Wednesday, October 26, 2011

दूध के धुले सत्ताधारी !

सत्ता में बैठे देश के कर्णधार सब दूध के धुले हुए हैं। कोई पाप नहीं किया। भ्रष्टाचार से इनका सरोकार नहीं है। ये देश के लिए ही पैदा हुए हैं। देश को ले डूबने के बाद ही पिंड छोड़ेंगे। जो भी आएगा देश को बचाने , उनकी ये तहस नहस कर देंगे। अच्छे से अच्छा व्यक्तित्व भी पल भर में भ्रष्ट घोषित कर दिया जाएगा।

इन मठाधीशों से कोई पूछे , दूसरों पर उँगलियाँ उठाना क्या इनकी पार्टी का फैशन है ? लेटेस्ट फैशन ?

प्रज्ञा ठाकुर आतंकवादी
भगवाधारी देशद्रोही
रामदेव भ्रष्ट!
बालकृष्ण फर्जी!
अब एक इमानदार आफिसर किरण बेदी भी भ्रष्ट !


अगला किसका नंबर है ?

कृष्ण भी भ्रष्ट ?
विदुर भी मूर्ख?
राम मर्यादाविहीन ?


धर्म का नाश कर रहे हैं ये छद्म सेकुलर सत्ताधारी। अलगाववादियों (गिलानी, अरुंधती) को गले लगाते हैं पाकिस्तानियों के साथ बैठकर ( दोनों देशों के प्रमुख) समोसा खाते हुए क्रिकेट देखते हैं। ३७७ क़त्ल करने वाले (कसाब जैसे ) आतंकवादियों को देशवासियों पर जबरदस्ती थोप रखा है।

होटल ताज में फंसी जनता को बचाने में हमारे देश के अनमोल हीरों ने अपनी जान गवां दी। शहीद हो गए देश के जाबांज सिपाही आप उनका परिवार सिसकियाँ ले रहा होगा, लेकिन हमारे देश के 'दूध के धुले सत्ताधारियों' को इनकी कुर्बानी कहाँ याद है भला।

इन्हें तो बस उँगलियाँ उठाना आता है। देशभक्तों की छवि धूमिल करना आता है। आरोप और आक्षेप लगाना कांग्रेसियों का फैशन है।

कभी अपनी भी गिरेहबान में झांको कांग्रेसियों !

आज का यह प्रकाश पर्व शहीदों और देशभक्तों के नाम !...... मेरी दिवाली का हर दिया देश की समृद्धि के नाम !

हे माँ लक्ष्मी ,
देना है वरदान तो धनवान अब कर दो।
देशभक्ति के ऐश्वर्य से हिंदुस्तान को भर दो।
सारे दिये दीपावली के मशाल बन जाएँ
बन के आग देशभक्ति की हर सीने में जल जाएँ।
हे माँ लक्ष्मी हमें धनवान तुम कर दो।
हर देशभक्त भारतवासी को बलवान तुम कर दो।

दीपाली के शुभ अवसर पर हर शहीद और देशभक्त को नमन !

हर हर महादेव !
भारतमाता की जय !
वन्देमातरम !

Zeal

48 comments:

दीर्घतमा said...

दिब्य जी नमस्ते
इस समय भारत की दशा ब्रिटिश काल जैसी ही है जिस प्रकार उस समय देश भक्तो को राज्य द्रोही करार देकर सजा दी जाती थी ठीक उसी प्रकार बर्तमान समय में एक बिदेशी क्रिश्चियन महिला के ईशारे पर सारे राष्ट्र भक्तो को देश द्रोही और देश द्रोहियों को देश भक्त बताने का होड़ सा लगा हुआ है जब-तक हिन्दू समाज नहीं जगता तब-तक भारत का उद्धार नहीं होने वाला .

Ravi said...

ईश्वर इन भटके सेकुलरों को सदबुद्धि दे|

दीपावली के पावन पर्व पर आपको मित्रों, परिजनों सहित हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ!

way4host
RajputsParinay

Bhushan said...

तीखा आलेख. बहुत प्रबल देश भक्ति की भावना से भरी दीवाली की शुभकामनाएँ.

