कुछ लोग अंतरजाल पर हुयी तरक्की को नकारात्मक मानते हैं ! विज्ञान की इतनी
बड़ी देन को वरदान न मानकर उसका अपमान करते हैं ! लोगों का कहना है की
अंतरजाल और फेसबुक का उपयोग करने वाले संवादहीनता रखने लगते हैं ! इसे बड़ी
भ्रान्ति और क्या हो सकती है भला?
- टेक्नोलोजी और इंटरनेट के उपयोग से पिछले एक दशक में समाज में हर क्षेत्र में क्रान्ति की लहर दौड़ गयी है
- कविता कहानी लिखने वालों को एक मंच मिल गया है
- लोगों का संपर्क संसाधन बढ़ा है , अपने स्वभाव और रूचि के अनुरूप मित्र एवं संपर्क बनते हैं
- एक नयी और इमानदार मीडिया का इजाद हुआ है !
- आम आदमी की आवाज़ बुलंद हुयी है !
- फेसबुक ने तो लडखडाते लोकतंत्र को ही थाम रखा है !
- कहीं भी कोई अनियमितता हुयी नहीं कि जंगल में आग की तरह फेसबुक पर जनता की आवाज़ बुलंद हो जाती है !
- सत्ताधारी तानाशाह भी डर-डर कर थोडा अनुशासन में रहने को बाध्य हुए हैं !
- गृहणियों की भी आवाज़ मुखर हुयी है , व्यर्थ प्रपंच से बेहतर उन्होंने लिखना समझा
- लेखकों में ज्ञान और विश्वास बढ़ा !
- जानकारियों से ओत-प्रोत इस अंतरजाल ने लोगों का बौद्धिक स्तर ऊपर किया है !
- लोगों के व्यक्तित्व का विकास हुआ है !
- हमारा सामान्य ज्ञान समृद्ध हुआ है !
अतः निवेदन है व्यर्थ ही अंतरजाल के उपयोग , ब्लौगिंग और फेसबुक अपडेट्स को बदनाम मत कीजिये !
मैं तो टेक्नोलोजी के इस अद्भुत वरदान के लिए स्वयं को बहुत भाग्यशाली समझती हूँ ! शुक्रगुजार हूँ कि मैं इस सुविधा का उपयोग कर रही हूँ!
Zeal