Monday, January 16, 2012

सेक्युलर और तथाकथित सेक्युलर

हमारे देश में तो सिर्फ "सनातन धर्म " था। जिसमें 'सेवा-भाव' को ही धर्म कहा गया है ! लेकिन अब धर्म की सच्ची परिभाषा कौन समझता है भला? अब तो गद्दारों का सबसे बड़ा धर्म है "सेक्युलर" !

छद्म निरपेक्षता के नाम पर राजनीति की जा रही है। धर्म के नाम पर आरक्षण देकर चुनाव जीता जा रहा है। नेता बनते ही 'सेक्युलर' के नाम का 'कफ़न' ओढ़ लिया जता है , जिसके नीचे आम जनता दफ़न होती रहती है।

दुनिया भर के जितने प्रवचनकारी हैं , वे अपने चेहरे पर 'सेक्युलर' के नाम का मुखौटा लगाये सबको मूर्ख बनाते फिरते हैं ! जैसे सब गंवार हों , इनकी चमड़ी की परख ही हो कोई।

बाबा रामदेव के मुंह पर कालिख फेंकी , सोयी जनता को आधी रात के बाद पिटवाया, क्या यही करते हैं सेक्युलर जमात वाले ?

चुनाव चिन्ह ढकवाने में करोड़ों रूपया लगाते हैं , लेकिन बिना धर्म के टैग वाली गरीब जनता भूख से और ठण्ड से मर रही है तो मरे , उनके लिए तन ढकने को एक कम्बल और सड़क पर चार अलाव नहीं जलवा सकती ये बेशरम सरकार ? क्या यही है इन भ्रष्टाचारी सेक्युलरों की पहचान ?

दलितों के घर में दावत उड़ाने वाला ये राहू-केतु गांधी , क्या नेत्र विहीन है , जो हाड-कंपाती सर्दी में मरते गरीबों को देख नहीं पाता? क्या इसके मुंह में जिह्वा नहीं है जो देशभक्तों पर स्याही और तेज़ाब फेंकने वाले कामरान जैसे सिद्धिकियों की आतंकवादी कारगुजारियों पर दो शब्द बोल सके ?

उनसे भी बढ़कर वे नपुंसक सेक्युलर लोग हैं जो इस भ्रष्ट एवं छद्म-सेक्युलर सरकार समर्थन करते हैं !

सेक्युलर होने के नाम पर नौटंकी अब बंद हो जानी चाहिए ! इस देश में जो लोग सेक्युलर थे, वे भगत सिंह थे, चाणक्य थे , लौह-पुरुष पटेल थे , नाथूराम गोडसे से , बिस्मिल थे आदि आदि ! अब नहीं पैदा होते ये वीर और जो होते हैं उन पर कालिख फेंकते हैं लोग और मरवाते हैं !

आज की सेक्युलर जमात एक नौटंकी है! --एक फरेब है !--मुखौटे के पीछे बैठे गद्दार हैं !

सेक्युलर प्रवचनकारी जमात देशभक्तों के आक्रोश की अग्नि को बुझा देने वाला कायरता से भरा 'ठंडा-पानी' है , अतः सावधान रहे इन सेक्युलरों और तथाकथित सेक्युलरों से !

गर्व से कहिये हम भारतवासी हैं , सेक्युलर नहीं। जिसका कोई राष्ट्र धर्म नहीं , वो सिर्फ गद्दार है !

आज 'सेक्युलर' से बड़ी कोई गाली नहीं ! बर्बाद हो रही जनता कराह कर कह रही है --- सेक्युलर साले ..

Zeal

31 comments:

dheerendra said...

राजनीत के जमात में सबका यही हाल है चाहे कोई भी पार्टी हो,सुंदर पोस्ट

सब कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है
चुल्लू भर जनता के हिस्से,इनके हिस्से सागर है,
छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी
अंधियारे बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी,

new post--काव्यान्जलि --हमदर्द-

कौशल किशोर मिश्र said...

Gaddro ka sabse bada Dharam Secular hi hai .....


jai baba banaras.....

