Sunday, October 30, 2011

हमारा तिरंगा




जो गलती कपिल सिब्बल जी ने की , उसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। भारत की शान , हमारी पहचान हमारा राष्ट्रीय ध्वज है। इसमें सबसे ऊपर गहरा केसरिया रंग, फिर सफ़ेद और सबसे नीचे हरे रंग की पट्टी होती है। ध्वज के मध्य में सफ़ेद पट्टी पर २४ तीलियों वाला अशोक चक्र नेवी-ब्लू रंग में बना होता है। ध्वज का अनुपात : है।

किसी भी अवस्था में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान होने पाये इस बात का ध्यान बना रहना चाहिए।

समय-समय पर लोगों की अज्ञानता के फलस्वरूप हमारे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान होता रहा है , जो अक्षम्य है।

कभी सानिया मिर्ज़ा द्वारा ध्वज के सामने अपने जूतों को रखने द्वारा , कभी काश्मीर के विद्रोहियों द्वारा ध्वज को जलाकर तो कभी सत्ता में बैठ कपिल सिब्बल द्वारा अपनी मेज पर ध्वज को उल्टा लगाये जाने द्वारा।

अक्षम्य हैं ऐसी भूलें।

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JALANDHAR: Bharat Gaurav, an organization led by BJP leader Vijay Sampla, has lodged a complaint with police here against Union HRD minister Kapil Sibal, accusing him of showing "disrespect" to national flag three months ago.

In his complaint, Sampla said that a photograph of Sibal and minister of education of Republic of Mozambique, Zeferino Aledandre, signing an MoU in New Delhi on July 13, which had been put on a website, was brought to his notice where the national flag of India was placed upside down on the table in front of the minister.

"The national flag of India was in reverse order with its green colour on the upper side," the complaint submitted in the Basti Bawa Khel police station said.

Asked why he was filing the complaint three months after the incident, Sampla said he chanced upon the photograph only recently।

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43 comments:

पत्रकार-अख्तर खान "अकेला" said...

raashtrvaad ki jankari ke liyen shukriya ..akhtar khan akela kota rajsthan

अरूण साथी said...

जय हिन्द

udaya veer singh said...

वस्तुतः ध्वज किसी राष्ट्र का प्रतिनिधि होता है ,आवश्यक है ध्वज-वाहक कैसा है ? जिनको अपना रोजगार प्राथमिक है ,वे क्या जाने देश प्रेम .और मर्यादा , आजादी उन्हें खैरात में मिली जो है . .....बहुत अच्छा प्रसंग उठाया है जी . शाबासी आपको .... शुक्रिया /

Ratan Singh Shekhawat said...

सही लिखा आपने ! जिन्हें राष्ट्रध्वज की मान मर्यादा का भान नहीं वे राष्ट्र ध्वज के सामने आने के लायक भी नहीं|

ब्लॉग कमाने में कितना सहायक ? अनुभव और उदाहरण ~ ज्ञान दर्पण

Sunil Kumar said...

शान तिरंगे की कम ना होने पाए ........

DUSK-DRIZZLE said...

SAHI LIKHA HAI APNE HOW DARE TO WRITE SUCH A TOWERING ISSUE ?

Vivek Rastogi said...

इसके लिये कड़ा कानून होना चाहिये, या फ़िर हमें बिल्कुल फ़्लेक्सिबल होना चाहिये ।

प्रवीण पाण्डेय said...

झण्डा ऊँचा रहे हमारा।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 31-10-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

mahendra verma said...

सरकारी कार्यालयों में भी यदा-कदा राष्ट्रीय ध्वज को उल्टा फहराए जाने की खबरें सुनाई देती हैं।
ऐसा करने वालों पर उचित कार्यवाही होनी चाहिए।

वन्दना said...

सही कहा।

mridula pradhan said...

main to khud kitni jagah jakar jhande ko sunset se pahle utarna hai yah batati hoon.....kabhi bhi jhande ka apman nahin hona chahiye.

Kajal Kumar said...

हमारे यहां तिरंगा घर की मुर्गी का सा है, कोई नहीं सिखाता झंडे का आदर करना संस्कारों की तरह

Er. Diwas Dinesh Gaur said...

