Saturday, January 2, 2016

हिंदी कैलेण्डर की तो बरसी मनाते हैं हम भारतीय

हिन्दुस्तान के हर घर और दफ्तर में तारीखें बदल गयीं ! हर फाइल पर एक नया वर्ष अंकित हो चुका ! हर कंप्यूटर, हर मोबाइल और हर घडी में सबकुछ बदलकर २०१६ हो गया , फिर आज के दिन को पिछले वर्ष के साथ कैसे जोड़ा सकता है ! आज जब हम भारतीय, हर क्षेत्र में FDI आदि के माध्यम से विदेशों की गुलामी कर रहे हैं तो फिर अंग्रेजी कैलेण्डर का विरोध क्यों? और केवल आज के दिन ही क्यों? साल के तीन सौ पैसठ दिन तो हम इस्तेमाल इसी कैलंडर को करते हैं, फिर आज के दिन इस कैलेण्डर को इतनी दुत्कार क्यों?
.
जब किसी में इतना दम ही नहीं की अपना हिंदी कैलेण्डर, अपने ही हिन्दुस्तान में, प्रचलन में ला सके, तो व्यर्थ अंग्रेजी कैलेण्डर को कोसने से लाभ क्या ? भारत भूमि पर अब कोई माई का लाल पैदा नहीं होगा जो अपनी तिथि, अपनी हिंदी, अपनी परंपरा और अपनी संस्कृति को पुनर्स्थापित कर सके !
हिंदी कैलेण्डर की तो बरसी मनाते हैं हम भारतीय !

10 comments:

राजेंद्र कुमार said...

बेहतरीन प्रस्तुती, नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

kuldeep thakur said...

आपने लिखा...
और हमने पढ़ा...
हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
इस लिये आप की रचना...
दिनांक 03/01/2016 को...
पांच लिंकों का आनंद पर लिंक की जा रही है...
आप भी आयीेगा...

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (03-01-2016) को "बेईमानों के नाम नया साल" (चर्चा अंक-2210) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सब को नव वर्ष के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं|

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, सभी को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

अरुणा said...

सही कहा आपने
इतनी जागृति तो आई कि नव सम्वत्सर तो मनाया जाने लगा
हाँ केलेंडर बदलना तो मुश्किल ही है

Kavita Rawat said...

बहुत सटीक लिखा है आपने ..विरोध व्यर्थ है .... हमारे पडोसी नेपाल में मैंने देखा कि वहां हिंदी कैलेण्डर ही चलता है.. जबकि हम सिर्फ बोलते हैं विरोध करते हैं बस ...
इसलिए विरोध करना वास्तव में व्यर्थ है ..जो सच है उसे स्वीकार कर लेने में ही भलाई है ...

PBCHATURVEDI प्रसन्नवदन चतुर्वेदी said...

सटीक और बेहतरीन लेखन.... आप को नववर्ष की शुभकामनाएं....

Asha Joglekar said...

I tank Bure din nah I hair Hum Har Sal Chaitra Mas me Hindu calender bhi basalt hair aur Gudi padma manatee hain.

Anonymous said...

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