आज 2G spectrum घोटाला जिसकी कीमत लगभग ३% है GDP कि , ने बेनकाब कर दिया है देश के गद्दारों को। यदि ये गद्दार नहीं तो फिर जरूरत से ज्यादा लालची हैं। देश कि गद्दी हथियाय रहने के लिए ये देश को बेचने से नहीं हिचक रहे।
गरीब जनता कि cost पर ये सुख और ऐश्वर्य भोग रहे हैं। हज़ारों करोड़ का घोटाला करके शरबत कि तरह पी जाते हैं। फिर डकार लेकर वापस तन कर बैठ जाते हैं गद्दी पर।
चीन में भ्रष्टाचार के लिए मृत्युदंड कि सजा निर्धारित है। क्या हमारे कानून में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। क्या भ्रष्टाचारियों को जो हमारे देश के मुद्रा कोष को लूटकर हमें कंगाल बना रहे हैं, उन्हें खुले सांड कि तरह छोड़ देना चाहिए ?
कांग्रेस के पास जो ब्रम्हास्त्र है -" इस्तीफ़ा " । इसका नाजायज प्रयोग कर रही है UPA । गुंडागर्दी और लूट करो फिर ऐश करो इस्तीफ़ा देकर। इनके खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए। इन्हें आजीवन कारावास या फिर मृतुदंड जैसी कठोरतम सजा मिलनी ही चाहिए।
शीर्ष पर बैठे सत्ता के लालची नेता देश कि नीव हिला रहे हैं और गर्व के साथ अपने त्याग कि दुहाई दे रहे हैं ? इस बड़ी बड़ी हस्तियों को सजा कौन दिलाएगा और कैसे ? जब देश के न्यायाधीश ही ईमान खो रहे हों तथा माननीय प्रधान मंत्री ही घोटालों के सूत्रधार हो रहे हों तो क्या न्याय कि अपेक्षा कि जा सकती है ? PM ने देश के हित को बलि चढ़ाकर , बिना किसी शर्त कैसे blank cheque दे दिया A Raja को ? उनके इस निर्णय को क्या कहा जाए ? PM के इस betrayal से देश कि व्यवस्था चरमरा रही है। इस धोखाधड़ी तथा विश्वाघात ने उनके चेहरे से इमानदारी तथा सच्चाई कि चमक छीन ली है। गद्दी-मोह उनसे गलत निर्णय करवा रहा है।
नेहरु परिवार कि बहुरानी , जो ये समझती हैं कि वो इस देश के गरीबों को पाल रही हैं , को अपने इस दिखावटी त्याग से बाज आ जाना चाहिए। वो और उनके सुपुत्र ये सोचते हैं कि सबको बदलना चाहिए , सिवाय उन दोनों के।
डॉ मनमोहन सिंह जी , अब भी संभल जाइए। इस विदेशी बहुरानी के हाथ कि कठपुतली मत बनिए। भारत कि एक अरब जनता के धन को अपना व्यक्तिगत [ कांग्रेसी] कोष मत समझिये। इन विश्वासघातों के चलते देश कि सुरक्षा तथा अस्मिता खतरे में है।
आज तक इन्होने कोई एक्शन नहीं लिया निम्नलिखित मुद्दों पर --
- अलगाववादियों के खिलाफ [ गिलानी]
- आतंकवादियों के खिलाफ [अफज़ल गुरु, कसाब]
- J&K rallyist...
- जो अपने राष्ट्रीय ध्वज को जला रहे हैं
- जो भारत के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।
- कोई आपत्ति नहीं की जब चीन ने ब्रम्हपुत्र नदी पर बाँध बनाना शुरू किया
- कारगिल में शहीद हुए सेनानियों की विधवाओं के लिए जो आवास आबंटित होना था उसमें भी अशोक चाहवान का घोटाला
- तटस्थ रहे जब CWG में ७० हज़ार करोड़ का घोटाला हुआ
- और अब 2G Spectrum घोटाले पर प्रधान मंत्री कि चुप्पी।
मुग़ल आये चले गए , अँगरेज़ भी चले गए लेकिन अब इटली से आई भारत की शुभ चिन्तक, श्रीमती सोनिया गांधी , पूरे हिंदुस्तान को अपने इशारों पर नचा रही है। क्या अभिशप्त है भारत विदेशियों द्वारा लूटे जाने के लिए ? कमाल है नेहरु चचा - आप भी और आपके वंशज भी , सभी एक से बढ़कर एक हैं। जब तक देश पूरा नहीं बेचेंगे , तब तक गद्दी नहीं छोड़ेंगे।