प्रवीण पाण्डेय said...

सबके मन का अन्धतम मिटे, सबका जीवन सफल हो।

मनोज कुमार said...

प्यार हर दिल में पला करता है,
स्नेह गीतों में ढ़ला करता है,
रोशनी दुनिया को देने के लिए,
दीप हर रंग में जला करता है।
प्रकाशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!!

Atul Shrivastava said...

दीप पर्व की शुभकामनाएं.....

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

दिव्या दीदी
बाबा, अन्ना, भगवा, बेदी पर आरोप लगाना भ्रष्टों के लिए बहुत आसान है|
आपने सही कहा कि अब कृष्ण, राम, विदुर की बारी है|
दुष्टों के राज में धर्म का नहीं अधर्म का पालन होता है|

दीपावली के शुभ अवसर पर आपकी यह प्रस्तुति बहुत अच्छी लगी| ऐसा लगा कि जैसे यह एक नयी शुरुआत है| किसी त्यौहार को मनाने का यह तरीका सबसे उत्तम है| दीपावली के दीपक के साथ साथ देश के लिए एक मशाल का जलना भी आवश्यक है|
अबकी बार से दीपावली ऐसे ही मनाई जाएगी| दीपावली पर शहीदों की स्मृति में भी दीपक जलाए जाएंगे|

आपका आह्वाहन बेहद सार्थक लगा|

वंदेमातरम

आपको व आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं|

ashish said...

सटीक बात , एकदिन हमारे महापुरुषों का भी नंबर आने वाला है . दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये .

आशा said...

दीपावली पर हार्दिक शुभ कामनाएं |
आशा

mridula pradhan said...

bahut achchi hai ye post.....

Man said...

मनमोहन और सारे कांग्रेसी दिग्गी पिगी सभी आकाश से उतरे हुवे फरिश्ते हे ,क्योकि वर्षो से पवित्र खानदान के बर्तन मांजते मांजते ये भी पवित्र हो गये और रास्ट्रपती भी एक मोहतरमा बन गयी |इस खानदान की दरी जाजम जो उठाएगा वो पवित्र हो जायेगा !!!इस खानदान में जितना भी पैसा किसी भी तरीके से आएगा वो भी पवित्र हो जायेगा ??रास्ट्रीय दामाद राबर्ट बढेरा दो कोडी का नट बोल्ट कसने वाला गेराज का मालिक था आज अरबपति हो गया हे "'केसे?कोई पूछता हे क्या ? विपक्ष भी नहीं ?और इन पर जो ऊँगली उठाएंगे उन्हें बदनाम करने में ये वर्ण संकर कोई कसर नहीं छोड़ेंगे |

रचना said...

दिवाली पर तुमको स्नेह आशीष दिव्या , ईश्वर तुमको सपरिवार खुश रखे

Human said...

बहुत अच्छा लेख
आपको और आपके परिवार को दीपावली की मंगल शुभकामनाएँ !

Human said...

बहुत अच्छा लेख
आपको व आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !

G.N.SHAW said...

बहुत ही सुन्दर कविता ! आप को दीवाली
की शुभ दिन पर बहुत -बहुत शुभकामनाएं !

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

शुभ दीपावली,

kase kahun?by kavita verma said...

deepawali ki bahut bahut shubhkamnayen

udaya veer singh said...

मार्मिक प्रसंग ,शुभ चिंतन .... बधाईयाँ जी ,/ मंगलमय दिवाली ,जीवन में बार-2 आये ../

रेखा said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

कुश्वंश said...

दिव्या जी, एक विचारोतेजक चिंतन, और आह्वाहन. दिवाली बुराई पर जीत का खुशियों भरा त्यौहार है जो कण कण में रौशनी बिखेरता है काश ये रौशनी अँधेरे हृदयों को रोशन कर दे,जगमग कर दे यही कामना है यही शुभकामनाये.

मदन शर्मा said...

दिव्या जी शायद आपको नहीं पता ! यु जी सी तथा एन सी ई आर टी की किताबों में आज भी सेकुलर वाद के नाम पे ऐसे तथ्य हीन पाठ्यक्रमों का समावेश है जिसे की बी जे पी के शासन काल में हटा दिया गया था !
आपको तथा आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

आशुतोष की कलम said...

