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Wednesday, August 5, 2015

विवाह

विवाह एक पवित्र संस्था है ! विवाह सूत्र में बंधकर, अपने दायित्वों को बेहतर अंजाम दिया जा सकता है ! गृहस्थ आश्रम भी जीवन का अहम हिस्सा है ! उसमें प्रवेश कर , उसमें रहते हुए भी परिवार और राष्ट्र , दोनों के प्रति अपना दायित्व पूरी निष्ठां के साथ निभाया जा सकता है ! अतः वैवाहिक जीवन को किसी भी प्रकार से कमतर आंकना या मखौल उड़ाना , उचित नहीं लगता ! यदि कुछ लोगों ने अविवाहित रहते हुए देश के प्रति अपना दायित्व निभाया है तो लाल बहादुर शास्त्री जैसे अनेकों भारत के लालों और लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं ने विवाहित रहकर अपना राष्ट्रधर्म, पूरी निष्ठां से निभाया है ! विवाहित जीवन में पत्नी अथवा पति एक दुसरे के लिए बहुत बड़ी ताकत और सम्बल साबित होते हैं ! ये बात तो वही जानता है जिसके पास ये दौलत है !
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आजकल वायरल हो रही इस तस्वीर द्वारा विवाह जैसी पवित्र सामाजिक रीती का मखौल उड़ाया गया है ! जो सर्वथा अनुचित है ! एक मानसिक विकार जैसा प्रतीत होता है !

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Friday, December 24, 2010

बेशर्मी की भी हदें होनी चाहिए.

१२ साल हो गए उन दोनों के विवाह कोतीन प्यारे -प्यारे बच्चे हैंअब पंचायत ने निर्णय दिया की एक गोत्र का होने के कारण दोनों को भाई बहन की तरह होना होगासमाज और बिरादरी से बाहर कर दिया गया पूरे परिवार को

ये पंचायत वाले दिमाग से पैदल होते हैं क्या ?

पता चला है , लड़के के भाई ने जायजाद में हिस्सा भाई को ना देना पड़े , इसलिए उसे जात बाहर करवा दियाअरे मत देते हिस्सा , लेकिन उनकी जिंदगी नरक क्यूँ कर दी?

माँ , बाप , भाई और घरवालों ने मिलकर साजिश कीजब अपने ही दरिन्दे निकल जाएँ तो गैरों से क्या उम्मीद ये लोग पंचायतों पर क्यूँ निर्भर करते हैं कोर्ट की शरण में क्यूँ नहीं जाते ?

क्या हल है इस समस्या का ?