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Thursday, January 27, 2011

' उत्सव ' नामक युवक -- एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

'उत्सव' एक बेहद ज़हीन और गोल्ड-मेडलिस्ट युवक हैपिता BHU में mechanical engineering के अध्यापक हैं तथा माता ' मनोविज्ञान' विषय की अध्यापिका हैं

इस युवक ने रुचिका काण्ड के अपराधी - " राठोड " तथा अरुशी काण्ड के अपराधी ' डॉ तलवार ' पर कातिलाना हमला कर स्वयं ही सजा दे दीदोनों आरोपियों कों न्याय प्रक्रिया की मंथर गति के चलते सजा नहीं हुई और मासूम बच्चियों कों न्याय नहीं मिला

प्रश्न यह है की एक सभ्रांत परिवार के युवक उत्सव ने ऐसा कदम क्यूँ उठाया ?

  • उत्सव एक भावुक और संवेदनशील ह्रदय वाला युवक हैजिसने उन अनजान बच्चियों का दुःख महसूस किया जो असमय ही हिंसक पुरुषों की लालच और हिंसा का शिकार हुईं
  • उत्सव ने victims के परिवार वालों की असहायता कों महसूस कियाजिन्होंने इतने वर्ष दुःख और तिरस्कार झेले , उनका दर्द समझा
  • अपराधी समाज में निरंकुश घूम रहे हैं और कानून व्यवस्था लाचार है , इस लाचारगी कों महसूस किया
  • दोषियों कों सजा मिलनी ही चाहिए , ये सभी कहते हैं , लेकिन उसने उन्हें सजा दी ।
  • उत्सव कों अपने किये का कोई पछतावा नहीं है , क्यूंकि वो जानता है की उसने सज़ा गुनाहगारों कों दी है और ये गुनाहगार कानून से बड़ी सफाई से बच निकलेंगे
  • उसे अपना अंजाम का कोई खौफ नहीं है , क्यूँ इस घृणित समाज में रहने की उसकी इच्छा समाप्त हो चुकी है
  • मई सन २००८ में , IBM बैंक के २६ वर्षीय एक युवक ने आत्महत्या कर ली थीअपने suicide note मेंउसने लिखा था - " मैंने ये दुनिया पूरी देख ली हैनया कुछ बचा नहीं है , इसलिए मरने के बाद आगे की दुनिया देखना चाहता हूँ " । आज नयी पीढ़ी , मानसिक रूप से बहुत सक्षम है , बहुत आगे तक सोच लेती है विज्ञान ने प्रकृति कों और रहस्यों कों काफी हद तक खोल दिया हैये रहस्योद्घाटन जीने की इच्छा कों भी समाप्त कर रहे हैंप्राकृतिक संतुलन ख़तम हो रहा है
  • उत्सव जैसे ज़हीन युवकों की आँखों में 'सपने' नहीं बल्कि सीने में आग है
  • आज उसे भी मानसिक रोगी कहकर , न्याय प्रक्रिया की शिथिलता द्वारा बचा लिया जाएगा
भारत में कोई नहीं सजा पाताचाहे वो आतंकवादी कसाब हो , राठोड हो , डॉ तलवार हो अथवा उत्सव होसब बच जायेंगे


युवकों से अपील -
  • अपने सपनों कों मरने मत दीजियेआपके सपने ही आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और आपकी हिफाज़त करते हैं
  • अपनी जिंदगी में संतुलन बनाए रखिये । अपने अन्दर की आग से खुद कों बचा कर रखिये । इस आग का सकारात्मक उपयोग कीजिये।
  • आस - पास हो रही घटनाओं से विचलित होकर ऐसे भयानक कदम मत उठाइये , जो आपके सुन्दर जीवन कों बर्बाद कर देये जीवन अनमोल है , इसकी कद्र कीजिये
  • समाज की कार्य प्रणाली से असंतोष है और मन में आक्रोश है तो सकारात्मक तरीके से अपना योगदान कीजियेसमाज में सुधार लाने के बहुत से विकल्प हैंहिंसा का मार्ग उचित नहीं है
  • आपका जीवन अनमोल है , इसलिए कोई भी ऐसा कदम मत उठाइये जिससे आपको नुक्सान पहुंचे ।
  • हर निर्णय लेने के पूर्व बहुत बार सोचिये
अभिभावकों से अपील -
  • अपने बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय गुजारिये
  • आपका जितना ज्यादा प्यार आपके बच्चों कों मिलेगा , वे उतना ही मज़बूत बनेंगे और आस पास घटित विसंगतियों कों झेलने की ताक़त पायेंगे
  • उनके साथ हर उम्र में भरपूर interact कीजियेउनके भावुक , बाल-मन में आने वाले हर प्रश्न कों जानिये और यथा शक्ति उनकी जिज्ञासाओं और उलझनों कों शांत कीजिये
  • ध्यान रहे - " जो बीज बोयेंगे आज , वही काटेंगे कल "
  • अपनी संतान कों अवसाद ग्रस्त होने से बचाएं ।