दीपो का ये महापर्व आप के जीवन में अपार खुशियाँ एवं संवृद्धि ले कर आये ...
इश्वर आप के अभीष्ट में आप को सफल बनाये एवं माता लक्ष्मी की कृपादृष्टि आप पर सर्वदा बनी रहे.

शुभकामनाओं सहित ..
आशुतोष नाथ तिवारी

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

दीपावली की शुभकामनाएं॥

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

सुन्दर प्रस्तुति...दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर!
आपको और आपके पूरे परिवार को
दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

A said...

Excellent.

Happy Diwali

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

अभी तो आगे बहुत सारी शुभेच्छाएं रखना बहन ये सब हमें ढाल बन कर काम आएंगी। राष्ट्र और राष्ट्रवाद को फासीवादी सोच कह कर संकुचित करने वाले भी मिलेंगे जिन्हें जवाब देना होगा। मस्जिदें शहीद करने के लिये लाखों लोग एकत्र हो जाते हैं क्यों नहीं उन कई सौ लोगों के घर वाले ही एकत्र होकर जेल पर हमला करके उस राष्ट्रदामाद को मार देते जिसे हमारी जनता द्वारा लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी षंढ सरकार ने पंचसितारा सुविधाओं और सुरक्षा के बीच रखा हुआ है, इसे संविधान द्वारा स्थापित विधि कहते हैं यही है हमारे देश का मौजूदा कानून और जो इसमें बदलाव की बात करे वो धारा १२४-ए के अंतर्गत देशद्रोही करार कर दिया जाएगा।
मुझे प्रतीक्षा है शुभेच्छाओं के फलीभूत होने की\
सस्नेह आशीर्वाद
भइया

ZEAL said...

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श्री D.K.Gaur जी की मेल से प्राप्त टिप्पणी--

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show details 10:02 PM (1 hour ago)


दिव्या बेटी,

आपका लेख पढ़ा| आपके विचार बहुत उत्तम हैं|

सरकार के उच्च पदों पर बैठे महानुभावों, आतंकियों एवं अन्य देशद्रोहियों के कुचक्रों से, अच्छे विचारों से सुसज्जित देशभक्त लोग कभी चिंता नहीं करते हैं|

भगवन श्री कृष्ण ने गीता में भी कहा है की

"जो लाक्षागृह में जलते हैं, वही सूरमा निकलते हैं"



इसलिए इस प्रकार की कुचेष्टाओं से आप और हम चिंतित भी नहीं, अपने कर्म पथ पर आगे बढ़ते रहना ही हम लोगों का काम हैं|

आपके प्रयास प्रशंनीय हैं| आपकी इस जोशीली लेखनी को प्रणाम करता हूँ|

दीपावली के इस पावन प्यौहार पर आपको पढना अच्छा लगा| शहीदों व देशभक्तों के लिए दीपावली मनाने की आपकी पहल की सराहना करता हूँ|

मेरी तरफ से आपको व आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं|

D.K.Gaur...

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JC said...

