Sunday, January 22, 2017

दर्ज हुए इतिहास हो तुम

जीवित होते हुए भी
मर चुके हो तुम
इस जीवन में अब
तुम्हारा स्थान वो है जहाँ
मृत 'अपनों' की यादें रहती हैं 
तुम्हें याद तो किया जाएगा लेकिन
अब बातें न होंगीं तुमसे
तुम जाओ
तुम मुक्त हो
तुम उन्मुक्त उड़ो
अब पीछे से आवाज़ देने वाला
नहीं है कोई
कोई बाधा नहीं
कोई अवरोध नहीं
खाली वीरान सड़कों पर
अब निर्विघ्न चलो
मंज़िल खुद से तलाशो
कस कर हाथ पकडे अब
तुम्हारे कोई साथ नहीं
तुम मेरा वर्तमान नहीं
तुम मेरा भविष्य नही
हाँ , बीत चुके कुछ पन्नों पर,
दर्ज हुए इतिहास हो तुम ।

4 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 22 जनवरी 2017को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

savan kumar said...

सुन्दर शब्द रचना
http://savanxxx.blogspot.in

Digamber Naswa said...

गहरी सोच से उपजी रचना है ...

sunita agarwal said...

badhiya ..itahass dukhad ho to bhulana behtar :) jsk