Thursday, January 19, 2012

लव-जेहाद

लव जेहाद क्या है ? इस्लाम धर्म ये आदेश करता है की अपने धर्म को बढाओ! हिन्दुओं को पकड़-पकड़ कर उनका धर्म परिवर्तन करो ! सबसे अच्छा तरीका है हिन्दू लड़कियों को अपने प्रेम-जाल में फंसाओ और उनसे विवाह करके धर्म परिवर्तन कराके उनसे ढेरों इस्लामी बच्चे पैदा करो ! बाद में ये, इन लड़कियों को बहुत प्रताड़ित करते हैं , लड़कियों के परिवार वालों को भी बर्बाद कर देते हैं ! इनके चंगुल में फंसी लड़कियां आत्महत्या का विकल्प चुन रही है! इनके माता-पिता भी लाचार है क्योंकि कोई सुनवाई नहीं है उनकी। इन लड़कों को इस काम के लिए एक-एक लड़की पटाने के लाखों दो लाख से दस लाख रूपए तक मिलते हैं! इतना तगड़ा इंसेंटिव होगा तो क्यूँ न लडकें इस मुफ्त की नौकरी में उतर पड़ें? मुफ्त की रकम और एक हिन्दू-लड़की साथ में फ्री ! भारत समेत अन्य कई देशों में यह समस्या विकराल रूप धरती जा रही है ।

इस्लाम का ये मानना है की ऐसी औरत से विवाह करना चाहिए जो ढेरों बच्चे पैदा कर सके । कितनी अज्ञानतापूर्ण और दुखद है ये सोच ! पत्नी अच्छे संस्कारों को देने वाली होनी चाहिए ना कि बच्चे पैदा करने की मशीन !


चेत जाओ हिन्दुओं नहीं तो फिर पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत ! अपनी बच्चियों को समय रहते सावधान करो।

Zeal

32 comments:

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

यह पोस्ट इतनी दबी ज़बान में क्यों? [इसका फ़ोंट इतना छोटा है कि पढ़ने में कठिनाई हो रही है] धर्म किसी को मारने और कत्ल करने की इजाज़त नहीं देता, खून खराबा तो धर्म के नाम पर होता है॥

kshama said...

Hairan hun ki itnee ladkiyan inke changul me fanstee kaisee hain?

अरुण चन्द्र रॉय said...

चिंता जनक ...

Deepak Saini said...

सच कह रही है आप

veerubhai said...

यह सब चल रहा है .अब सवाल यह है कि क्या मुस्लिम लडके के सींग होतें हैं यदि नहीं तो उसकी शिनाख्त कैसे हो ?क्या लडकियाँ जानतीं हैं खतना क्या होता है .क्या उन्हें बतलाया जाना चाहिए यदि हाँ तो कैसे सीधे सीधे या कोई और भी तरीका है .मैं वैसे इसे अभी तक सुनी सुनाई मानता रहा हूँ पढ़ा कई स्रोतों से है लेकिन ब्लॉग पर ही .कहीं किसी रिसाले में नहीं .रिसाले अब हम पढ़ते भी कहां हैं ?
जायका बदल को पढतें हैं .हो सकता है अन्यत्र उठा हो यह मुद्दा उठाया गया हो किसी और मंच से .मुझे आदिनांक यह शरात ही लगती है ?लेकिन अगर यह शरारत भी है तो क्यों की जा रही है ?सवाल ही सावल हैं मेरे पास ज़वाब नहीं हैं .कृपया रोशनी डालें .
शिशु का माँ के साथ रिश्ता स्नेह आबंध ही भावी जीवन की डोर बनता है .

Kailash Sharma said...

शोचनीय स्थिति...

chirag said...

sach kaha aapane aur aisa ho raha hain. maine dekha bhi hain

प्रतिभा सक्सेना said...

आज के समझदार लोगों को एक बार सभी प्रमुख धर्मों के कथन और सिद्धान्त बिना लाग-लपेट खुल कर सामने लाना और उनका तुलनात्मक अध्ययन कर यह देखना होगा कि किस धर्म में पूरी मानवता के साथ प्रकृति के सभी जीवधारियों और संपूर्ण तत्वों के कल्याण की कामना है -किस धर्म में बिना भेद-भाव मानव-मात्र के कल्याण का संदेश है, और धरती की परिकल्पना एक परिवार के रूप में की गई है . ऐसा धर्म ही समूची मानवता की जीवन-पद्धति बनने में सक्षम हो सकता है.
आज के बौद्धिक कहलानेवाले युग में ऐसा प्रयास संभव है क्या- या वहाँ भी स्वस्थ विचारणा के स्थान पर अपनी -अपनी ढपली बजाना शुरू हो जायेगा ?

