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Monday, April 18, 2011

थाईलैंड की होली (सोंगक्रान)-songkran

थाई होली (songkran) खेलते हुए यहाँ के निवासी








cruise में खड़े मास्टर सुयश



"View point" नामक खूबसूरत स्थल , जहाँ से कोचांग के चारों island देखे जा सकते हैं।









समुद्र किनारे , तन्हा-तन्हा। ( मेरा प्रिय शगल)





resort का एक दृश्य । जिस पुल से गुज़र कर Restaurant तक पहुँचते हैं।


समुद्र में snorkeling करते हुए सेनानी ।


snorkel पहने हुए । आँख तथा नाक पूर्णतया सील हो जाती है । पानी अन्दर नहीं जा सकता। होकी जैसा pipe मुह के अन्दर रखते हैं तथा मुख से ही सांस लेते हैं । इसे पहनकर आराम से पानी के अन्दर जा सकते हैं । पानी में बहुत सुन्दर दृश्य दिखे जैसा हम टीवी पर देखते हैं।


वाटर फौल -- दो शिला खण्डों के मध्य जो सफ़ेद रेखा दिख रही है । इसे देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। यहाँ सेनानियों ने जमकर Swimming की। मैं आलसी की तरह बैठी हूँ।





होली खेलते थाईलैंड निवासी , यहाँ "pick up" नामक ट्राली टाइप गाडी में सवार होकर , टबों में पानी रखकर होली खेलते हैं। पानी में बरफ होता है। तथा खुशबूदार भी होता है। यदि आप सड़क पर हैं तो आपको तर-बतर कर देंगे। यदि कार में हैं तो आपकी कार पर बहुत सा पानी डालेंगे। नाचते-गाते मस्ती करते हुए songkran (होली) मनाते हुए।
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सवादी-खा (नमस्ते)

थाईलैंड में भी भारत की तरह होली होती है जिसे सोंगक्रान (songkran) के नाम से जानते हैं। यह शब्द संस्कृत के 'संक्रांति' से आया है। जिसका अर्थ है 'गति' अथवा 'बदलाव' । इस समय सूर्य अपनी गति के कारण मेष राशि में प्रवेश करता है। सोंग्क्रान १३, १४, १५ अप्रैल को मनाते हैं लेकिन उत्तर थाईलैंड में यह त्यौहार एक सप्ताह तक मनाया जाता है। यह त्यौहार यहाँ पर भारत से ही प्रचलन में आया है।

भारत के वैशाख पर्व की तरह यहाँ भी 'नए वर्ष' को मनाते हैं। इस अवसर पर बड़ों को , पड़ोसियों को , मित्रों को , तथा बौद्ध भिक्षुओं को आदर सम्मान देते हैं। अच्छी फसल और वर्षा के लिए प्रार्थना करते हैं तथा घरों की सफाई करते हैं। सड़क पर hose pipe तथा पिचकारियों से बरफ के ठन्डे पानी की होली खेलते हैं ।

इस अवसर पर थाईलैंड में , देश-विदेश से बहुत बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। हम लोगों ने 'सोंगक्रान' , थाईलैंड के , 'Koh-Chang' नामक एक खूबसूरत Island पर मनाया। जो Bangkok से तकरीबन १००० km दूर है। यादगार के लिए कुछ तसवीरें संलग्न है।

ज़िन्दगी में पहली बार समुद्र की गहराइयों में पहुंचकर गोताखोरी , snorkeling का आनंद लिया। अद्भुत दृश्य थे। स्वर्गिक अनुभव।

खपून खा (आभार)......

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Tuesday, March 15, 2011

पुरुष फ्लर्ट होते हैं -- बुरा न मानो होली है .


अब इसमें नाराज़ होने जैसी क्या बात है। एक अहम् विषय है , सोचा इस पर भी विमर्श हो ही जाए। और फिर होली से बेहतर कौन सा मौसम होगा इस विषय-विशेष की चर्चा के लिए ? भूल-चूक सब लेनी-देनी , बुरा मानो होली है।

कल राधिका आई रोती-रोती , कहने लगी - " ये पुरुष भी , सब फ्लर्ट होते हैं। प्यार का अर्थ समझते नहीं , बस भोली-भाली लड़कियों को मीठी-मीठी बातों से झांसा देते रहते हैं " कहकर पुनः रोने लगी