अरूण साथी said...

ek daam sahi kaha he aapne ..saab nautanki he..

दिवस said...

सेक्युलर जैसा शब्द कहीं एग्जिस्ट ही नहीं करता| ये शब्द तो दरअसल हमे मुर्ख बनाने के लिए सत्ता के दलाओं ने अपनी डिक्शनरी में डाल लिया| इस शब्द की जो परिभाषा इन्होने दी है उसके पीछे की मूल भावना तो यही है कि सेक्युलर वो है जो किसी का सगा नहीं या सभी को अपना बाप मानने वाला ही सेक्युलर होता है|
सेक्युलर की परिभाषा समझाने वाले हमेशा सभी धर्मों को जानने व मानने का प्रवचन झाड़ते हैं| कहते हैं कि इस धर्म में ये अच्छा है उसमे वो अच्छा है| मुझे समझ नहीं आता, जब मेरी थाली में खाना ख़त्म ही नहीं हुआ तो दुसरे की थाली में क्यों मूंह मारूं? यदि ऐसा ही है तो क्यों न पहले अपने धर्म को पूरा जानलो? बात तो ऐसे करते हैं जैसे दुनिया के सारे दर्शनों के ज्ञाता वे ही हैं|
जब सेक्युलर ही कुछ नहीं तो तथाकथित सेक्युलर क्या होता है?
मनुष्य निरपेक्ष हो सकता है किन्तु धर्म निरपेक्ष नहीं| क्योंकि सबका धर्म तो एक ही है, वही जो उसका कर्त्तव्य है, जिसका मूल रूप है "सेवा"...अत: सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है|
आपके ही एक लेख "धर्म क्या है?...सनातन धर्म" में इस विषय में बहुत कुछ अच्छा जाना|

अत: सेक्युलर शब्द के भ्रम जाल से बाहर आकर यथार्थ को स्वीकार करना आवश्यक है|
इसी सेक्युलरिज्म के नाम पर हिन्दुस्थान के टुकड़े हुए| बाबा रामदेव पर कालिख फेंकी जाए तो उसका विरोध गलत हो जाता है, किन्तु हिन्दुस्तानमुर्दाबाद के नारों पर भी मौन धारण करना पड़ता है क्योंकि इस सेक्युलर शब्द की पुष्टी जो करनी है|
सही कहा आपने कि सेक्युलर शब्द एक गाली है|
सेक्युलर साले...

Pahal A milestone said...

Secularism is practiced and not preached..It certainly has no existence in politics..

Pahal A milestone said...

Secularism is practiced and not preached..It certainly has no existence in politics..

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वोट वाली राजनीति का किसी तर्क से कुछ नहीं लेना देना

Anonymous said...

"...बहुत बड़े "धर्मनिरपेक्ष" बनते हैं जो, वे जरा वसीयत लिखकर जायें कि आपकी मृत्यु के बाद आपके शवों को दफना दिया जाय- 'दाह-संस्कार' नहीं किया जाय! नहीं लिख सकते हैं ऐसी वसीयत, तो धर्मनिरपेक्षता का नाटक बन्द कीजिये। कोई धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता! यह 'अवधारणा' ही गलत है, नकारात्मक है। सकारात्मक अवधारणा है- "सर्व धर्म समभाव" का, जो कि भारतीय अवधारणा है। दुर्भाग्य से, हमारे संविधान निर्मातागण अँग्रेजीदाँ थे इसलिए उनलोगों ने इस नकारात्मक पश्चिमी अवधारणा को संविधान में घुसा दिया था! ...और आज के अँग्रेजीदाँ अब भी इसे ढो रहे हैं।..." (http://jaydeepshekhar.blogspot.com/2011/12/blog-post_28.html)

कुमार संतोष said...

Bahut hi behtareen post behad jwalant mudde ko uthaya hai.
Saarthak post

Aabhaar. . !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

अपनी सुविधा से लिए, चर्चा के दो वार।
चर्चा मंच सजाउँगा, मंगल और बुधवार।।
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Ratan Singh Shekhawat said...

