Sunday, October 24, 2010

ईर्ष्या की पराकाष्ठ से एक बुद्धिजीवी ब्लोगर ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया.

ईर्ष्या एक घातक मानसिक रोग है, इसका उदाहण ब्लॉग-जगत में भी मौजूद है।

अब मुझसे ईर्ष्या करने वाले एक अत्यंत बुद्धिजीवी ब्लोगर ने मेरे ही नाम की एक फर्जी 'ZEAL '- ID बनायीं है । जिससे वो हर एक ब्लॉग पर जाकर मेरे नाम से उलटी-सीधी टिप्पणियां कर रहा/रही है।

पाठकों को सचेत करना मेरा फर्ज था , इसलिए कर दिया।

अपनी हिफाज़त करना अब आपके ही हाथ में है।

उस फर्जी ZEAL - ID se संवाद अथवात्राचार सोच समझकर कीजियेगा।

और उस फर्जी ZEAL - ID...द्वारा की गयी अभद्र टिप्पणियों की जिम्मेदार मैं नहीं होउंगी।

शुभकामनाओं सहित ,
दिव्या

47 comments:

दर्शन लाल बवेजा said...

ख्याल रखंगा गे जी ते जवाब वी दयां गे जी
मैजिक नहीं ट्रिक है ये
रंग बदलती गिरगिट

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ठीक किया आपने...

well wisher said...

आपकी चिंता जायज़ है, मैं आपके साथ हूँ , आपके स्वर को मुखर किया है मैंने अपने ब्लॉग की पहली पोस्ट पर आपका स्वागत है, सबका स्वागत है.

well wisher said...

आपकी चिंता जायज़ है, मैं आपके साथ हूँ , आपके स्वर को मुखर किया है मैंने अपने ब्लॉग की पहली पोस्ट पर आपका स्वागत है, सबका स्वागत है.

डॉ. नूतन - नीति said...

my God ..It's Too much... haa par vo hamare follower me nahi aa sakta... aur naa hee ye post us date ki hongi...

कुमार राधारमण said...

हद हो गई!

Manoj K said...

सूचना के लिए धन्यवाद.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ये कौन हैं और इन्होंने कहां टिप्पणी की है, वह भी बता दीजिये.

डा० अमर कुमार said...
This comment has been removed by the author.
डा० अमर कुमार said...
This comment has been removed by the author.
NK Pandey said...

क्या एक जैसे दो आई डी भी बन सकते हैं?

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

मुझे भड़ास पर उस (कु)बुद्धिजीवी ब्लॉगर की टिप्पणी का इंतजार रहेगा जो कि वह ZEAL आई.डी.(जो कि आपसे संबद्ध है) से कर रहा है। आए तो उसका ये कमीनापन आप चाहें तो भारतीय कानूनी तरीके से निकलवा दिया जाए सारी चर्बी उतर जाएगी। शायद आपको पता हो कि अबभड़ास परिवार में आपकी छोटी बहन फ़रहीन मोमिन साइबर लॉ एक्सपर्ट है जो कि ऐसे छद्मचरों को आसानी से घेर कर सामने ला सकती है। जैसा आप उचित समझें
सप्रेम
भइया

मनोज कुमार said...

यह सब ग़लत है। ग़लती करने वाले पछताएंगे।

ZEAL said...

http://poojashandilya.blogspot.com/2010/10/blog-post_24.html

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@- भारतीय नागरिक ,

नीचे दिए गए लिंक पर उसने टिपण्णी की है, जिसका कंटेंट मिटा दिया गया है।

http://poojashandilya.blogspot.com/2010/10/blog-post_24.html

फर्जी जील द्वारा उस टिपण्णी में लिखा था - "मैं पगली और बेशरम जील हूँ "

उस Fake 'ZEAL' ID ने और कहाँ कहाँ टिप्पणियां की हैं, यह ज्ञात नहीं है।

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ZEAL said...

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डॉ अमर।

मोडरेशन न होने के कारण पिछली पोस्ट पर एक फर्जी आई डी ' दीदी तेरा देवर ' द्वारा , जितनी गालियाँ मुझे मिली हैं वो तो आप सबने पढ़ी ही है। जिन लोगों ने मुझसे जबरदस्ती मोडरेशन हटवाया था, उन लोगों के दिल को अब ठंडक पहुँच गयी होगी। अर्थ देसाई शायद यही चाहते थे

मोडरेशन तो मैं भी नहीं चाहती और शायद कोई भी नहीं चाहता। लेकिन जब ईर्ष्या से ग्रस्त होकर बहुत से लोग दुश्मनी निभाने आने लगें और अश्लील तथा अभद्र टिप्पणियां करने लगें तो मजबूरी में अपनी इच्छा के खिलाफ मोडरेशन लगाना ही पड़ता है।