जो कुछ क्रोध दिव्या जी आप के द्वारा प्रतिबिंबित हो रहा है, वो हमारे ज्ञानी-ध्यानी पूर्वजों के अनुसार अज्ञानवश है!
उनके अनुसार परम ज्ञानी केवल एक ही है अर्थात अमृत शिव, एकमात्र 'परम सत्य' सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में, यद्यपि साकार रूप में उनका जन्म-स्थान काशी अर्थात वाराणसी दर्शाया योगियों ने, यानी माँ गंगा के घाट पर (दसश्वमेध घाट सौर-मंडल की १० चरणों में उत्पत्ति को दर्शाते, अर्थात सांकेतिक भाषा का आम आदमी के हित में दर्शाते) ...
मानव जीवन में इसे संभवतः प्रतिबिंबित करते कबीर द्वारा (?) जो निर्गुण के गुण दर्शा गए अपने गीतों में, उसे अदृश्य "गुरु ज्ञानी" जान, जो गगन-मंडल से झीनी झीनी आवाज़ को सुनता रहता है...
और आज पश्चिमी वैज्ञानिक उस ध्वनि को 'कॉस्मिक हम' कहते हैं... और प्राचीन हिन्दू, सिद्ध पुरुष आदि उसे परम्परानुसार 'ॐ', और पश्चिम देशवासी उसे 'आमीन' कहते आ रहे हैं...
प्राचीनं योगी उस ध्वनि को शांत स्थान पर, एकांत में अपने दांयें कान को बंद कर, सुनने का सुझाव दे गए क्यूंकि उनके अनुसार जो ब्रहमां में बाहर है वो ही (सार के रूप में) मानव शरीर के भीतर भी है... किन्तु वर्तमान कलियुग होने के कारण हमें उस काल का, अर्थात सृष्टि के आरम्भ का, दिशी दिख रहा है, किन्तु अज्ञानता वश हम असत्य को सत्य समझ रहे हैं, अर्थात माया, अथवा योगमाया, के कारण बहिर्मुख होने के कारण दृष्टि भ्रम में उलझ के रह गए प्रतीत होते हैं, यद्यपि मानव शरीर परमात्मा का ही प्रतिरूप है :) इत्यादि, इत्यादि...
जय सृष्टि कर्ता विष्णु (ब्रह्मा-विष्णु-महेश) / / देवी, त्रेयम्बकेश्वरी (काली-सरस्वती-लक्ष्मी !

ZEAL said...

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[Offline] mahendra verma to me

show details 8:02 AM (3 minutes ago)

दिव्या, कमेंट बाक्स काम नहीं कर रहा है, इसलिए मेल कर रहा हूं।

सारे दिये दीपावली के मशाल बन जाएं।
दिव्या, तुम्हारे इस ओजस्वी स्वर में एक स्वर मेरा मिला लो।
शुभ दीपावली !

mahendra

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रविकर said...

शुभकामनायें ||
चर्चित विषय |
बढ़िया विश्लेषण ||
बधाई ||

G Vishwanath said...

दीपवली के अवसर पर हमारी भी शुभकामनाएं।

किरण बेदी से केवल एक छोटी सी भूल हुई है।
अपराध नहीं।
उसे कबूल करने की हिम्मत है उसमें।
उसने कुछ छुपाया नहीं और न ही उससे निजी लाभ हुआ है।

अब जब रकम भी लौटा दी गई है, हमें इस कांड को भूलकर आगे चलना चाहिए।
दिग्विजयजी कहते हैं कि यदि राजा ने भी रकम लौटा दिया, तो उसे रिहा करना चाहिए।
लो! अब तक तो वे मानने के लिए तैयार भी नहीं थे कि राजा ने जो किया वह अपराध था।
कपिल सिब्बल ने बार बार कहा कि सरकार को २जी घोटाले में कोई नुकसान नहीं हुआ है।
मुझे उन दोनों की बातें बेतुकी लगी।

कसब आज भी जिन्दा है और मुझे नहीं लगता उसे कभी फ़ाँसी होगी।
क्या कोई ओंब्ले के बारे में सोचता है?
ओंब्ले?, कौन ओंब्ले?
जी वही जिसने कसब को पकडते अपनी जान दे दी।
हम कब सुधरेंगे?
शुभकामनाएं
जी विश्वनाथ

दिलबाग विर्क said...

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-680:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

सञ्जय झा said...

'doodh ke dhule hue hain' isai liye to "malai ke
ranipal" mangte hain..........

diyali ki aseem subh:kamnayen.....


pranam.

ZEAL said...