अपने आपको सेकुलर कहने वाले ये छद्म सेकुलर लोग इस देश के सबसे बड़े साम्प्रदायिक लोग है|

कुश्वंश said...

बिलकुल सही कहा इस देश का कोढ़ है सेकुलरिज्म,और जिस नेता को देखो वोटों के कारण सही बात न कहना चाहता है न सुनना.जातिवाद, परिवारवाद और एक को दुसरे को बांटने के लिए आरक्षण का लालच ही मुख्य विडम्बनाये है भारतवर्ष की.और इस का प्रतिउत्तर हमारे ही पास है. कोई भी पार्टी दूध की धूली नहीं, आपने लोकपाल केस में देख ही लिया . इस लिए जागो और वोट के अधिकार का प्रयोग करो और किसी भी नेता को जीतने मत दो सब को हराओ चाहे इस के लिए किसी अनजाने को जितना पड़े , कम से कम जनता का प्रतिरोध तो समझेंगे ये सांसद और विधायक ,और इसके लिए घर से बाहर निकलना जरूरी है कमर कस कर.

kshama said...

Lagta hai kabhi,kabhi ham bhee isee nautanki ke actors hai!

mahendra verma said...

सही अर्थों में सेक्यूलर होना एक सीमा तक सही हो सकता है लेकिन सेक्यूलरिज्म के नाम पर ड्रामाबाजी करना निंदनीय है। आजकल के तथाकथित सेक्यूलर लोग वोट और कुर्सी हथियाने के लिए कुछ भी कर रहे हैं, सनातन धर्म और मानव धर्म का अनादर कर रहे हैं, धर्म और जाति के नाम पर अधर्म कर रहे हैं।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

मैं तो सनातनियों को जन्मजात सेकुलर मानता हूँ. उनसे बड़ा सेकुलर कोई नहीं. बाकी वोटों के लिए जो तथाकथित लोग हैं वो जो न करें कम है. दुर्भाग्य यह कि सनातनी अपनी ही मस्ती में चूर हैं.

Atul Shrivastava said...

राजनीति में सब कुछ हित साधने के लिए होते हैं।

Rakesh Kumar said...

--- सेक्युलर साले ..

नही नही,इनको कोई साला भी कहना
पसंद नही करेगा.

sanjubaba403 said...