दिव्या दीदी
सिब्बल का भी वही हाल होना चाहिए जो प्रशांत भूषण का हुआ है| इतने बड़े राजनैतिक पद पर बैठने के बाद भी यदि व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का बोध न हो तो उसके लिए कठोरतम दंड का प्रावधान होना चाहिए|
समय-समय पर हमारे ही देश के नेताओं के द्वारा तिरंगे का अपमान हुआ है| एक बार श्रीमान लालू यादव व उसकी सहोदरा श्रीमती राबड़ी देवी ने भी ऐसी ही घिनोनी हरकत की थी| २६ जनवरी की परेड के समय जब ध्वजा रोहण हो रहा था तब ये दोनों अपने जगह से खड़े भी नहीं हुए| कारण बताया की कमर में दर्द था| मतलब जो देश की सीमाओं पर अपनी जान दे रहे हैं वे तो मुर्ख होंगे| नेता तो कमर दर्द का भी बहाना बना देते है जबकि हमारे जवानों को जान देने पर भी वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे अधिकारी हैं| याद होगा शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के साथ क्या हुआ था?
बाबा रामदेव यदि कालेधन के विरुद्ध जनांदोलन खडा करें तो ठग और ये नेता तिरंगे का अपमान करें तो इन्हें कौनसी संज्ञा दी जाए?

ऐसे कमज़ोर नेताओं न तो कुर्सी पर बने रहने का अधिकार है, बल्कि इनके लिए कठोर से कठोर दंड सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि आगे से कोई ऐसी घिनोनी हरकत न कर सके|

वंदेमातरम

कुश्वंश said...

जय हिंद दिव्या जी , भारतवर्ष की शान तिरंगे का अपमान किसी भी सूरत में क्षमा करने योग्य अपराध नहीं है और भारतीय संविधान के अनुसार अपमान करने वाले को सजा मिलनी चाहिए.एक गरिमामयी पोस्ट के लिए धन्यवाद.

ashish said...

अजी राष्ट्र ध्वज के बहुत सारे उपयोग सुने है मैंने , जैसे अधोवस्त्र बनवा लेना . अब ऐसे गधो को राष्ट्र ध्वज के सम्मान के लिए मजबूर करने का कानून को तोड़ने में मज़ा जो आता है .

Anupam karn said...

बेहद शर्मनाक वाकया
इससे उनकी देशभक्ति का सीधा पता चलता है|

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

राष्ट्र ध्वज के संदर्भ में किसी भी प्रकार की चूक क्षम्य नहीं होनी चाहिये.

kshama said...

Sahee kaha...ye bhoolen akshamy hain!

G.N.SHAW said...

राष्ट्रिय ध्वज की सर्वोपरि इज्जत और मान होनी ही चाहिए ! सुन्दर ! मेरे ब्लॉग का अब नया लिंक -
बालाजी के लिए --www.gorakhnathbalaji.blogspot.com

Rakesh Kumar said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.
देश प्रेम की भावना को नमन.

अनुपमा पाठक said...

जय हिंद!

मुनेन्द्र सोनी said...

दिव्या बहन आप सही कह रही हैं। मैं सोचता हूँ कि कपिल सिब्बल ने राष्ट्रध्वज का जो अपमान करा है उसके दंडस्वरूप उसे भी सुबह से शाम तक उल्टा लटकाया जाना चाहिये ताकि आइंदा ऐसा न हो, सबसे पहले वो ध्वज ही देखे कि सीधा है या उल्टा

boletobindas said...

दिव्या जी
राष्ट्रध्वज फहराने में इस तरह की गलती के लिए सिर्फ सिब्बल को जिम्मेदार ठहराने से कुछ नहीं होगा। शर्म की बात तो ये है कि जिसने इस झंडे को रखा, उसके बाद सिब्बल से पहले कई लोग मौजूद रहे होंगे वहां..क्या सब के सब अंधे थे...इसपर तो सिब्बल समेत वहां मौजूद हर किसी पर सामूहिक दंड का प्रावधान होना चाहिए.....

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सही कहा आपने...
जयहिंद.

अशोक कुमार शुक्ला said...

ने बड़े राजनैितक पद पर बैठने के बाद भी यद य को अपने कतय का बोध न हो तो उसके िलए कठोरतम दंड का ावधान होना चाहए|

