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Tuesday, January 4, 2011

क्या ब्लॉग्स के माध्यम से हमारा योगदान समाज तक पहुँच रहा है ?

व्यक्ति के मन में एक जज़्बा होता है की हम भी समाज के लिए कुछ योगदान कर सकेंकुछ जागरूकता ला सकेंविसंगतियों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करके समाज में कुछ सकारात्मक बदलाव ला सकें

कुछ वर्ष पहले तक ऐसी कोई सुविधा नहीं थी जहाँ हम विचार रख सकते हों , विमर्श कर सकते होंलेकिन आज ब्लॉग एक सशक्त माध्यम बन कर उभरा है , जिसके द्वारा हम लोग आपस में विचार -विमर्श कर सकते हैं तथा अपने विचारों एवं आक्रोश को समाज तक पहुंचा सकते हैंबहुत से लोग जो ब्लोग्स पढ़ते हैं, चाहे सरसरी तौर पर ही पढ़ें , लेकिन निरंतर उठने वाली आवाजें उनके अंतर्मन को कहीं कहीं कचोटती या झकझोरती तो होंगी हीशायद उनके दिल में भी वो आवाज़ बुलंद होती होगी और फिर उनके माध्यम से ये लहर आगे भी बढती होगी

मेरे मन में ये प्रश्न है की क्या वास्तव में हमारी आवाज़ जनता के अंतर्मन को influence करने में सक्षम है? क्या हमारी आवाज़ एक बहुत छोटे दायरे तक तो सीमित नहीं हैक्या हम ब्लोगर्स की आवाज़ , विशाल समुद्र में मात्र एक बूँद के सामान है ? क्या हमारे प्रयत्न व्यर्थ हैं ? क्या हमारे अथक परिश्रम की कोई सार्थकता नहीं है ?

मेरी एक पाठक राधिका ने कहा - " दिव्या तुम्हारी आवाज़ एक छोटे दायरे तक सीमित है , तुम अपनी शक्ति को अनायास ही व्यय कर रही हो, तुम्हारे प्रयासों से समाज में कोई बदलाव आने वाला नहीं है। "

उसकी बात से मन में उपजे इस प्रश्न को आपके सामने रख रही हूँ

मेरे विचार से , जो लोग मेरे सामाजिक लेखों को पढ़ रहे हैं और कहीं कहीं सकारात्मक रूप में प्रभावित अथवा सहमत हो रहे हैं, उनके द्वारा ये विचार चार अन्य लोगों तक पहुंचेगाफिर उन चारों के द्वारा १६ तक और इस प्रकार geometrical progression में विचार फैलेगा और लोगों में कहीं कहीं जागरूकता लाएगा हीदृढ विश्वास है की बिंदु-बिंदु से ही सिन्धु बना हैमेरी पहुँच बहुत सीमित हैं , लेकिन मेरे पास बेहतर विकल्प भी तो नहीं हैंइसलिए अपनी शक्ति और सामर्थ्य के साथ कर्म जारी है

इस विषय पर आपके क्या विचार हैं और क्या सुझाव हैं , उनका स्वागत है

आभार