Tuesday, February 19, 2013

मैं और मेरी फेसबुक ..

मैं और मेरी फेसबुक , अकसर ये बातें करते हैं
तुम हो तो क्या बात है, तुम न होतीं तो कैसा होता ?

हज़ारों के दिल में रंज है और लाखों की रात स्याह है
तुम हो तो सब कह-सुन लिया, तुम ना होतीं तो कैसा होता?

भारत की नींव और लोकतंत्र का चारों  स्तम्भ ,
तुम हो तो थमा हुआ है, तुम ना होतीं तो कैसा होता?

बढ़ते आतंकवाद और गुनाहों के इस शहर में,
तुम हो तो आईना दिखा भी लिया, तुम ना होतीं तो कैसा होता?

जनता का खौफ सरकार के दिल से जा रहा है,
तुम हो तो थोडा डरती भी है, तुम न होतीं तो क्या होता ?

कितनों के दिल का हाल हो तुम, कितनों के मन का मलाल हो तुम,
तुम हो सबने बरस लिया, तुम ना होतीं तो कैसा होता?

देशप्रेमियों के दिल में जो दर्द है, जो आवेश है, जो आग है ,
तुम हो तो थोड़ा गरज लिया , तुम ना होतीं तो कैसा होता?

 मैं और मेरी फेसबुक , अकसर ये बातें करते हैं
तुम हो तो क्या बात है, तुम न होतीं तो कैसा होता ?


 Zeal

25 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत खूब बातें, मेरा फेसबुक तो कुछ कहने ही नहीं देता है, बस बकर बकर..

Unknown said...

सचमुच फेसबुक न होता तो क्या होता?
आपने सच कहा

Sunil Kumar said...

सही कहा आपने ,बहुत सुंदर बधाई....

ANULATA RAJ NAIR said...

:-)

फेसबुक न होता तो सीधे लोगों के फेस पर कह डालते और क्या...

अनु

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

ना कुछ था तो खुदा था,
कुछ ना होता तो खुदा होता।
डुबाया मुझे इस फ़ेस बुक ने,
ना होती तो क्या होता।

Rakesh Kumar said...

वाह!
क्या बात है.

प्रतिभा सक्सेना said...

फ़ेस बुक!हाँ ठीक ही कह रही होंगी आप ,मुझे इसका कोई खास अनुभव नहीं .
दिव्या जी, आपको पिछले दिनों दो ईमेल भेजी थीं
लगता है मिली नहीं .

Rohit said...

जाने कितनी बातें कह गई हैं फेसबुक के बहाने..चिंता की बात ये है कि जहां अरब देशों में सोशल साइट क्रांति ला रही हैं वहीं हमारे देश में अपने ही लोगो को बेगाने बनाने का कुचक्र चलाया जाता है। गलत समय पर गलत बयानबाजी करने वालों को पकड़ा जाता है तो सराकर को नींद नहीं आती....। बहुत ही गड़बड़झाला है बाबा इस फेसबुक में

Arun sathi said...

wah ji face book chalisa----jai jai

Prabodh Kumar Govil said...

sahi baat rochak tareeke se, sundar.

Tamasha-E-Zindagi said...

आपकी यह पोस्ट आज के (२० फ़रवरी २०१३) Bulletinofblog पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

Rajendra kumar said...

आपकी बातें १००%सही है जी,आभार.

HARSHVARDHAN said...

फेसबुक नहीं होता तो, इन्टरनेट पर भारत की इतनी आबादी ना होती!!

कृपया इस जानकारी को भी पढ़े :- इंटरनेट सर्फ़िंग के कुछ टिप्स।

Aditi Poonam said...

बहुत बढ़िया दिव्या जी ,
फेस बुक तो लगता है ,
जीवन नैय्या की पतवार
होगई............

दिवस said...

हद खूबसूरत पंक्तियाँ।
आज देश में जो भी जागृति का ज्वार आ रहा है, वह फेसबुक की ही देन है।
आपकी कविता बहुत खूबसूरत है।

Madan Mohan Saxena said...

बाह, एक दम सही .

Ankur Jain said...

बहुत खूब..फेसबुक से की गई बातों सुंदर ढंग से कविता में पिरोया है।।।

Anonymous said...

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कालीपद "प्रसाद" said...

फेस बुक नहीं होता तो आमने सामने तू तू मैं मैं होता

कालीपद "प्रसाद" said...

फेस बुक नहीं होता तो आमने सामने तू तू मैं मैं होता
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Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

:-)))

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