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

@ boletobindas
भाईसाहब यदि आपके कार्यालय का चपरासी कोई गलती कर देता है तो उसके लिये आप परेशान हो जाते हैं क्योंकि आप कार्यालय के प्रति फ़िक्रमंद होते हैं, लापरवाह आदमी अधिकारी बनने की योग्यता नहीं रखता है। साफ़ बात है कि कपिल सिब्बल ने खुद अपने हाथ से अपनी कुर्सी नहीं पोंछी होगी न ही सभी प्रपत्र टाइप करे होगे जिन पर ये हस्ताक्षर कर रहा है उस चित्र में जहाँ से यह विषय उठा है तो क्या ये बड़ी-बड़ी आँख वाला अंधा सब बिना देखे ही कर रहा है आप ऐसा मानते हैं। कनिष्ठ कर्मचारी जैसे कि कार्यालय का चपरासी एक बार ऐसी गलती कर दे तो उसके लिये उसे कम दंड दिया जा सकता है लेकिन उच्च पद पर आसीन व्यक्ति उस गलती को अनदेखा करके गम्भीर अपराध कर रहा है जो कि किसी हाल में क्षम्य नहीं है। जरा सोचिये कि दूसरे देश का राजदूत क्या विचार लेकर गया होगा हमारे देश के बारे में? मुनेन्द्र सही कह रहे हैं कि इसे दिन भर झंडे के डंडे के साथ बांध कर उल्टा लटकाया जाना चाहिये ताकि दोबारा कोई इस गलती को न दोहराए। एक बात और कि हमारे देश के जिम्मेदार मीडिया को इस कपिल सिब्बल से इस विषय पर कैमरे के सामने बुलाकर देश से माफ़ी मंगवाने का कार्य करना चाहिये तो मीडिया ने अब तक इस विषय पर चूं चूं चुप्पी साध रखी है बस हम जैसे लोग ही चिल्ल पौं कर रहे हैं। इसके कार्यालय का नंबर मिले तो मैं ही सीधे बात करता हूँ और आप लोगों को भी नंबर दे दूँगा ताकि आप सब भी इसे रगेद सकें ये हम सब देशवासियों के प्रति जवाबदेह है इसका अपराध अक्षम्य है।
जय जय भड़ास

मनोज कुमार said...

बहुत ही शर्मनाक स्थिति है।

Atul Shrivastava said...

बढिया प्रस्‍तुति।
आभार।

सदा said...

बिल्‍कुल सही कहा है आपने ...सार्थक व सटीक लेखन ।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

कपिल सिब्बल जैसे नेता से और क्या उम्मीद की जा सकती है ? धूर्तता और कुटिलता की प्रतिमूर्ति यह व्यक्ति अब तक बेशर्मी की सारी सीमाएँ लांघ चुका है | बाबा रामदेव का प्रकरण हो या अन्ना का , इसका असली रूप जनता देख चुकी है | हिन्दुस्तान को शर्मसार करने वाले इस तथाकथित नेता ने कभी तिरंगे को ठीक से देखा भी नहीं होगा अपनी मेज पर , चपरासी ने जैसा लगा दिया लगा रहा |
शर्म आती है ऐसे व्यक्ति को नेता कहते ....

Kailash C Sharma said...

बहुत सच कहा है...

Human said...

बेहतर प्रस्तुति !

दर्शन कौर said...

sahi kaha ....rashtra dhavaj hamari pahchan hei .

Bikramjit Singh Mann said...

the so called leaders are the worst who do so much disrespect to our national flag and even the person who has filed a complaint he probably has done it a lot too ...

Thanks for bringing to attention

Bikram's

Vaanbhatt said...

काफी दिनों से ब्लॉग से दूर रहा...पर आपक़े लेखों से लग रहा है...तल्खी बढ़ती जा रही है...जिस भूल को अक्षम्य मान रहीं हैं...उसकी सजा किसी चपरासी को मिलेगी...इस देश में पहले ही मान लिया गया है...समरथ को नहीं दोष गोसाईं...आक्रोश को कुछ कम कीजिये...ये आपकी स्टाइल नहीं थी...

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

कभी कभी ऐसी गलती अनजाने में हो जाती है जिसे सुधारा भी जाना चाहिए लेकिन झंडे को जलाना या जानबूझ कर अपमानित करना निश्चय ही राष्ट्रद्रोह माना जाना चाहिए और अपराधी को राष्ट्रद्रोह की सज़ा देनी चाहिए॥

ZEAL said...

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आलेख में जोड़ी गयी तस्वीर पर एक नज़र डालिए। -- धन्यवाद !

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SAJAN.AAWARA said...

tirnge ke liye hi ham seva kar rahe hain, or agar isi ka apnan karenge to laz ani chahiye......thu thu thu hai sibal par des ke neta hote huye bhi tirange ka apmaan kiya hai...

jai hind jai bharat

Rajesh Kumari said...

jisme desh bhakti hogi vahi raashtr dhvaj ka samman karega.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

शायद आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर भी हो!
सूचनार्थ!

प्रतुल वशिष्ठ said...

कपिल की अवचेतन में दबी इच्छा परिलक्षित होती है इससे....

Anonymous said...

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