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Friday, January 16, 2015

धर्म

हम धर्म से मिले पूछा "कौन हो तुम"
वो बोला -"सनातन हूँ मैं "
मजहब से मिली, पूछा-"कौन हो तुम "
वो बोला- "इस्लाम हूँ मैं"
टाइम-पासियों से पूछा तो बोले
"मानवता" है धर्म मेरा
ठिठुरते मंगरू से पूछा तो बोला-
"बस एक कम्बल"
अशरफ से पूछा तो बोला -
"जिहाद और जन्नत"
देश के चमकते सितारों से पूछा तो बोले -
"पैसा और सिर्फ पैसा"
पैसा ही धर्म है शायद !
उंचाईयों पर पहुँचने के बाद,
ऐशो-आराम के मध्य
रुपयों से खेलने वालों को
हमने कभी धर्मांध नहीं देखा
मौकापरस्तों हमने कभी
धर्मांध नहीं देखा
शोहरत की बुलंदियों को छूने वालों को
हमने कभी धर्मांध नहीं देखा
क्योंकि पैसा ही उनका धर्म और ईमान है
किसी मजहब से बैर करके वो
अपना पैसा खोना नहीं चाहते
अपने धर्म को इज़्ज़त देकर वो
अपना वोट भी नहीं खोना चाहते
पैसों की खातिर हमने उनको अपना ज़मीर ओ ईमान बेचते देखा है !
हमने पैसे वालों को केवल पैसे की खातिर ही सज़दा करते देखा है
हमने किसी बड़े आदमी को धर्मांध नहीं देखा
पैसा ही है जो शोहरत और कुर्सी को धरम बनाता है !
राजू हिरानी से सीखो जो ...
पैसों की खातिर हमको 'धरम' पढ़ाता है !

Zeal