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहाँ, कोई नहीं प्रपंच।।
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (Friday) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

कुश्वंश said...

ये, जेहाद शब्द ही विस्तृत मायने रखता है और हर अतिरंजित प्रवृति का मतलब जेहाद कदापि नहीं होता. लव या प्यार को जेहाद की तरह इस्तेमाल करना पढीलिखी दकियानूसी सोच है जेहाद तो कदापि नहीं.किसी व्यक्ति का धर्म में विस्वास उसकी अंतरात्मा पर निर्भर करता है न की जोर जबरदस्ती पर. हां इस जोर जबरदस्ती पर सम्मिलित कुठाराघात होना चाहिए, जोर का प्रतोरोध .सभी धर्मों का अपना अपना सम्मान है और इस पर किसी को टिप्पणी करने कोई अधिकार नहीं होना चाहिए. बलोग जगत में एक ब्लॉगर है जो हमेशा दुसरे धर्मकी कुरीतियों पर निरंतर प्रहार रत है मगर स्वधर्म में व्याप्त कुरीतियों पर कलम कुंद हो जाती है इस प्रवृति से बचना चाहिए

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

एक मित्र के परिचित के साथ यही स्थिति है, समझाने की कोशिश की जा रही है लेकिन अभी तक जस की तस. देखिये अंजाम क्या हो. इन हालातों में हुई शादियाँ अंततोगत्वा बड़े ही खराब हालातों में पहुंची हैं.

दिवस said...

प्यार में कोई धर्म नहीं देखा जाता|

ऐसे आलतू-फालतू डायलोग मैं नहीं मारूंगा| खुली आँख से देखते हुए मक्खी निगलने वाले ही सेक्युलर होते हैं| आधुनिकता के नाम पर गोबर खाने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है| जो जितना अधिक कीचड़ में नहाए वह आधुनिक|
अरे हिन्दू लड़के मर गए हैं जो इन अल्लाह के नेक बन्दों(?) में मूंह मारा जाए? भावनाओं में बहने वाली इन लड़कियों को आगे पीछे सब सोचना होगा|
आपके एक निर्णय से न केवल आपका अपितु आपके परिवार, समाज व राष्ट्र का भविष्य निर्भर करता है|
अब तो अभिभावकों को भी इस "कथित प्यार के दुश्मन" बनने में मज़ा नहीं आता| इससे तो वे माँ-बाप अच्छे हैं जो अपने बच्चों की नज़रों में दकियानूस हैं| दिल्ली के एक हिन्दू (ब्राह्मण) परिचित हैं जिन्होंने अपनी दो बेटियों की शादियाँ दो मुस्लिम भाइयों से की, केवल बेटियों के प्यार(?) पर आधुनिकता की मुहर लगाने के लिए|
क्या कभी किसी मुस्लिम लड़की का हिन्दू लड़के से विवाह देखा है? उस लड़की को काफिर घोषित कर दिया जाएगा और इस दीन में कुफ्र की सज़ा है मौत|

इस्लाम में स्त्री को बच्चे पैदा करने की मशीन अथवा उपभोग की वस्तु ही समझा जाता है। पहले हिन्दू लड़कियों को पटाकर मुसलमान बनाते हैं फिर 5-7 बच्चे पैदा कर दूसरी पटाते हैं। पहली पटाने पर जो पैसा इन्हें इनके दीन से मिलता है उसे दूसरी पटाने में व अन्य आतंकी घटनाओं में खर्च करते हैं। पहली लड़की को या तो अपने हरम में शामिल कर लेते हैं अथवा प्रताड़ित कर मार देते हैं या आत्महत्या के लिए मजबूर कर देते हैं। कुछ हिन्दू लड़कियों को खाने के बाद काफी धन इकठ्ठा कर अपनी किसी चचेरी, ममेरी अथवा फुफेरी बहन से निकाह रचा कर अपना धंधा सेट कर लेते हैं।
यही है आज़म का इस्लाम।
किसी मुल्ले से कहो कि जाकर पूछ अपनी बेगम से कि खाला जान कितने बच्चे पैदा करोगी? फिर वो कहेगी भाई जान, अब्बू जान ने केवल 15 की इजाज़त दी है बाकी 15 दुसरे भाई जान के साथ पैदा करने हैं।

