विश्व गोरैय्या दिवस है आज --
विलुप्त होती पक्षियों की प्रजाति को
बचाईये! गर्मी के मौसम के आगमन पर अपनी छतों और बागीचे में पक्षियों के
लिया दाना और पानी रखिये!
बचपन में हमारे पुराने घर में , छतों के
नीचे लकड़ी की बल्लियाँ लगी रहती थीं। उन्हीं बल्लियों में गौरैय्या का एक
जोड़ा रहता था ! माँ ने उनका नाम शालू और टिंकू रखा हुआ था ! हम भाई बहन
शालू-टिंकू के साथ ही पले बढे।
आज सबसे दुखद ये है की गौरैय्या अब विलुप्त होती जा रही है!
