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Saturday, January 15, 2011

मोडरेशन - लेखक की पसंद नहीं, मजबूरी है.

जब मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया था तो मेरे ब्लॉग पर मोडरेशन नहीं थालेकिन मेरी पहली पोस्ट पर ही अमरेन्द्र त्रिपाठी नामक ब्लोगर ने आकर अभद्र टिप्पणियों की भरमार कर दीफिर वो अपने समुदाय के श्रीशपाठक , गिरिजेश राव , अनूप शुक्ला , संजीत त्रिपाठी आदि को लाकर लड़ने लगा और मेरे ब्लॉग को कुरुक्षेत्र बना दिया

इन लोगों से परेशान होकर मैंने ब्लॉग पर मोडरेशन लगा दिया तो मुझे मेरे हर लेख पर डॉ अमर और अर्थ देसाई ने , मोडरेशन हटाने के लिए परेशान करना शुरू कर दियापरेशान होकर मैंने दुबारा मोडरेशन हटा दिया

लेकिन यहीं भारी भूल हो गयीमोडरेशन हटाने के साथ ही , महफूज़ अली , दीपक मशाल , अमरेन्द्र त्रिपाठी [ रवि नाम से ], अरविन्द मिश्रा [ अजित नाम से ] , ढेरों अश्लील एवं अभद्र टिप्पणियां कीइसके अतिरिक्त लेखिकाओंमें अंशुमाला और पूजा ने ब्लॉग को पुनः महाभारत में बदल दियाऔर जलजला आदि बेनामियों की तो कोईगणना ही नहीं है , उनको को छिछोरापन करने का मौक़ा मिल गयाऔर बेनामी कोई दुसरे गृह से नहीं आतेइसी ब्लॉग-जगत के विकृत मानसिकता वाले लेखक और लेखिका मोडरेशन ना होने का लाभ उठाते हैंबेनामी बनकर अपमानित करते हैं

बहुत कुछ इस पर भी निर्भर करता है की आप किसप्रकार के लेख लिखते हैंयदि आप पूरी उम्र बादलों और जुल्फों पर लिखते रहेंगे तो उनपर इन विवाद पसंद लोगों को विवाद करने का मौक़ा नहीं मिलतालेकिन यदि आप समाज में तथा अपने आस पास के परिवेश में हो रहे , भ्रष्टाचार, अन्याय और अनियमितताओं पर लिखते हैं तो लोगों में विचारों का मंथन होता हैऐसे में इमानदार एवं सभ्भ्रांत पाठक तो अपने बहुमूल्य विचार रखते हैं, लेकिन ईर्ष्यालू एवं पूर्वाग्रहों से युक्त पाठक तथा टिप्पणीकार अपनी भड़ास निकालते हैंलेकिन मोडरेशन होने के कारण ऐसे लोगों की साहित्यिक सडांध को रोकने में एवं लेख को दूषित होने से बचाने में मदद मिलती है

दूसरी बात -जिन्होंने मोडरेशन लगाया है , वो कोई मूर्ख तो हैं नहींकुछ सोच समझ कर ही लगाया होगाएकबात समझ नहीं आती , जिन्होंने मोडरेशन नहीं लगाया है , उनको इसमें इतनी आपत्ति क्यूँ होती हैउनसे तो कोई कह नहीं रहा की आप भी लगाइएअरे भाई आप अपने तरीके से खुश रहिये , दूसरों को उनके तरीके से जीने दीजिये

तीसरी बात - प्रवीण शाह जैसे लोग तो शालीन एवं शिष्ट टिप्पणियां भी डिलीट कर देते हैं, गुटबाजी के चलतेतो फायदा क्याप्रकाशित , sensible कमेंट्स डिलीट करके ये बिना मोडरेशन वाले क्या जाहिर करना चाहते हैं

मेरे विचार से मोडरेशन लगाना है अथवा नहीं , ये भुक्तभोगी व्यक्ति ही निर्णय ले सकता हैअपनी सुरक्षा केवल अपने हाथों में ही होती हैअभद्र , अश्लील , भड़ासयुक्त एवं ईर्ष्यायुक्त टिप्पणियों से बचने के लिए एकमात्र उपाय संभव उपाय है मोडरेशनये लेखक एवं लेखिका की पसंद नहीं मजबूरी हैकृपया मजबूरी में लिए गए निर्णय का सम्मान कीजिये

मोडरेशन लगाने के कारण आपको होने वाली असुविधा के लिए खेद सहित ,
दिव्या