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Saturday, March 17, 2012

कश्मीर में हिन्दुओं की दुर्दशा ..


सन 1989 का इतिहास भी आप अवश् पढ़ें जब राजीब गाँधी के कारण कश्मीर में 400000 कश्मीरी पंडितों को लूट पीट कर कश्मी की घाटी से भगा दिया गया था और हजारों हिन्दू लड़कियों और महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था। कश्मीरी महिला लाजो भाटिया ने कहा कि मुस्लिम आतंकवादी बहुत से लड़कियों के मां-बाप को लकड़ी के खंभे में बांधकर उनके सामने ही बलात्कार किया। बहुत से मां बाप का वहीं हृदयगति रूकने के कारण मर गये कितने पागल हो गये, फिर उन लड़कियों को बोटी बोटी काटकर दरिया में फेंक दिया .

(saabhaar- Akhil Bharat Hindu Mahasabha)

Zeal

Tuesday, February 7, 2012

कशमीर मुद्दा

पाकिस्तानी प्राधानमंत्री का कहना है की २१वि शताब्दी में युद्ध कोई विकल्प नहीं है, अतः वे काश्मीर मुद्दे का हल बात-चीत तथा बुद्धिमानी से निकालेंगेसमस्त देशभक्त-भारतीयों की तरफ से मेरा यह कहना है की काश्मीर कोई मुद्दा ही नहीं जिसका वे हल तलाश रहे हैंकाश्मीर हमारा था, हमारा है , हमारा ही रहेगाविदेशी कृपया दूर रहे हमारे काश्मीर सेउस पर अपनी गिद्ध दृष्टि रखें

Tuesday, January 25, 2011

ये तिरंगा उम्र भर कश्मीर पर लहराएगा ..



महाकवि कालिदास के शब्दों में , " स्वर्ग से भी सुन्दर यदि कोई जगह है तो वो कश्मीर है " सुन्दर झीलों , झरनों और वादियों की अनुपम भूमि काश्मीर , सुख , शान्ति एवं आनंद को देने वाली है पृथ्वी पर सबसे खूबसूरत स्थल आज दो देशों के मध्य विवाद की हड्डी बना , सिसक रहा है
भारत और पाकिस्तान के मध्य राजनीति का खिलौना बन गया है कश्मीर भारत धर्म निरपेक्षता का पालन करते हुए काश्मीर की हिफाज़त कर रहा है , वहीँ पाकिस्तान धर्म के नाम पर कश्मीर पर अधिकार चाहता है । मुस्लिम-बहुल राज्य काश्मीर में , खून की होली खेलते आतंकवादियों के उत्पीडन से बचने के लिए , तकरीबन तीन लाख हिन्दू वहां से पलायन कर गए तथा एक लाख शांतिप्रिय , बुद्धिजीवी तथा उद्दार व्यक्तित्व वाले मुसलमान भी काश्मीर छोड़कर भारत के अन्य राज्यों में बस गए ।
१९४७ की आज़ादी के बाद से ही यह २२२, २४६ वर्ग किलोमीटर भूमि विवादित हैदक्षिण पूर्वी हिस्सा भारत का जम्मू-काश्मीर राज्य है जबकि उतर पश्चिमी भाग पकिस्तान के अधिकार में है

काश्मीर का नाम कैसे पडा -

प्राचीन ग्रंथों में मिले उल्लेख के अनुसार ऋषि कश्यप के नाम पर इसका नाम 'कश्यपामार' था जो बाद में 'कश्मीर' हो गया। सातवीं शताब्दी में Hiun-Tsang जब भारत आया तो उसने इसे 'काशिमिलो ' कहा।

कश्मीर की इस स्वर्गरुपी साझा ऋषि भूमि पर हिन्दू , मुस्लिम सदियों से साथ-साथ मिलकर रहते थे । कश्मीरी हिन्दुओं की ऋषि परंपरा तथा मुस्लिमों की सूफी-इस्लामिक परम्परा एक दुसरे की पूरक हुआ करती थी। दोनों ही समुदाय एक दुसरे के धर्म को पूरा सम्मान देते थे , तथा एक दुसरे के मंदिर और मस्जिदों में पूरी आस्था और विश्वास के जाया करते थे।

प्रसिद्द इतिहासकार कलहन के अनुसार , तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने काश्मीर में 'बौद्ध' धर्म का प्रचार प्रासार किया तथा नवीं शताब्दी होने तक काश्मीर में पूरी तरह से हिन्दू धर्म का वर्चस्व था।

चौदहवीं शताब्दी तक हिन्दू राजाओं का राज्य था यहाँ । फिर मुगलों के आगमन होने कारण १५ वीं शताब्दी मेंअनेक हिन्दू-तीर्थ नष्ट कर दिए गए और इस्लाम का प्रचार प्रसार होने लगा। १७ वीं शदाब्दी में अफगान शासकों ने काश्मीर की दुर्दशा कर दी। मुग़ल शासन काल का अंत हुआ ५०० वर्षों बाद जब सिक्खों द्वारा १८१९ में काश्मीरका राज्य हरण हुआ ।

१८४६ में प्रथम सिक्ख युद्ध के बाद यहाँ हिन्दू डोगरा शासकों का अधिपत्य हो गया। जिसमे महाराजा गुलाब सिंहका शासन काल १८४६ से १८५७, महाराजा रणबीर सिंह का १८५७ से १८८५ , महाराजा प्रताप सिंह १८८५ से १९२५तक तथा महाराजा हरी सिंह का शासन काल १९२५ से १९५० तक था। डोगरा शासकों ने ही काश्मीर को उसका आधुनिक स्वरुप प्रदान किया।