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विश्वनाथ जी ,

तुकाराम ओम्ब्ले जी की वीरता और शहादत ही तो कारण बनते हैं भारत देश पर गर्व करने का। नमन है तुकाराम जैसे अमर शहीद पर। ये सरकार की अकर्मण्यता है जिसने तुकाराम जी को भुला दिया और उनके शोक संतप्त परिवार की सुध भी नहीं ली।

इस स्वार्थी सरकार से हम ज्यादा कोई उम्मीद भी नहीं रख सकते। मौकापरस्त है ये। देशभक्तों का सम्मान नहीं करती । दुश्मन मुल्कों से हमारी सुरक्षा नहीं करती। अच्छे लोगों को बदनाम करती है। सिर्फ पैसे, ताकत और सत्ता के मोह में फंसी है ये सरकार।

श्री तुकाराम ओम्ब्ले जी के शौर्य, वीरता, देशभक्ति के जज्बे को नमन। ये वीर ही सही अर्थों में "भारत रत्न" के हक़दार हैं। हमारे देश के अनमोल हीरे हैं ये। इनकी शहादत व्यर्थ नहीं जायेगी। युगों युगों tak yaad rakha जाएगा।

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kshama said...

Bahut hee sashakt aalekh!

Sawai Singh Rajpurohit said...

सुंदर प्रस्‍त‍ुति।



*दीवाली *गोवर्धनपूजा *भाईदूज *बधाइयां ! मंगलकामनाएं !

ईश्वर ; आपको तथा आपके परिवारजनों को ,तथा मित्रों को ढेर सारी खुशियाँ दे.

माता लक्ष्मी , आपको धन-धान्य से खुश रखे .

यही मंगलकामना मैं और मेरा परिवार आपके लिए करता है!!

Rakesh Kumar said...

आज लगभग सभी पार्टियां लगतीं हैं दूध से ही धुल रहीं हैं.
तभी तो सिंथेटिक दूध बाजार में बिक रहा है.

विचारोत्तेजक प्रस्तुति के लिए आभार.

Ramakant Singh said...

बची खुची धुलाई आपने कर डाली है.

मुनेन्द्र सोनी said...

भाईदूज पर भड़ास परिवार के सभी भाईयों बहनों की तरफ से हमारे प्रेम के पुष्पित पल्लवित होते रहने की शुभेच्छा सहित
मुनेन्द्र सोनी

ZEAL said...

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प्रिय भाई मुनीन्द्र एवं मेरे अन्य सभी भाई-बहन (वास्तविक और आभासी दोनों दुनिया के ) --सभी को भाई दूज की ढेरों मंगल कामनाएं। भाई बहन का स्नेह परस्पर पुष्पित और पल्लवित होता रहे।

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ZEAL said...

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सभी जीवों के पाप-पुण्य का लेखा जोखा रखने के लिए , ब्रम्हा जी की काया से भगवान् चित्रगुप्त उत्पन्न हुए । उत्पत्ति के समय इनके हाथ में कलम-दवात थी । ब्रम्हा जी की काया से उत्पन्न होने के कारण चित्रगुप्त जी की सभी संतानें कायस्थ कहलाई ।

श्री चित्रगुप्त जी की जयंती , यम-द्वितीया के दिन मनाते हैं , तथा इसी दिन चित्रगुप्त पूजा या कलम-पूजा करते हैं।

दिवाली के अगले दिन कलम नहीं उठाते हैं , जिसे कलम-शयन कहते हैं। इसलिए दिवाली के अगले दिन सभी शैक्षणिक तथा अन्य संस्थानों में भी अवकाश रहता है । यम द्वितीया के दिन कलम-पूजा के बाद ही कलम का उपयोग करते हैं।

Chitragupt Puja is performed by Kayastha Parivar that believes in world peace, justice, knowledge and literacy, the four primary virtues depicted by the form of Shree Chitraguptjee। The puja is also known as Dawat (Inkpot) Puja, in which the books and pen are worshipped, symbolizing the importance of study in the life of a Kayastha. During the Chitragupt Puja, earning members of the also give account of their earning, writing to Chitragupt Maharaj the additional amount of money that is required to run the household, next year.

चित्रगुप्त जी का भव्य -मंदिर -- कांचीपुरम, तमिलनाडु, खजुराहो तथा उदयपुर राजस्थान में है।

कलम-दवात चित्रगुप्त पूजन की शुभकामनाएं।

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JC said...

I think now one at least the bloggers should do pooja of the PC (personal computer, not P Chidambaram; or even Pen :)

ZEAL said...