कुछ ब्लोगर निम्नलिखित छद्म नामों से पहले भी मेरे ब्लॉग पर टिपण्णी कर चुके हैं। [ अजित , ज्ञान, , रवि, नचनिया आदि ]। लेकिन अब तो हद हो गयी है । 'जील' नाम से भी हैरस करनी शुरू कर दिया है।

मोडरेशन के कारण टिपण्णी देर से प्रकाशित हो पाती है , इसके लिए मुझे भी खेद है लेकिन कोई दूसरा उपाय नहीं था मेरे पास।

हो सके तो मजबूरी को समझिएगा

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ZEAL said...

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@ एन के पाण्डेय जी,

एक जैसी दो आई डी नहीं बन सकती लेकिन 'स्क्रीन नेम' या 'डिस्प्ले नेम' , बहुत लोगों का एक जैसा हो सकता है।

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ZEAL said...

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डॉ रुपेश ,

मुझे उम्मीद नहीं थी की कोई मेरी मदद करेगा लेकिन अगर फरहीन मेरी मदद कर दे तो बहुत अच्छा होगा। बस एक दुविधा है । वो व्यक्ति इतना गिरा हुआ है की ब्लोगिंग के बजाय अपना सारा समय फर्जी आई डी ही बनाता रहता है। भिन्न-भिन्न नामों से अभद्र कमेंट्स करता है । क्या इसका कोई समुचित इलाज हो सकता है ?

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सुधीर said...

जो ईर्ष्या की पराकाष्ठा से लबरेज है उसे बुद्धिजीवी ब्लॉगर तो मत लिखें। मानसिक संतुलन खोने वाले के साथ तो यह संबोधन और भी अटपटा लगता है। हर आईडी कमेंट के साथ ही अपना लिंक भी छोड़ती है, ऐसा है तो वह आईडी आसानी से पकड़ में आ जाएगी। सावधान करने के लिए शुक्रिया।

'उदय' said...

... अन्धेर नगरी चौपट राजा ... !!!

अजय कुमार said...

ब्लाग जगत के कोढ़ हैं ऐसे लोग ।

Ratan Singh Shekhawat said...

अफ़सोस जनक |

यश(वन्त) said...

ये बहुत ही शर्मनाक बात है.

Coral said...

pathetic ......... अब ये भी होने लगा है

सम्वेदना के स्वर said...

मोडेरेशन का कवच तो justified है अब।

G Vishwanath said...

दिव्याजी,
पढकर दुख होता है।
अच्छा हुआ आपने ने हमें सचेत कर दिया।
क्या इस फ़िर्जी आई डी पर आपकी तसवीर भी लगा दी है?
अच्छा हुआ के "दीदी तेरा देवर" की टिप्प्णी पढने से पहले ही आपने उसे मिटा दिया था।

इस मौके पर, हम भी आप सब को सचेत करना चाहते है।
वैसे मरी ब्लॉग जगत में किसी से भी दुश्मनी नहीं है पर हो सकता है के यह अनाम ब्लॉग्गर मुझे पर भी वार करेगा केवल इसलिए कि हम आपके ब्लॉग पर बहुत ज्यादा दिखाई देते हैं। क्या पता वह सोचता होगा my enemy's well wisher is also my enemy.

घोषणा करना चाहता हूँ कि किसी भी समय, किसी के ब्लॉग पर, मैं कभी कोई अभद्र टिप्पणी नहीं करूंगा।
कभी मजाक में हम कुछ गहरे मित्रों से थोडी बहुत liberties लेंगे पर दिल मेरा हमेंशा साफ़ रहेगा।
यदि किसी का लेख हमें बिल्कुल ही पसन्द नहीं तो मैं टिप्पणी नहीं करूंगा या कोई harmless/neutral टिप्पणी करके खिसक जाउंगा। य्यंग्य/अपमान/अभद्र भाषा मुझसे नहीं होगा। यदि किसी ने मेरे नाम से लिखी गई कोई ऐसी वैसी टिप्प्णी पढीं तो कृपया यह मान कर चलें के यह मेरी नहीं है और मुझे लिखकर बता दें। मेरा ईमेल आई डी मेरे प्रोफ़ाईल से पता कर सकते हैं।

दिव्याजी आप इस अनुभव से विचलित न हो। आखिर आप तो "लौह महिला" हैं।

जहाँ तक मोडरेशन का सवाल है, आप जानती हैं इस पर मेरे क्या विचार थे।
लगता है अब मेरा stand, vindicate हो रहा है।
आप जो उचित समझें, कीजिए। आप जो भी निश्चय करेंगे, हम आपका साथ देंगे।

शुभकामनाए
जी विश्वनाथ

दिगम्बर नासवा said...