१९४७ में अंग्रेजी शासन समात होते ही काश्मीर विवादित हो गया। विभाजन के बाद भारत ने धर्म निरपेक्ष होनेके कारण हिन्दू और मुसलामानों दोनों को शरण दी , जबकि पाकिस्तान ने धर्म के नाम प़र पूरे काश्मीर कों हथियाना चाहा । अक्टूबर १९४७ में वहां के शासक महाराजा हरी सिंह ने ये फैसला किया की काश्मीर की जनता स्वेच्छा से भारत अथवा पाकिस्तान , जहाँ जाना चाहे वहां जा सकती है। लेकिन ये फैसला पाकिस्तान को मंजूर नहीं हुआ और उसने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया दिया क्यूंकि पाकिस्तान को लगता है की भारत के मुस्लिम -बहुल क्षेत्र उसके अधिकार में होने चाहिए। इस स्थिति में महाराजा हरि सिंह को भी भारत में ही शरण लेनी पड़ी।

यह युद्ध १९४८ तक जारी रहा , फिर प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरु ने युद्ध विराम की घोषणा कर दी तथा संयुक्तराष्ट्र से हस्तक्षेप की गुहार की । संयुक्त राष्ट्र ने अपने फैसले तथा सुझाव में कहा की - " काश्मीर का परिग्रहण भारत या पकिस्तान में होने के लिए निष्पक्ष जनमत-संग्रह होना चाहिए। " अर्थात काश्मीर वासियों की स्वेच्छा को प्रमुखता मिलनी चाहिए। लेकिन पाकिस्तान को भला कहाँ मजूर था ये निर्णय। उसे तो पूरा काश्मीर चाहिए। १९४९ में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों के मध्य एक नियंत्रण रेखा खींच दी गयी।

लेकिन पाकिस्तान शांत बैठने वालों में से नहीं है । वो समय-समय पर अपनी आतंकवादी गतिविधियों से काश्मीरकी शान्ति को भंग करता है , स्वर्ग के सामान सुन्दर धरती को मासूम इंसानों के खून से रक्तरंजित करता है तथा नयी पढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

ये तो था काश्मीर का इतिहास , लेकिन आज जब बासठवां गणतंत्र मनाने जा रहे हैं तो बस यही ख़याल आ रहा है की कसाब जैसा आतंकवादी ज़िंदा क्यूँ है । हमारे काश्मीर के भाई-बहन कब सुकून की जिंदगी बसर कर पायेंगे ।अलगाववादी नेता क्यूँ इस सुन्दर धरती को अपनी गन्दी राजनीति का हिस्सा बना रहे हैं। इस्लामिक मुल्क क्यूँ हमारे शांतिप्रिय मुस्लिम समुदाय को भड़का रहे हैं ।

आज अपने ही देश में , काश्मीर राज्य में हमारा राष्ट्रिय ध्वज जलाया जा रहा है। अलगाववादी नेता देश को बेचने की पुरजोर कोशिश में हैं। लेकिन सरकार को इन सब बातों से कोई सरोकार नहीं है। क्या काश्मीर वासी गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण करने की तमन्ना नहीं रखते ? क्या उग्रवादी , इस सुन्दर वादी के शांतिप्रिय भारत वासियों को गणतंत्र दिवस पर अपने राष्ट्रीय ध्वज को फ़हराने का अवसर नहीं देंगे ?

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ये तिरंगा , उम्र भर कश्मीर पर लहराएगा
जो भी टकराएगा हमसे , ख़ाक में मिल जाएगा

खून की लाली जवानों की बड़ा रंग लाई है
दुश्मनों ने चोट दिल में , मातमो की खाई है
आग बनके उनपे बरसी , है हमारी गोलियां
जो किया उसकी सजा , उन दुश्मनों ने पाई है
हिंद की धरती पे दुश्मन , लौट कर ना आएगा
ये तिरंगा उम्र भर कश्मीर पर लहराएगा

दुश्मन बिखर गए तिनके बनके , आँधियों के सामने
धज्जियाँ ऐसी उड़ीं , आया ना कोई थामने
उनकी लाशों को भी हमने, दफ़न इज्ज़त से किया
हमने एक मिसाल रखी , है जहाँ के सामने
अब वो दुश्मन , दुनिया से , आँखें मिला ना पायेगा
ये तिरंगा उम्र भर कश्मीर पर लहराएगा

जो वतन पर मर मिटे , हर दिल में उनका दर्द है
उनके घरवालों की रक्षा करना ,अपना फ़र्ज़ है
उनकी कुर्बानी भुला सकता नहीं ,अपना वतन ,
देश के हर नागरिक के सर पर ,उनका क़र्ज़ है
देश अपना उम्र भर ये क़र्ज़ भर ना पायेगा ,
ये तिरंगा उम्र भर कश्मीर पर लहराएगा

हम बनायेंगे शहीदों के समारक , हर जगह
हमने उनसे पायी है जीने की अपनी ये वजह
वक़्त के माथे पे लिख देंगे हम उनके नाम को
याद रखेगा ये भारत , उन शहीदों को सदा
कश्मीर का ज़र्रा ज़र्रा , उनके नगमे गायेगा
जो भी टकराएगा हमसे ख़ाक में मिल जाएगा

ये तिरंगा उम्र भर कश्मीर पर लहराएगा.....

वन्देमातरम ! वन्देमातरम ! वन्देमातरम !