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Friday, December 3, 2010

क्या प्रेम-विवाह करना गुनाह है ? -- Love marriage

दिल्ली में एक नवविवाहित जोड़ा अपने परिवार वालों से डरकर छुपता फिर रहा हैउन्हें डर है उनके घर वाले कहीं उन्हें मरवा ना डालेंउस दम्पति का जुर्म सिर्फ इतना है की उन्होंने प्रेम-विवाह किया है२८ साल का युवक जिसकी दोनों टांगें पोलिओ से ग्रस्त हैं , को एक ऐसी सुन्दर और सुशील लड़की मिली जो सर्व गुण संपन्न है तथा इस युवक से प्यार करती हैकल जब दोनों का सुन्दर , मासूम और सहमा हुआ चेहरा टीवी पर देखा तो मन में यही प्रश्न आया की क्या प्रेम-विवाह करने वाले घुट-घुट कर जीने तथा समाज से तिरस्कार मिलने के लिए अभिशप्त हैं ?

वही माता पिता जो अपने बच्चों की ख़ुशी के लिए अपना सर्वस्व कुर्बान करने के लिए तत्पर रहते हैं , वो आखिर क्यूँ अपनी संतान के खिलाफ हो जाते हैं जब वो अपनी पसंद की लड़की अथवा लड़के से शादी करना चाहते हैं

जब बच्चे वयस्क हो जाते हैं , तो वो अपना अच्छा बुरा समझने के लायक हो जाते हैंइसलिए विवाह जैसा अहम् फैसला संतान की मर्जी से ही होना चाहिएऔर माता-पिता को अपने बच्चे की ख़ुशी में शामिल होकर अपने आशीर्वाद के साथ , उनके चयन को सम्मान देकर उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए

जीवन में चाहे आपदाएं आयें, चाहे समस्याएं , चाहे तिरस्कार , प्रत्येक स्थिति में यदि कोई साथ देता है तो वो हैं माता पिता और परिवार वालेफिर प्रेम विवाह जैसी परिस्थिति में माँ बाप साथ क्यूँ नहीं देते जबकि उस समय उन मासूम बच्चों को समाज के प्रतिकार से बचने के लिए अपनों की सबसे ज्यादा ज़रुरत होती है

प्रेम तो एक सदगुण है फिर प्रेम विवाह समाज में इतना उपेक्षित क्यूँ है ? क्या मनचाहा जीवन-साथी पाने के लिए अपनों से जुदा होना ही नियति है मासूमों की ? या फिर क्रूर परिवार वाले अपने झूठे दंभ को पोषित करने के लिए इसी तरह प्रेम करने वालों की जान के प्यासे बने रहेंगे सदा ?