बहुत अफ़सोस की बात है ये ... क्या होता जा रहा है समाज में ... फर्जी आई डी ... कोई सोच भी कैसे लेता है ...

गिरीश बिल्लोरे said...

दिव्या जी
आपका डुप्लीकेट
वाह

गिरीश बिल्लोरे said...

आप में ईर्षोत्पादक तत्व का बाहुल्य जो है

रचना दीक्षित said...

ये तो हद हो गई

ZEAL said...

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पूजा जी,

यहाँ आकर मैंने देखा की आप असहमति वाली टिप्पणियों से काफी व्यथित हो गयी हैं और काफी तिलमिलाई हुई हैं। जिस ब्लोगर को आप डरपोक कह रही हैं उसे ज्यादा डरपोक तो आप हैं , की नाम तक लिखने की हिम्मत नहीं है आपने । इसलिए दूसरों को डरपोक कहने से पहले सौ बार सोचा कीजिये।

जिस ब्लोगर की चर्चा आप कर रही हैं, वहां आप किस तरह झगडा कर रहीं थीं यह मैंने भी देखा था । उस समझदार ब्लोगर ने आपसे बहस करने के बजाये आपकी टिपण्णी डिलीट करके अपनी समझदारी का परिचय दिया है। यदि वो ब्लोगर चाहे तो आपके खिलाफ पोस्ट लगाकर सहानुभूति बटोर सकता/सकती है। लेकिन सब लोग इस तरह की घटिया पोस्ट लगाने में कोई पुरुषार्थ नहीं समझते। कुछ लोग शान्ति से जलजला टाइप की फालतू टिप्पणियां डिलीट कर देते हैं। यहाँ पर आप हाँ में हाँ मिलाने वालों को धन्यवाद दे रही हैं, मुझे झेल नहीं पा रही हैं। शायद अब आपको समझ में आ गया होगा की उस ब्लोगर ने आपकी टिप्पणियां क्यूँ डिलीट की थीं।

यदि हो सके तो आपकी पोस्ट पर मेरी असहमति को भी सम्मान दीजिये और बाकी लोगों की तरह मुझे भी आभार का हक़दार बनाइये।

आपकी पोस्ट पर अब जलजले आ रहे हैं। बधाई हो ।

आपके मित्रों से मिलकर अच्छा लगा।

एक ब्लोगर से तिलमिला कर ऐसी पोस्ट लगाने से आपका सारा पुरुषार्थ आपका जाहिर हो गया ।

आभार

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P S Bhakuni (Paanu) said...

farji id create krna ,farji information dena,yahan tk ki yadi aap apni profile main apni jnm tithi bhi galat detey hai to bhi aap cyber apraadh ke antargat aatey hain lakin vidambna yh hai ki cyber kanun bhi mahaj ek kanun bn kr rh gaya hai any dusrey kanuno ki bhanti,
bharhaal..........issey adhik kuch bhi khney ki stithi main nahi hun.

ZEAL said...

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पूजा को , उपरोक्त टिपण्णी उसके ब्लॉग पर लिखी थी..... जो वो थोड़ी देर बाद डिलीट कर देंगी। क्यूंकि उन्होंने मेरी पहले की सभी टिप्पणियां डिलीट कर दी हैं। उनसे असहमति बर्दाश्त नहीं होती , लेकिन अपनी पोस्ट पर उन्होंने दुसरे ब्लोगर को टिप्पणियां डिलीट करने के लिए डरपोक की संज्ञा दी है जबकि स्वयं उसी रोग से ग्रस्त हैं।

कहा भी गया है...

पर उपदेश कुशल बहुतेरे।

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ZEAL said...

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पूजा

तुम्हारी बेबसी अब जग जाहिर हो गयी है। धडाधड मेरी टिप्पणियां डिलीट कर रही हो । लेकिन चिंता मत करो, मैं तुम्हारी असहायता समझ रही हूँ। तुम्हारी तिलमिलाहट भी। लगता है लगातार कम्पूटर बैठी हो , मेरे पब्लिश करते ही मिटा देती हो। खाना वगैरह कुछ खाया की नहीं ? जाओ कुछ खा पि लो। और निश्चिन्त रहो, अब मेरी कोई टिपण्णी तुम्हारी पोस्ट पर नहीं आएगी।

लेकिन गाँठ बाँध लो--

पर उपदेश कुशल बहुतेरे।

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महेन्द्र मिश्र said...

