फोन पर रवीन्द्र जी का निमंत्रण मिला - " दिव्या जी , आपको सर्वश्रेष हिंदी ब्लॉगर के लिए चयनित किया गया है , ३० अप्रैल को सम्मलेन में आपकी उपस्थिति अपेक्षित है "
हे भगवान् , इतना बड़ा सम्मान , मुझ जैसे अदना ब्लॉगर को ? मेरे तो पाँव ही नहीं पड़ रहे थे ज़मी पर। खैर सज धज कर मैं सम्मलेन में पहुंची , एक से एक विद्वान् और वरिष्ठ ब्लॉगर्स के दैदीप्यमान चेहरों को देखने का अभूतपूर्व सुख मिला । कुछ भी तो आभासी नहीं था। सभी तो मेरी तरह bilaterally symmetrical और emotional थे वहां पर। एक दुसरे से मिलने का सुखद सिलसिला जारी था । लोगों से मिलकर कभी अधर मुस्कुराते थे तो कभी नेत्र अश्रुपूरित हो छलछला उठते थे । भावुक दिव्या भावनाओं में बही जा रही थी ....
स्टेज पर सम्मान ग्रहण करने के लिए मेरा नाम पुकारा गया। सकुचाती हुयी कांपते हाथों से इतना बड़ा सम्मान ग्रहण किया । ह्रदय मानो कृतज्ञता के बोझ तले दबा जा रहा था। अनेक तेस्वीरें खिंच गयीं। कुछ मुस्कुराते हुए , कुछ लजाते हुए , कुछ तस्वीरों में तो गालों पर छलकी लाली भी बखूबी कैद हो गयी ।
अजय कुमार झा जी ने बेहतरीन तसवीरें लीं हमारी और वादा भी किया की शीघ्र ही कूरियर से भेजेंगे मुझे ताकि मैं उन तस्वीरों को अपने इस लेख पर लगा सकूँ।
अब बधाई देने वालों का तातां लग गया ...
मेरी निगाहें किसी को तलाश रहीं थीं , तभी राधिका आ टपकी , बोली - " दिव्या अब ज्यादा खुश होना बंद करो , चलो जल्दी चलो " मैंने कहा रुको , थोड़ी देर बाद चलेंगे , मुझे यहाँ अच्छा लग रहा है ।
लेकिन राधिका नहीं मानी , मुझे जोर-जोर से खींचने लगी । गुस्से में बोली- " तुम्हें खयाली पुलाव बनाने की आदत सी पड़ गयी है "
हडबडाहट में मेरी आँख खुल गयी , देखा पतिदेव मुझे हिला-हिला कर जगा रहे थे , बोले "जल्दी उठो देर हो रही है , बच्चों के लिए टिफिन तैयार कर दो , वैन आने वाली है "
मैंने कहा - " प्रियतम , आपसे मेरा थोडा भी सुख नहीं देखा जाता न , इतना मीठा स्वप्न देख रही थी ...."
वे बोले - " इसमें नया क्या है , तुम तो रोज ही सपना देखती हो की ओबामा ने तुम्हें भोज पर आमंत्रित किया है । अब बस भी करो मुंगेरीलाल की तरह हसीन सपने देखना। इस तरह के सपने देखने से कोई लाभ होने वाला नहीं है।"
क्या करती । धीमी आवाज़ में बोली - " स्वामी , यह एक सकारात्मक स्वप्न था , इसे कहते हैं 'Stress management' "
आभार।
हे भगवान् , इतना बड़ा सम्मान , मुझ जैसे अदना ब्लॉगर को ? मेरे तो पाँव ही नहीं पड़ रहे थे ज़मी पर। खैर सज धज कर मैं सम्मलेन में पहुंची , एक से एक विद्वान् और वरिष्ठ ब्लॉगर्स के दैदीप्यमान चेहरों को देखने का अभूतपूर्व सुख मिला । कुछ भी तो आभासी नहीं था। सभी तो मेरी तरह bilaterally symmetrical और emotional थे वहां पर। एक दुसरे से मिलने का सुखद सिलसिला जारी था । लोगों से मिलकर कभी अधर मुस्कुराते थे तो कभी नेत्र अश्रुपूरित हो छलछला उठते थे । भावुक दिव्या भावनाओं में बही जा रही थी ....
स्टेज पर सम्मान ग्रहण करने के लिए मेरा नाम पुकारा गया। सकुचाती हुयी कांपते हाथों से इतना बड़ा सम्मान ग्रहण किया । ह्रदय मानो कृतज्ञता के बोझ तले दबा जा रहा था। अनेक तेस्वीरें खिंच गयीं। कुछ मुस्कुराते हुए , कुछ लजाते हुए , कुछ तस्वीरों में तो गालों पर छलकी लाली भी बखूबी कैद हो गयी ।
अजय कुमार झा जी ने बेहतरीन तसवीरें लीं हमारी और वादा भी किया की शीघ्र ही कूरियर से भेजेंगे मुझे ताकि मैं उन तस्वीरों को अपने इस लेख पर लगा सकूँ।
अब बधाई देने वालों का तातां लग गया ...
