आपको संकोच न हो इसलिए अपनी कुछ खामियां स्वयं ही लिख रही हूँ , आगे की कड़ी आप बनायेंगे।
- बहुत अंतर्मुखी हूँ ।
- संवेदनशील हूँ।
- अति गंभीर हूँ ।
- बचपन में रोती बहुत थी ( इस मामले में सुधर चुकी हूँ , रोती नहीं हूँ अब)
- जिससे स्नेह करती हूँ , उसपर स्नेह बहुत ज्यादा लुटाती हूँ , जिससे उसका दम घुटने लगता है ( सुधार जारी है , ज्ञान होते ही दूरी बना लेती हूँ ताकि लोगों को oxygen मिल सके )
- अक्सर सच बोलती हूँ , जो मित्रों को आहत कर देता है ( सुधार जारी है ..)
- संवेदनशील होने के कारण , कभी व्यक्तिगत दुःख तो कभी समाज में फैली अनियमितताओं से दुखी हो जाती थी जिसके फलस्वरूप मेरा उत्साह शून्य पर पहुँच जाता था , इसलिए अपना नाम 'ZEAL' रख लिया । जिसका अर्थ है - उमंग, उत्साह , जोश। आज बहुत से मित्र 'ज़ील' या 'ZEAL' पुकारने लगे हैं , जिससे उत्साह की निरंतरता बनी रहती है ।
- भावुक होने के कारण , समाज के भ्रष्टाचार से ह्रदय जल्दी व्यथित होता था और मित्रों का आरोप था की भावुक लोग कमज़ोर होते हैं , इसलिए खुद को लोहे के समान कठोर बनाना चाहती हूँ । ( प्रयास जारी है )
- कुछ मित्रों का ये भी कहना है की मैं बहुत कठोर हूँ और मुझे स्नेह करना ही नहीं आता । बिलकुल blunt हूँ। वैसे मुझे ये बात सच नहीं लगती। फिर भी लोगों के बार-बार ऐसा कहने से यही सच लगने लगा है (सुधार जारी है)
ज्यादातर लोग शिष्टाचारवश मेरी कमियाँ मुझे नहीं बताते । लेकिन आज सुधार दिवास है , इसलिए निसंकोच और बेझिझक होकर मेरे दोषों को इंगित कीजिये। मुझ पर उपकार होगा। सबसे ज्यादा कमियां बताने वाला मेरा सबसे बड़ा शुभ-चिन्तक होगा ।
आपके विचार जानने के बाद स्वयं में सुधार-प्रयासों की गति और भी तेज़ कर दी जायेगी ।
आपके स्वागत में ....