अय्याशी से मरे जिहादी शहीद हैं !!
आजकल मुस्लिम नौजवान जिहादियों का अंजाम देखकर भी लव जिहाद कर रहे हैं .और इसे एक धार्मिक कार्य मान रहे हैं .और सोच रहे हैं कि ऐसा करने से उनको मरने के बाद शहीद का दर्जा मिल जायेगा .और वे जन्नत में अय्याशी कर सकेंगे .आपने यह प्रसिद्ध कहावत जरुर सुनी होगी "हर्र लगे न फिटकरी ,रंग पक्का हो जाये "यह कहावत इस्लाम में जिहाद सम्बन्धी मान्यताओं पर सटीक उतरती है .इस बात को स्पष्ट करने के लिए हमें कुरान और कुछ प्रमुख हदीसों का हवाला होगा ,जिसे बिन्दुवार दिया गया है .
1-जिहाद अल्लाह को प्रिय है इस्लाम में जिहाद को अनिवार्य ,और अल्लाह की नजर में सबसे प्रिय कार्य बताया गया है .कुरान में कहा है कि,
"अल्लाह उन लोगों लो प्यार करता है ,जो पंक्ति बनाकर जिहाद करते है "सूरा-अस सफ्फ 61 :4
"जिहाद करना अल्लाह कि नजर में सबसे प्रिय कार्य है "सूरा -तौबा 9 :24 आजकल जकारिया नायक जैसे इस्लामी प्रचारक यह कहते हुए नहीं थकते कि ,जिहाद असल में एक संघर्ष (struggle ) है जो धर्म की रक्षा करने ,अपना बचाव करने ,पीड़ितों को उनका अधिकार दिलवाने और शांति स्थापना के लिए किया जाता है .लेकिन जिहाद का असली मकसद कुछ और ही है ,जो यहाँ दिया जा रहा है .2-जिहादियों के लिए प्रलोभन लोग देश ,धर्म और न्याय की रक्षा के लिए बिना किसी प्रतिफल की इच्छा के अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते है ,यहाँतक अपने प्राणों का बलिदान कर देते है .अगर जिहाद का यही मकसद है तो ,अल्लाह जिहादियों को लालच क्यों देता है .जैसा कुरान और इन हदीसों में है -"जितने भी लोग अपनी जान लगाकर जिहाद करेंगे उनके लिए फायदा ही फायदा होगा "सूरा -तौबा 9 :88
"हे रसूल कहो जो व्यक्ति जिहाद के लिए हथियार खरीदने के लिए एक दिरहम देगा ,तो जीत के बाद उसे एक दिरहम के बदले 70 हजार दीनार दिए जायेंगे "
इब्न माजा -किताब 4 हदीस 2761
"रसूल ने कहा कि जो व्यक्ति जिहाद के लिए बाहर जायेगा तो ,अल्लाह उसके घर कि रक्षा करेगा .और जब वह वापस आयेगा तो उसे लूट का माल और साथ में औरतें भी मिलेंगीं "मुस्लिम -किताब 3 हदीस 4626
"रसूल ने कहा मैं तुम्हें एक खुशखबरी देता हूँ ,जब मुजाहिद वापिस आएंगे तो उनके लिए बगीचे तैयार मिलेंगे "
बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 48
"इसी प्रकार ''सर्वोत्तम जिहाद वह है जिसमें घोड़ा और सवार दोनों ही घायल हो जायें।'' इब्न माजाह, खं. 4 हदीस 2794,
3-अय्याशी के लिए जिहाद
इस्लाम में औरतों को माल (property -booty ) माना जाता है .जिहादी सबसे पहले औरतें ही पकड़ते हैं .ऐसी पकड़ी गयी औरतों को लौंडी कहा जाता है ,या रखैल कहते हैं .इन से सहवास करना कुरान में जायज कहा है .और जब औरत से मन भर जाता था तो उनको बेच देते है ,कुरान की तरह, हदीसों में भी विजित गैर-मुसलमानों के धन, सम्पत्ति व स्त्रियों पर विजेता मुसलमानों का अधिकार होगा.चूंकि जिहादियों को असीमित अय्याशी करने की सुविधा शहीद हो जाने पर जन्नत में ही मिल सकती थी .इसलिए मुसलमानों ने यहीं पर भोग विलास की तरकीब निकाल ली .और पकड़ी गयी औरतों से सहवास जो जायज बना दिया ,यह बार मिर्जा ग़ालिब ने फारसी में लिखा है ,
"सुखने सादा दिलम रा न फरेबदअय ग़ालिब ,बोसये चंद नकद गंज दिहाने बिमन आर "यानि मेरा दिल उधार बातों से नहीं फिसलता ,मुझे तो किसी सुंदरी का नकद चुम्बन चाहिए "कुरान ने जिहादियों को यही देनेका वादा किया है .इसीलिए जिहाद हो रहा है .सबूत देखिये ,
"हमने तुम्हें युद्ध में पकड़ी हुई औरतें (लौंडियाँ ) हलाल कर दी हैं ,और अगर ( इस्तेमाल के बाद ) तुम्हें वह पसंद नहीं आयें ,तो तुम दूसरी औरतें बदल सकते हो "
सूरा -अहजाब 33 :52
"अपनी पत्नियों के साथ जो औरतें तुम्हारे कब्जे में हों ,उनके साथ सहवास करने में कोई निंदनीय काम नहीं है "सूरा -मआरिज 70 :30
इस तरह सिर्फ जिहादी ही अय्याशी नहीं करते हैं ,उनके नाबालिग लडके भी यही करते हैं ,जो इन हदीसों से पता चलता है ,
"रसूल ने कहा कि क्या तुम नहीं जानते कि अल्लाह ने पकड़ी गयी औरतें काफिरों को अपमानित करने के लिए ही तुम्हारी सेवा में दी है "
बुखारी -जिल्द 1 किताब 3 हदीस 803
"रसूल ने कहा कि तुम्हारा अवयस्क लड़का भी बिस्तर (Bed ) का मालिक है .और वह भी पकड़ी गयी औरतों से अवैध सहवास कर सकता है "

sanjubaba403 said...