धन्यवाद सूचना के लिए ...

वन्दना said...

ये तो गलत बात है………धन्यवाद सूचना के लिए ।

arvind said...

ye to bahut hi galat baat hai...pata nahi ye koun se mananubhav hain...khai irshya karanevaale khud hi jal jaate hain.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

कमाल है! ऎसा भी होता है यहाँ....

जयकृष्ण राय तुषार said...

blog jagat me kamchlau lekhkon kaviyo ki bharmar hai yahi patr patrikaon ki tarah koi editor hai nahi isliye net ka durupyog bhi ho raha hai

Udan Tashtari said...

सचेत करने का आभार.

निर्मला कपिला said...

कमाल है इतना कुछ हो गया हमे पता भी नही चला। दिव्या आज की मेरे ब्लाग पर टिप्पणी तुमने ही की है या??????????? कैसे पता चलेगा। शुभकामनायें।

mahendra verma said...

ऐसा हो रहा है तो ये ब्लाग जगत के लिए ठीक नहीं है।

एस.एम.मासूम said...

ईर्ष्या? आज तक मैं भी इसका कारण नहीं समझ सका. अच्छा किया जो आपने आगाह कर दिया.

JYOTI PRAKASH said...

परिस्थिति में मनः - स्थिति

Paper है |
Pass हो जायेगा | पास हो जायेंगे |
मूझेंगे नही | उलझेंगे नही |
[ आहार शुद्ध- सात्विक रखने से उद्वेग शांत हो , स्थिरता उत्पन्न करता है | ]

श्रीभगवानुवाच :- मन्मना भव ९(३४); १८(६५)
और भी देंखे : ५(२०); १२(१५)

ZEAL said...

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Well wisher नामक आई डी ने एक ब्लॉग खोला है 'Comment pot' । जिस पर 'My web page' पर क्लिक करने से 'ZEAL' यानि मेरा ब्लॉग पेज खुलता है।

मैं सार्वजनिक रूप से ये एलान करती हूँ की ' Comment pot' नामक ब्लॉग मेरा नहीं है।

ये ब्लॉग जिसने भी खोला है, उसका मंतव्य ज्ञात नहीं अभी तक।

उसने अभी तक उस पर दो पोस्ट्स लगायी हैं । एक मेरी और दूसरी अरविन्द मिश्र के नाम की। यह ब्लोगर जो भी है, वो चाहता क्या है , यह नहीं मालूम।

यदि कोई मेरी मदद कर सकता है तो मैं उसकी बहुत आभारी रहूंगी।

दिव्या [ZEAL]

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ZEAL said...

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@ Well wisher ji,


Since you have commented here on my post, i want to ask you- " who are you and why my blog page opens while clicking on your page ?

Please explain !

Awaiting your reply.

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ZEAL said...

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well wisher's blog link is following--

http://commentpot.blogspot.com/2010/10/best-comment-2.html

Well wisher ji, please unveil yourself.

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Amit Tiwari said...

ब्लॉग की दुनिया भी अब दुनिया के जैसी हो गयी है...
शुरूआती दिनों में लगता था कि यह एक स्वस्थ बौद्धिक बहस का मंच बनेगा... लेकिन समय के साथ यहाँ भी सब कुछ बाकि सब कुछ जैसा ही हो गया.
यह दुखद है कि आपके नाम का प्रयोग करके किसी ने ऐसा किया...
संभव है कि ऐसा और भी कई जगहों पर और भी कई नामो से किया जा रहा हो..
समस्या है कि प्रथम दृष्टया इसे पहचाना भी नहीं जा सकता है,,
हाँ इतना जरूर होना चाहिए कि ऐसी किसी भी अभद्र टिपण्णी कि दशा में एक दूसरे पर संदेह करने से बेहतर है कि ऐसी टिप्पणियों को मिटा दिया जाए..
और एक बात तो स्वीकार की ही जा सकती है कि जैसे ही कोई गलत शब्द टिपण्णी में इस्तेमाल में दिखें..
और अगर उस लिंक पर क्लिक करने से किसी का वास्तविक प्रोफाइल खुले तो अधिकतम सम्भावना यही है कि वह एक फर्जी प्रोफाइल बनाया गया होगा.
वास्तविक चित्र और प्रोफाइल के साथ एक सम्मानित ब्लॉग लिख रहे लोग भाषा का संयम बना कर रखते हैं..और रखना चाहिए...
और अगर संयम से काम लिया जाए तो ऐसे फर्जी लोग कुछ दिनों में खुद हतोत्साहित हो जायेंगे,...