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@ JC ji --

Not everyone can understand the significance of pen. It's precious ! It's valuable! ...priceless rather !

As far as PC is concerned , It's life for me and for many others as well. KEYBOARD is the virtual PEN!

We must respect our sanskriti and poja-archana as described and mentioned in our sacred texts.

Happy kalam-dawaat poojan and Chitragupta pooja .

Pen is indeed mightier than sword !

Thanks and regards,

.

JC said...

यद्यपि यह टिप्पणी मैंने डॉक्टर दराल के ब्लॉग पर भी दी है, आपके सेवार्थ भी दे रहा हूँ...

कालीदास बज्र-मूर्ख बढई था, जिस डाल पर बैठा था उसी को काट रहा था,,, तो एक आदमी ने सावधान करते चेतावनी दी कि वो गिर जायेगा!

फिर भी वो नासमझ डाल काटता चला गया और गिरने के बाद ही उस साधारण व्यक्ति को परम ज्ञानी मान लिया!

कहा जाता है कि कुछ लोग उसे उस समय की एक अत्यंत विदुषी किन्तु घमंडी मानी जाने वाली राजकुमारी के सम्मुख ले गए जो कुंवारी थी और उस का कहना था वो अपने से ज्ञानी व्यक्ति से ही विवाह करेगी!

राजकुमारी ने उसे एक अंगुली दिखाई (अर्थात भगवान् एक ही निराकार है) तो कालीदास ने समझा कि वो कह रही है वो उसकी एक आँख फोड़ देगी! इस कारण उसें यह बताने हेतु कि वो एक फोड़ेगी तो वो उसकी दोनों आँखें फोड़ देगा, उसने दो अंगुलियाँ दिखाईं! राजकुमारी बहुत प्रभावित हुई क्यूंकि उसने इसका यह अर्थ निकाला कि वो द्वैतवाद में विश्वास करता है!

वो तो विवाह के पश्चात ही सत्य का पता चला! राजकुमारी द्वारा उसे बाहर कर देने के पश्चात ही उसकी मन की आँख कुछ हद तक खुल गयी और अपमान के बदले की भावना से उसने ज्ञानोपार्जन कर प्रसिद्धि प्राप्त की :)

'महाभारत' का पात्र ध्रितराष्ट्र जन्म से अंधा था, और उसकी धर्मपत्नी, सती गांधारी, उसकी पृष्ठभूमि के कारण, कुरु वंश के शत्रु राजा की बेटी होने के कारण, यद्यपि १०० पुत्रों की माँ तो बनी किन्तु वो बाहरी संसार से जुडी नहीं थी, इस कारण उसको आँखों में पट्टी बांधे दर्शाया जाता है... यद्यपि मान्यता यह है कि वो अपनी आतंरिक, आध्यात्मिक शक्ति द्वारा अपने ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन के शरीर को भी अनंत, अमृत करने की क्षमता रखती थी, किन्तु दुर्योधन ही उसके सामने निर्वस्त्र आने में शर्म कर गया और इस प्रकार - परम ज्ञानी 'कृष्ण' के संकेत पर - भीम द्वारा पेट के नीचे गदा मारे जाने से उसकी ईहलीला समाप्त हो गयी :)

प्राचीन हिन्दू जो बाहरी आँख से नहीं दीखता और केवल मन कि आँख से ही प्रकाशमान हो सकता है, उसे ही खोजना अपने जन्म का उद्देश्य मानते थे, किन्तु वर्तमान के 'ज्ञानी' भी इसे 'टाइम पास' ही करना मानते हैं :) ...

भाई दूज की अनेक शुभ कामनाओं और आशीर्वाद सहित,
जेसी

DUSK-DRIZZLE said...

IT IS A BIG QUESTION - WHO IS NOT CORRUPT? WHO IS REAL HINDU ? DOES BJP DISTRIBUTE THE AGENCY OF HINDUSM ? IN FACT TIME HAS COME FOR THE HINDU.

Jyoti Mishra said...

corruption running in our veins n imbibed deep in bones... aptly written.
Loved the sarcasm presented !!

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

ishwar aisa hi kare.
shaheedon ko koti-koti naman.