मणिशंकर अय्यर यदि विरोधी पार्टी के सदस्यों को ---"जानवर"--- कह दें तो
सरकार एक फॉर्मल माफ़ी मांग के छुट्टी पा जाती है, लेकिन फेसबुक पर यदि कोई
कुछ लिख दे तो गिरफ्तारी , जुर्माना और तीन साल की सज़ा मिलती है। अय्यर
जैसे राजनेता , जिन्हें बेस्ट सांसद का अवार्ड मिल चुका है वे जपने
विशेषाधिकारों का हनन करते हैं , साथ ही इनकी पार्टी हमारी "अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता" का भी हनन करती है। आप कहें तो पुण्य और फेसबुकिये लिखें तो
पाप? गजब है आपकी दोहरी मानसिकता!
वैसे अय्यर टाइप का एक पुरुष
ब्लॉगर भी है जो खुद को हीरो-बाघ कहता है , साथी पुरुष ब्लॉगर्स को "चमड़ोधा कुत्ता" और महिला ब्लॉगर्स को "लोमड़ी" कहता है! ऐसे गाली-गलौच करने वाले राजनेता और ब्लॉगर्स की क्या सज़ा होनी चाहिए ?