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Monday, February 6, 2012

तलाक तलाक तलाक --ये क्या मज़ाक है ?

मुस्लिमों में जागरूकता आते देखकर ख़ुशी हो रही है। अब इस्लाम में क्रान्ति रही है। मुस्लिम बहनों ने तीन बार तलाक कह देने मात्र से तलाक हो जाने सम्बन्धी नियम के खिलाफ आवाज़ उठायी है। असग़र अली इंजिनियर ने भारतीय मुस्लिम महिला आन्दोलन का समर्थन करते हुए इस नियम को बदलने की आवश्यकता पर बल दिया है। मुंबई के 'इंस्टिट्यूट ऑफ़ इस्लामिक स्टडीज़' के 'क़ुतुब जहान किदवई' का कहना है की इस वाहियात नियम को ख़तम किया जाना चाहिए और इस्लाम में polygamy की प्रथा पर बैन लगना चाहिए।

केरल के रिटायर्ड जज श्री शमसुद्दीन ने कहा की कुरआन की आयातों में एक ही विवाह करने की बात स्पष्ट रूप से लिखी है। केरल में अब निकाह-रजिस्ट्रार नियुक्त किये जायेंगे जो निकाहनामों का पूरा लेखा-जोखा रखेंगे।

देखें यह ड्राफ्ट कब पास होता है और मुस्लिम बहनों के साथ अत्याचार कब बंद हो पाता है।

Thursday, July 28, 2011

क्या स्त्रियों की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ते तलाक का कारण है ?

कई बार सुनने को मिलता है की स्त्रियों की आर्थिक स्वतंत्रता घरों को तोड़ रही है आखिर कैसे ? यदि पुरुषों की आर्थिक स्वतंत्रता घरों को नहीं तोड़ रही तो स्त्रियों की आर्थिक स्वतंत्रता परिवारों को कैसे तोड़ सकती है भला ?

मैंने तो आज तक यही देखा और सुना है की स्त्री परिवारों को सदैव जोडती है और रिश्तों को बनाए रखने में अहम् भूमिका निभाती है फिर वह परिवारों के टूटने का सबब कैसे हो सकती है ?

  • स्त्रियाँ यदि नौकरी करती हैं तो पति आर्थिक जिम्मेदारियों को भी साझा करती हैं , जिससे पति पर अनावश्यक बोझ नहीं रहता ।
  • नौकरी करने वाली स्त्रियाँ घर से बाहर निकलती हैं , जिससे उनमें आत्म-विश्वास की वृद्धि होती है । वे घर के काम काज के अतिरिक्त अन्य बहुत से कार्यालय सम्बन्धी कार्यों और बारीकियों को समझने लगती हैं , जिससे वे पति की अन्य बाहरी जिम्मेदारियों का भी सहजता से वहां कर लेती हैं ।
  • सुन्दर पत्नी किस पति को नहीं अच्छी लगती । नौकरी करने वाली स्त्रियाँ स्वयं तो maintained और आकर्षक रखती हैं , अन्यथा वे अपनी परवाह कम करती हैं ।
  • बाहर निकलने से उनका exposure बढ़ता है तथा बाहर की दुनिया की समझ बढती है ! इससे उनमें जागरूकता आती है , और आत्म-विश्वास की वृद्धि होती है । जो परिवार में एक स्वस्थ्य वातावरण को उपस्थित करता है।
  • स्त्री पुरुष में समानता आती है और आपसी द्वेष ख़तम होते हैं । कुंठा मिटती है और एक-दुसरे के लिए परस्पर सम्मान बढ़ता है ।
  • वह खुश रहती है ! उसे अपनी शिक्षा और जीवन दोनों सफल लगने लगते हैं । मन की ख़ुशी उसे परवार के ज्यादा करीब लाते हैं । बच्चे एवं पति उस पर गर्व करते हैं ।
  • उसकी भी तरक्की होती है । Promotion मिलता है । उसके कार्यों की सराहना होती है जो उसके self esteem को बढ़ाता है । उसे अपनी सम्पूर्णता का एहसास होता है। पति के साथ वह भी अपनी उपलब्धियों को साझा करती है ! दोनों की आपसी ख़ुशी बढती है ! समाज को भी अधिक योगदानकर्ता मिलते हैं ।
  • पति का अपनी पत्नी की योग्यता पर विश्वास बढ़ता है । पत्नी के लिए ह्रदय में प्यार तो पहले से रहता है , अब सम्मान भी बढ़ जाता है , अन्यथा घर की खेती साग बराबर ही रहती है ।
  • पति अपनी पत्नी को बेहतर understand करता है । उसके वर्क-लोड को कम करने के लिए घरेलु कामों में भी उसकी सहायता करता है । दोनों सच्चे अर्थों में एक दुसरे के जीवन साथी बन जाते हैं ।
  • इसके अतिरिक्त यदि एक गृहणी को उसका पति आर्थिक स्वतंत्रता देता है , तो वह कुंठाग्रस्त नहीं रहती , प्रसन्नचित्त रहती हैपति उसका ध्यान रखता है , इस बात से अभिभूत रहती है और दूरियां घटती हैं

आजकल तो पुरुष स्वयं ही अपने लिए समकक्ष योग्यता और नौकरी करने वाली पत्नी चाहते हैं , जो सही अर्थों में उनके दुःख सुख की भागीदार बने पति गर्व के साथ अपनी पत्नी की उपलब्धियों की चर्चा अपने मित्रों से करता है। ऐसे बहुत से लोगों को जानती हूँ जहाँ पति- पत्नी दोनों आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर हैं और परिवार में खुशहाली है। मेरी समझ से परिवारों का टूटना , झूठे दंभ , दहेज़ प्रथा , लालच, अज्ञानता और रूढ़िवादिता के कारण होता है आर्थिक स्वतंत्रता के कारण नहीं।

फिर भी पाठकों से निवेदन है मेरा भ्रम दूर करें !

Zeal