Rajesh Kumari said...

agar mere shahar me yeh na ho raha hota to shayad mujhe bhi is post par vishvaas na hota lekin yeh sach hai esa ho raha hai.usme humari hindu ladkiyan bhi barabar ki doshi hain koi jabardasti to vivaah kar nahi sakta ladkiyon ki budhdhi bhrashth ho gai hai vo to celebrity ka udahran deti hain jaise sharukh ne hindu ladki se ki salman ke bhi ne ki ese kitne hi udahran hain unke paas.hume hi apni ladkiyon ko samjhana padega.muslim her tareeke se apni kaum badhaane me lage hain na jaane humari sarkar bhi unki do se adhik santanotpatti par pabandi nahi laga paa rahi.is desh ka bhavishya hi khatre me hai.

प्रवीण पाण्डेय said...

अत्यन्त शोचनीय, घृणित और किसी भी स्वरूप में भी सहने योग्य नहीं..

सुबीर रावत said...

यही हकीकत काफी पहले एक निर्भीक पत्रकार फिरदौस खान जी के ब्लॉग (मेरी डायरी) में भी पढने को मिला. और आज आपकी यह पोस्ट भी फिर से हमें सोचने को बाध्य करती है....... आभार.

Bharat Bhushan said...

मुसलमानों में पति की मृत्यु हो जाने पर सारी संपत्ति पति के संबंधियों को जाती है और पत्नी को कुछ नहीं मिलता. उसके बाद की स्थिति का अनुमान सहज लगाया जा सकता है. बेहतर है कि खामखाह के तनावों से बचा जाए.
हिंदू महिलाओं को जो सांवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं उनके लिए कई देशों की महिलाएँ अभी संघर्षरत हैं. इसके बारे में जागृति फैलाने की आवश्यकता है.

दर्शन कौर 'दर्शी' said...

Afsos !yah sab ho raha hei ....

mahendra verma said...

लव जेहाद भी एक प्रकार का आतंक है। जो धर्म आतंक को ही नैतिकता समझता हो वह धर्म नहीं बल्कि मानवता विरोधी अंधी मान्ताओं की गठरी हैं।
जो लड़कियां इस धोखे में आ रही हैं, वे नहीं समझ पातीं कि वे धीमी मौत के मुंह में जा रही हैं।
निंदनीय कृत्य... सचेत होना ही होगा।

aarkay said...

सीधा सादा मतलब है- लव के खिलाफ कुछ भी करेगा ! मतान्ध लोग कुछ भी कर सकते हैं, ज़रुरत है इनके मंसूबों को कामयाब न होने देने की !

surenderpal vaidya said...

यह भी हमारे देश मेँ बढ़ रहा एक प्रकार का इस्लामी जेहादी आतंकवाद है । इसका पुरजोर विरोध किया जाना चाहिए ।

Naveen Mani Tripathi said...

islam men Nariyon ke sath manushta ka vyavhar sadiyon se nahi kiya gaya .....unhen Nari ka mahatv nahi samjhaya ja saka ....ak achhi pravishti ke liye ...abhar Zeal ji .

मदन शर्मा said...

आपसे पूरी तरह सहमत

Rakesh Kumar said...

लव जेहाद से बचकर तभी रहा जा सकता है
जब हम स्वंय अच्छे संस्कार और ज्ञान
बच्चों को दें.अपने शास्त्रों में उनकी रूचि
उत्पन्न करें.दिशाहीन बच्चे ही लव जिहाद का
शिकार होते है.

सदा said...

सार्थक व सटीक लेखन ..विचारणीय प्रस्‍तुति के लिए आभार ।

सुमित प्रताप सिंह Sumit Pratap Singh said...

सत्य दर्शाती एक सार्थक पोस्ट...

Maheshwari kaneri said...

सच कहा ,सोचनीय स्थिति..

ZEAL said...

