बादल में यूँ छुप-छुप के , जुल्फों की परी आई ।
भीगे हुए लबों पर , है मुस्कान थरथराई।
तुम दूर क्यूँ बैठे हो , तुम कुछ तो पिया बोलो
तुम लब को कहो बोलें , और राज दिल के खोलें।
बादल में यूँ ........
काली लटों से अपनी , तुम कह दो दूर रहना ,
मैं छू लूँ तेरे नैना, मुश्किल है अब ये सहना।
काली घनेरी नागिन , ये जुल्फें हैं सौदाई ,
कहो दूर रहे तुमसे , यूँ बीच में न आये ।
मैं चाहूँ तुम्हें इतना , उड़-उड़ के ये सताएं।
बादल में यूँ.........
चलो जाओ बलम झूठे , यूँ मुझको न भरमाओ ,
है लब पे तेरे मुरली , अब और ना तरसाओ ।
दोषी नहीं हैं जुल्फें , तुम खुद ही दूर रहते
बातें, बनाते हो तुम , और देते हो तन्हाई।
ना बोलूंगी अब तुमसे , है मैंने कसम खाई।
बादल में यूँ ......
जा जा रे हसीं जुल्फों , तुम इतना ना इतराओ
लेकर घनेरे गेसू , तुम इतना ना लहराओ
तुम बाँधो इन जुल्फों को , सौतन को अब हटाओ।
तुम पास मेरे आओ , तुम मुझ में समा जाओ ।
बादल में यूँ छुप-छुप के , जुल्फों की परी आयी.....
दिव्या।