बुखारी -जिल्द 1 किताब 8 हदीस 808
The Prophet said, "The boy is for the owner of the bed and the for the person who commits illegal sexual intercourse."Hadith-vol bk8. hadith no808 Al-Bukhari
इसी शिक्षा के कारण छोटे बड़े सभी अय्याशी करने में व्यस्त हो गए .और जन्नत को भूल गए .
4-जिहाद से अरुचि
कहावत है कि "जहाँ भोग वहां रोग " जब जिहादी असीमित अय्याशी करने लगे तो भिभिन्न रोगों में ग्रस्त हो गए .और उचित इलाज न मिलाने से बीमार होगर जिहाद से विमुख हो गए .उसी समय एक सहाबी "अबू उबैदा अम्मार बिन इब्नल जर्राह (583-638)" यौन रोग से ग्रस्त हो गया .जो बाद में मर भी गया था .तो जिहादियों में भय व्याप्त हो गया ,वह अगले जन्म कि इच्छा करने लगे .तब मुहम्मद ने उन लोगों से यह कहा कि ,
"जो इस दुनिया में मर कर दूसरी दुनिया में फिर से आने कि कमाना रखता है ,उसे अल्लाह रह में जिहाद करते हुए कम से कम दस बार मरना पड़ेगा "
बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 72
"रसूल ने कहा कोई व्यक्ति मर कर दोबारा इस दुनिया में फिर से तब तक नहीं असकता ,जब तक वह अल्लाह कि रह में मर कर जिहादियों में वरीयता प्राप्त नहीं कर लेता "बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 53
5 -जिहादियों की पाठ्यपुस्तक
मुहम्मद हर हालत में जिहाद चालू रखना चाहता था .और जब लोग काफी अशक्त हो गए तो मुहमद ने उन लोगों से कहा कि ,
"जो जिहादी पेट के रोग ,प्लेग ,या यौन रोगों के कारण मर जायेगा ,उसे भी शहीद माना जायेगा और वह भी जन्नत का अधिकारी होगा ,जहाँ उसे सारी सुविधाएँ मिलेंगी "बुखारी -जिल्द 1 किताब 7 हदीस 629
उस समय मुहम्मद ने जिहादियों का हौसला बढ़ने के लिए कई ऐसी ही हदीसें कही थीं .जिसे बाद में "(ابو زكريا يحي بن يوسف انووي ادّمشقي )इमाम अबू जकारिया याहया बिन यूसुफ अन नववी दमिश्की (1234 -1278 ) ने हिजरी 676 में सीरिया में संकलित किया था .इस हदीस के संकलन का नाम " रियाज उस्सालिहीनRiyadh as-Saaliheen رياض الصالحين" है .इसीको जिहादियों की पाठ्य पुस्तक (The Gardens of the Righteous ) कहा जाता है .इसमे कुल 19 अध्याय है .और 11 अध्याय के भाग 235 में हदीस संख्या 1353 से लेकर 1357 तक अनेकों रोग से मरने वाले जिहादियोंको शहीद बताया गया है .विषय संख्या 235 की 5 हदीसों का शीर्षक है "martyrdom without fight " उसी का सारांश हिंदी में दिया जा रहा है (अंगरेजी में पूरी किताब की लिंक दी गयी है )देखिये कुकर्म करके मरने वाले भी शहीद कैसे बन जाते हैं ,और जानत में कैसे घुस जाते हैं
"अबू हुरैरा नेकहा किरसूल ने कहा कि शहीद पांच कारणों से हो सकते है ,प्लेग से , पेट के रोगों के कारण,अति सहवास के कारण ,मकान बनाते समय मलबे से दब कर और अल्लाह के लिए लड़ते हुए मरने वाले "हदीस -1353
"अबू हुरैरा ने रसूल से पूछा कि आप हम लोगों में किसको शहीद गिनोगे ,तो रसूल ने कहा ऐसे बहुत ही कम लोग होंगे जो अल्लाह की राह में लड़ कर मर कर शहीद होंगे .कुछ बीमारियों के कारण भी शहीद हो जाते हैं ,जैसे प्लेग से ,तपेदिक से ,यौन रोगों के कारण और पानी में डूब कर मरने वाले भी शहीद माने जायेंगे "
हदीस -1354
बाकी तीन हदीसों ,1355 ,1356 और 1357 में अपनी सम्पति ,अपने परिवार कि रक्षा में मरने वाले को और दुश्मन से लड़ते हुए मर जाने वालों को भी शहीद का दर्जा देकर जन्नत का अधिकारी बताया गया है .इसलिए यह हदीसें अधिक महत्वपूर्ण नहीं हैं .इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है कि यह बात झूठ है कि जिहादी अल्लाह की राह में बिना किसी लोभ और स्वार्थ के जिहाद करते हैं .और मर जाने पर शहीद कहलाते हैं .जबकि अधिकांश जिहादी अय्याशी करके अनेकों रोग होने से भी मर जाते थे .चूँकि उस समय एड (AIDS ) के बारे में पता नहीं था ,इसलिए यौन रोगों को तपेदिक ,प्लेग या गुर्दे का रोग कहा दिया होगा .आज भी मुस्लिम देशों में ऐसे रोगियों से अस्पताल भरे पड़े हैं .फिर भी इन्हीं हदीसों के कारण मुसलमान अय्याशी को ही जिहाद का रूप समझते हैं .इसका परिणाम सद्दाम हुसैन ,कर्नल गदाफी ,ओसामा बिन लादेन के रूप में दुनिया जानती है .औरतबाजी का बुरा नतीजा होता है .और इसमे शक नहीं कि लवजिहाद कभी यही अंजाम होगा !
जो व्यक्ति अय्याशी को जिहाद और एड्स से मरने वालों को शहीद मानता है उसका दिमाग ख़राब होगा .http://www.witness-pioneer.org/vil/hadeeth/riyad/11/chap235.ht