- समीर लाल जी आये , बोले --" दिव्या बधाई हो , तुम ही असली हक़दार हो इस पुरस्कार की "
- निर्मला कपिला जी बोलीं - " दिव्या मुझे गर्व हैं तुम पर , शुभकामनाएं "
- डॉ अरुणा कपूर जी ने ह्रदय से लगा लिया , उनके नेत्रों में प्रेम के अश्रु थे ।
- रश्मि प्रभा जी ने मधुर शब्दों में बधाई दी ।
- अजित गुप्ता जी आयीं - गर्मजोशी से मेरी पीठ ठोकी , " ये हुयी न कोई बात दिव्या -बधाई"
- शोभना चौरे जी ने अश्रुपूरित नयनों से अंक में भर लिया - "बहुत खुश हूँ दिव्या , गर्व है तुम पर"
- वाणी जी आयीं , बोलीं -" आनंद आ गया-बधाई "
- सदा जी चहकती हुयी आयीं - "दोस्त हो तो दिव्या जैसी , सखियों का नाम रौशन कर दिया"
- अनूप शुक्ल जी आये , मुस्कुराकर बोले - " बहुत खूब " --मुझे लगा कमेन्ट कट-पेस्ट हो गया है।
- LA से जगन जी आये , मुस्कुराए और बोले - " You genuinely deserve this award "
- रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी आशीर्वाद स्वरुप सर पर हाथ फेरा और बहुत आशीष दिया ।
- आशीष जी आये , बोले - " मैं कहता था न , तुम ही इस सम्मान की असली हक़दार हो "
- प्रतुल जी बोले - "बहिन , मुझे गर्व है तुम पर "
- अचानक मेरी निगाह कोने में खड़े एक छोटे से समूह पड़ी , उस समूह में खड़े विद्वान् ब्लॉगर्स को देखकर सहम गयी , उनकी निगाहें मानों कह रही थीं -" इस मूर्ख को किसने चयनित किया है " --
- मुझे सहमा हुआ देखकर सुज्ञ जी आ गए , बोले - " डरना मना है , जो डर गया वो मर गया "
- तभी सतीश सक्सेना जी नज़र आये , मुस्कुराए और बोले - "आशीर्वाद एवं शुभकामनायें डॉ दिव्या "
- फिर डॉ रूपेश और संजय कटानवणे साथ साथ नज़र आये , इससे पहले की डॉ रुपेश कुछ कह पाते , संजय जी बोलेआपने अभी तक मेरे प्रश्न का जवाब नहीं दिया , फिर आपको ये सम्मान आखिर दिया किसने ।
- "भूषण जी दूर बैठे मुस्कुरा रहे थे ।
- अचानक ब्लॉगर-डाक्टरों का दल निकट आया , डॉ अमर बोले -" अरे सारे ढंग-तरीके के बिलागर मर गए थे क्या जो दिव्या को पुरस्कार थमा दिया ?" ...फिर मुस्कुराए और बधाई दी ।
- aarkay जी हर्षातिरेक से भावुक थे अपनी दिव्या के लिए ।
मेरी निगाहें किसी को तलाश रहीं थीं , तभी राधिका आ टपकी , बोली - " दिव्या अब ज्यादा खुश होना बंद करो , चलो जल्दी चलो " मैंने कहा रुको , थोड़ी देर बाद चलेंगे , मुझे यहाँ अच्छा लग रहा है ।
लेकिन राधिका नहीं मानी , मुझे जोर-जोर से खींचने लगी । गुस्से में बोली- " तुम्हें खयाली पुलाव बनाने की आदत सी पड़ गयी है "
हडबडाहट में मेरी आँख खुल गयी , देखा पतिदेव मुझे हिला-हिला कर जगा रहे थे , बोले "जल्दी उठो देर हो रही है , बच्चों के लिए टिफिन तैयार कर दो , वैन आने वाली है "
मैंने कहा - " प्रियतम , आपसे मेरा थोडा भी सुख नहीं देखा जाता न , इतना मीठा स्वप्न देख रही थी ...."
वे बोले - " इसमें नया क्या है , तुम तो रोज ही सपना देखती हो की ओबामा ने तुम्हें भोज पर आमंत्रित किया है । अब बस भी करो मुंगेरीलाल की तरह हसीन सपने देखना। इस तरह के सपने देखने से कोई लाभ होने वाला नहीं है।"
क्या करती । धीमी आवाज़ में बोली - " स्वामी , यह एक सकारात्मक स्वप्न था , इसे कहते हैं 'Stress management' "
आभार।