Tuesday, October 2, 2012

ये दोगलापन क्यों ?

हिन्दू बेटियों  को जबरदस्ती लव जेहाद का शिकार बनाकर उनका धर्म परिवर्तन करके उन्हें मुसलमान बना देते हैं , जबकि हिना और बिलावल के मध्य प्रेम होने पर उन्हें इस्लाम से बेदखल होने और पत्थर से मार-मार कर मारने की बात करते हैं !

ये दोगलापन क्यों ? 

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पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बेटे और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुंट्टो के इश्क पर अब धर्म के ठेकेदारों की नजर पड़ी है. जहां एक ओर बांग्लादेश के मौलवियों ने दोनों को पत्थर से मारने की सजा देने की वकालत की है तो वहीं हिंदुस्तान के मौलवियों का कहना है कि दोनों को इस्लाम से बेदखल कर दिया जाना चाहिए.बरेली मुफ्तियों ने दोनों के प्रेम संबंधों को नाजायज करार देते हुए उन्हें शरीयत के कठघरे में खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि बिना कारण के बीवी का शौहर से तलाक मांगना जायज नहीं है. किसी मर्द को भी यह इजाजत नहीं है कि वह दूसरे की बीवी को बहका कर उसका घर बिगाड़े. ऐसा करने वाले दोनों ही शरीयत के मुजरिम हैं.दरगाह आला हजरत के केंद्रीय फतवा विभाग के मुफ्ती मुहम्मद कफील हदीस के हवाले से बताया कि जो औरत तलाक मांगे, वह जन्नत की खुशबू नहीं पाएगी. औरत पर यह लाजिम है कि शौहर परस्त बने. उसे ही सबसे ताकतवर, खूबसूरत और मालदार समझे, चाहें गरीब या बदसूरत ही क्यों न हो. अगर उसके मन में शौहर के बजाय किसी दूसरे मर्द का ख्याल आएगा तो यह नाजायज है. उन्होंने कहा कि इसी तरह मर्द के लिए भी हुक्म है. वह किसी शादीशुदा औरत से शादी का मुतालबा तो दूर, इस तरह की बात भी नहीं कर सकता.किला जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती अजीजुर्रहमान के मुताबिककिसी औरत के लिए अजनबी मर्द से बिना किसी आवश्यकता के बात करना हराम है. औरत अपने शौहर से तभी तलाक ले सकती है, जब वह निकम्मा, शराबी या फिर शरीयत का पाबंद न हो. तलाक तभी होगा, जब शौहर राजी होगा, तब बीवी को शौहर की मांगें माननी होंगी. किसी दूसरे मर्द से इश्क की खातिर तलाक लेने का हुक्म नहीं है।

पूरा समाचार यहाँ पढ़िए



10 comments:

ZEAL said...

अच्छा होगा अगर मुसलमान आपस में ही प्रेम करें तो ! कम से कम हमारी हिन्दू बेटियां इनके लव-जेहाद से तो बची रहेंगी।

Rajesh Kumari said...

wht a love story laila majnoo vala hshr to nahi hoga inka??

सूबेदार जी पटना said...

इस्लाम ही दोगला है ये समाज द्रोही है इन्हें समाप्त करना मानवता पर उपकार करना है.
दीर्घतमा
www.dirghatama.blogspot.com .

Rekha Joshi said...

हिन्दू बेटियां इनके लव जेहाद से बची रहे यही अच्छा है

Dheerendra singh Bhadauriya said...

आपकी बातों से सहमत,,,,

RECECNT POST: हम देख न सके,,,

SwaSaaSan said...

आपके ब्लॉग पर पहली बार आ पाया हूँ !

बहुत अच्छा है !

दिव्या जी; शायद हम इंसानों कि फितरत ही कुछ ऐसी है कि

हम हमारी नाकामियों, नालाय्कियों की वजहात केवल बाहर ही तलाशते हैं !

नहीं ?

तभी हमेशा उलजलूल तरीके से मुद्दों को देखते उठाते और सुदारने की मांगें करते भी हैं!

और तो और ऐसे मुद्दों को भड़काऊ और ओछेपन से उठाने वालों को अपना आदर्श माँ लेते हैं !

जैसे मोदी जी और गडकरी जी आपके आपके भी आदर्श हैं !

