम ना हो जाए !
बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही गोरी काफी है