दिगम्बर नासवा said...

कांग्रेस ने इस हिंदू धर्म नाम का इतना दुष्प्रचार किया है की अब क्या कहें ...

KRANT M.L.Verma said...

देखिये एक बात तो पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी है कि आजादी के बाद विकास के नाम पर लोकतन्त्र के स्थान पर लूटतन्त्र का ही विकास हुआ है और इन नेताओं के चेहरे पर जनता की गाढ़ी कमाई का खून चमक रहा है. चुनाव के समय जिस नेता के इर्द-गिर्द जितने ज्यादा ब्लैक कैट कमाण्डो घूम रहे हैं निश्चित मानिए उसने उतनी ही ज्यादा ब्लैक मनी स्विस बैंक में जमा कर रखी है फिर चाहें वह गान्धी नेहरू परिवार हो या कुँवारी बहन जी का कुनवा.

Bharat Bhushan said...

देश-धर्म से बढ़ कर कोई धर्म नहीं होता और ये कमबख़्त 'सेक्यूलर' इसी का पालन नहीं कर पाते, पता नहीं इनमें कैसा मैन्युफैक्चरिंग डिफैक्ट है.

प्रतिभा सक्सेना said...

सेक्यूलर अर्थात् धोखे का टट्टर.

Ramakant Singh said...

आदरणीय जिल जी आपका गुस्सा एक हद तक शायद सही हो
इसके बाद भी किसी एक व्यक्ति को दोष देना उचित होगा \ मैं आपकी पीड़ा को नमन करता हूँ .कृपया मेरे ब्लॉग पर आप आयें
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Naveen Mani Tripathi said...

धर्मनिरपेक्षता का आडम्बर ओढ़े आज के नेताओं से कुछ उम्मीद कर पाना बहुत ही मुश्किल है | बेहद प्रभावशाली और रोचक प्रस्तुति लगी .....सादर आभार |

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