जैसे अन्नाजी, केजरीवाल जी किरण जी जरूरी के साथ साथ

हमारे समाज के इस वर्ग को ध्यान में रख कुछ अनर्गल "राईट टू रिजेक्ट ", राईट टू रिकाल" भी

निरर्थक मांग रहे हैं ! जिन्हें हम मूर्ख २५सों साल से चुनते आ रहे हैं

और अगले चुनाव में भी रिजेक्ट नहीं करेंगे उन्हें ५ साल से पहले वापस बुलाने का कानून मांगना ?

मजाक नहीं तो और क्या है ?

ऐसे ही राईट टू रिजेक्ट किसलिए ?

भारत में कहीं कोई ऐसा चुनाव नहीं होता जिसमे केवल मान्यता प्राप्त (?) राजनैतिक दलों के ही प्रतिनिधि मैदान में हों !

अभी कल ही 'NDTV' पर चर्चा में सुना कि उत्तरप्रदेश में बुद्धिजीवियों ने अपना दल गठित कर सभी सीटों पर

प्रबुद्ध प्रत्याशी उतारकर जनता को विकल्प दिया मगर परिणाम - सबकी जमानत जब्त !!!

ऐसे ही दूरदर्शन पर १९९४ में देर रात "वयस्क चलचित्रों" के प्रसारण शुरू होने पर

हंगामा खडा किया गया यह कहकर कि-

"हमारे बच्चे बिगड़ेंगे "

तब भी मैंने यही लिखा कि आपके बच्चे क्या ना देखें आप तय करें ना की सरकार !

सरकारी प्रसारण में काम से काम एक स्तरीयता तो थी / रहती ...

आज उससे कई गुना भद्दा और अशोभनीय सभी चेनल प्रसारित कर रहे हैं !

और सब चुप हैं ???

इसी तरह हमेशा हमारे निकम्मेपन को ढाँकने अथवा भुलाने के उद्देश्य से

ध्यान भटकाने के लिए ठीकरा दूसरों पर फोड़ते रहते हैं !

आपके ही लेख में

इस्लाम में औरत की स्थिति को बहुत अच्छी तरह दर्शाया गया है !

स्पष्ट है वहाँ औरत की औकात कुतिया की सी है !

यह जरूर हिन्दू या अन्य कोई भी गैर मुस्लिम लड़कियों को (और मुस्लिम लड़कियों को भी ) विचारना चाहिए !

और अगर जिस्मानी सुख से सम्बंधित मुस्लिम मर्दों के बारे में कोई भ्रान्ति है

तो वह भी इस विषय में वैज्ञानिक / शास्त्रोक्त श्रोतों के माध्यम से दूर करने के प्रयास किये जाने चाहिए !

किन्तु फिर भी कोई युवती स्वयं ( या अवयस्क कन्या के परिजन )
कुतिया बनने को ही बेहतर चुनाव माने (या जो वहीँ हैं और अन्यत्र विकल्पों के होते हुए भी बनी रहना चाहे )!

तो हम लोग केवल मुद्दों को उछालकर वाहवाही लूटने के अलावा और कुछ नहीं कर सकते !

बेहतर होता अगर आपका सन्देश आपकी तमाम छोटी बहनों को जागृत बनाने का कारण बनता !!!

(कुछेक परिवर्तनों के साथ मेरे ब्लॉग पर भी यह टिप्पणी ब्लॉग के रूप में पोस्ट करने जा रहा हूँ !)

Charchit Chittransh
Founder
SwaSaSan
(स्वप्न साकार संघ /स्वप्न साकार संकल्प / स्वतंत्रता साकार संघ)

ZEAL said...

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चर्चित जी , अपना काम है लिखना और जागरूक करना ! शेष व्यक्ति की अपनी-अपनी समझ है की कौन किस बात को कितना समझ पाता है। सुलझे दिमाग वाले मेरी बात को समझेंगे , लेकिन फसादी और विवादी तो सिर्फ अर्थ का अनर्थ ही करेंगे ना ? ऐसे लोगों का कोई इलाज नहीं है !

मैं केवल लिखती हूँ, किसी पर थोपती नहीं हूँ अपने विचार ! हर व्यक्ति स्वतंत्र है अपनी-अपनी समझ के अनुसार बात को ग्रहण करने के लिए !

कबीरा इस संसार में भाँती-भाँती के लोग !

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Maheshwari kaneri said...

हमारी बेटियां इससे बची रहनी चाहिए...

Alok Mohan said...

PAR MUJHE SAMJH ME NHI AATA ...SAB KUCH JANTE HUYE LADKIYA KAISE FAS JATI HAI

प्रवीण पाण्डेय said...

सबको सम्मति दे भगवान..