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A comment recieved through mail--

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about an hour agoSateesh Warkade--

LOVE JEHAD (हिन्दू लड़कियो सावधान) LOVE JEHAD मदरसो की चुपचाप योजना का हिस्सा है जो भारतीय जनसंख्या का संतुलन बिगाड़ रहा है LOVE JEHAD की चर्चा पुरे देश मे हाइकोर्ट से लेकर मिडिया मे खासा चर्चा मे तो है ही अब हिन्दू समाज सोचने को मजबूर हो रहा है मुसलमानो की विश्वसनीयता कटघरे मे है सरकारी आकड़े के अनुसार 1976-77 मे मदरसो की संख्या केवल 88 थी सन् 2000 के दशक मे यह संख्या 20 हजार के आस पास हो गयी है उस फसल का परिणाम इस समय दिखाई दे रहा है भारत के प्रमुख शहरो के मदरसो मे बड़ी संख्या मे मोटर साइकिल रखी जाती है जिसका उपयोग LOVE JEHAD मे प्रयोग किया जाता है पटना, मुजफ्फरपुर, लखनउ, जैसे शहरो मे 25 से लेकर 100 मोटरसाइकिल तक योजना बध्द रखा जाता है शाम को कालेज बंद होने के समय कुछ लड़को को साधन उपलबध्द कराकर हिन्दू लड़कियो के पीछे लगा दिया जाता है कालेज के सामने कोई मुस्लिम मोबाइल रिचार्ज की दुकान खोलता है और हिन्दु लड़कियो के नंबर नोट कर उसका गलत उपयोग करता है इस समय मदरसो से शिक्षित नवजवान जिन्हे इस्लाम का जुनून सवार रहता है शिक्षा समाप्त होने पर मदरसे मे सपथ दिलाई जाती है कि इस्लाम ने तुम्हारे ऊपर इतना धन लगाया है तुम इस्लाम को क्या दोगे? उसके उत्तर मे उन्हे एक न एक हिन्दू लड़की से निकाह हेतु प्रेरित किया जाता है फिर क्या वे अपनी इस्लामिक उध्देश्य मे जूट जाते है अपना नाम राकी बबलू बाबी इत्यादि हिन्दू नाम रख लेते है हाथ मे रक्षा सूत्र जैसा कुछ बाँध लेते है जिससे पता ही नही चलता कि ये हिन्दू है या मुसलमान । चाहे केरल हो या कोई अन्य प्रदेश सभी जगह समान तरीके से LOVE JEHAD चलाया जाता जा रहा है प्रतिवर्ष 1 लाख हिन्दू लड़कियो को फसाकर विवाह के माध्यम से इस्लामिकरण किया जाता है फिल्म जगत मे जितने खान बँधू है वे सभी हिन्दू लड़की से निकाह करना, बच्चे पैदा करना-छोड़ना और फिर दूसरी हिन्दू लड़की से निकाह करना आखिर ये सब क्या है ? क्या इन्हे मुस्लिम लड़की नही मिलती ? केरल के हाईकोर्ट ने अपने निर्णय मे कहा था "ये LOVE नही LOVE JEHAD है

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Ramakant Singh said...

किसी सच को कम शब्दों में कहना आप से सिखा जा सकता है
साथ ही सच बोलने या लिखने की हिम्मत .
बेबाक चिंतन के लिए बधाई फिर भी ज़रा संभलकर कडुई दवा सब नहीं पी पाते

Ramakant Singh said...

किसी सच को कम शब्दों में कहना आप से सिखा जा सकता है
साथ ही सच बोलने या लिखने की हिम्मत .
बेबाक चिंतन के लिए बधाई फिर भी ज़रा संभलकर कडुई दवा सब नहीं पी पाते

DUSK-DRIZZLE said...

YOU RIGHTLY SAID.... THANKS

वाणी गीत said...

प्रेम किसी मकसद से किया जाए तो त्याज्य ही है !

dinesh aggarwal said...

यदि सच है तो निश्चित ही चिन्तनीय एवं भयावह है,
यह सब हमारे असंगठित होने का परिणाम हे, और
हमारे असंगठित होने का कारण है जातिप्रथा। जिससे
हम मुक्त नहीं होना चाहते। अफसोस कि बुद्धिजीवी
इस ओर अपना ध्यान आकर्षित नहीं करते। इस जाति
प्रथा ने हमें पहले भी गुलाम बनाया था। मुस्लिम
तुष्टिकरण की नीति से हम कहीं दोबारा गुलाम न बन
जाऐं।
कृपया इसे भी पढ़े
क्या यही गणतंत्र है