अब मेरे जैसी पाषाण-हृदया सहेली है उसकी मुझे उसी पर गुस्सा रहा था मैंने कहा- "जरूर तुमने जरूरत से ज्यादा , ढील दे रखी होगी , तभी तो उसने ऊँगली पकड़कर पहुंचा पकड़ लिया , क्या जरूरत थी तुम्हें उसके झांसे में आने की ?"........ मेरा इतना कहना की वो मुझ पर ही बिगड़ पड़ी , कहने लगी - " दिव्या , तुम बहुत कठोर हो , समझने की कोशिश तक नहीं कर रही हो , ऐसे प्रवचन दे रही हो जैसे किसी ने कभी तुम्हारे साथ फ्लर्ट ही किया हो "

अब मैं क्या कहती , मुझसे तो आजतक कोई 'मनचला' टकराया ही नहीं , या फिर मेरी शकल का कसूर होगा की मुझे देखते ही उनकी 'आशिक मिजाजी' कपूर हो जाती होगी। फिर २२ वर्ष की बाली उमर में एक समर्पित पत्नी बनने के बाद 'फ्लर्ट' करने के सारे मार्ग अवरुद्ध हो गए

खैर जो भी हो , एक दो हादसे बयान कर रही हूँ , फिर आप ही तय करियेगा की स्त्रियाँ फ्लर्ट होती हैं अथवा पुरुष?

एक बार BHU के मेडिकल और इन्जिनीरिंग के छात्र-छात्राएं , बनारस से ६४ किलोमीटर दूर 'मिर्जापुर' में 'विन्द्हम फॉल्स' पिकनिक के लिए गए। तकरीबन ६० लोगों के इस समूह में चर्चा शुरू हो गयी विषय था 'प्रेम में सच्चाई का प्रतिशत' सभी लड़के ये आक्षेप लगा रहे थे की "लड़कियां प्रेम करना ही नहीं जानती , कब दिल तोड़कर चल देती हैं , पता ही नहीं चलता".... और लड़कियों का ये कहना था की "पुरुष तो दिल को खिलौना समझते हैं , जज्बातों से खेलते हैं "

थोडा अंतर्मुखी और नीरस प्रकृति की होने के कारण मैं संवाद में शामिल नहीं थी , लेकिन मित्रों ने जबरदस्ती खींच लिया और पूछा , दिव्या तुम्हारी क्या राय है इस विषय पर ? .....घनघोर युद्ध छिड़ा हुआ था Girls versus Boys सोचा क्या जवाब दूं मैंने कहा - कोई वैज्ञानिक प्रमाण तो है नहीं , इसलिए अपनी मित्र मंडली के पुरुष वर्ग से एक प्रश्न पूछूंगी और उनके उत्तर के आधार पर ही अपनी राय बनाउंगी मैंने जब उनसे पूछा की -" देखो तुम लोग मेरे मित्र हो , बताओ तुम लोग मुझसे ज्यादा प्यार करते हो या मैं ? तीनों ने एक सुर में जवाब दिया - " दिव्या तुम ज्यादा करती हो " .....मेरी सहेलियों ने शोर मचाया - " देखा दिव्या, ये दुष्टात्मा सिर्फ झांसे देते हैं , प्यार तो हम लडकियां ही करती हैं अब ये सिद्ध भी हो गया"

फिर शादी हुयी तो मुझे मस्ती सूझी , एक दिन पति से पूछा - " बताइए आप मुझे ज्यादा प्यार करते हैं , या फिर मैं आपको ?"....तुरंत बोले - " तुम मुझे प्यार ही कहाँ करती हो , मैं अकेले ही करता हूँ One way है one way love !!.........इनकी सुनिए !...इतनी शिद्दत से घर-परिवार का ध्यान रखती हूँ और पति महोदय हैं की शिकायत कर रहे हैं पत्नियों के प्यार की कोई कद्र ही नहीं ... वाह री किस्मत !

वैसे मेरे विचार से राधिका सही ही कह रही है ...पुरुष के प्रेम में सच्चाई का प्रतिशत कुछ कम ही होता है ...थोड़ी सी बनावट ...थोड़ी सी मिलावट ....बोले तो --फ्लर्ट होते हैं !!!

' अरेय्य्य्यय्यय्य्य ......बुरा मानो होली है ...

होली आई रे कन्हाई , रंग बरसे , सुना दे ज़रा बांसुरी ....

वैसे इस विषय पर ब्लॉगर मित्रों की क्या राय और अनुभव हैं ? .....कृपया सच ही बोलियेगा , सच के सिवा कुछ मत बोलियेगा

आभार