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Wednesday, November 9, 2011

महिला है--मुट्ठी में रखो, ना माने तो प्रताड़ित करो.

Big FM भोपाल के स्टेशन हेड 'राजीव मेनन ' , ने अपनी जूनियर RJ मानसी को छुट्टी से लौटने पर यह कहकर की वह बिना बताये भाग गयी , को नौकरी ज्वाइन नहीं करने दी। जबकि मानसी के पास लिखित में परमिशन थी। जब मानसी ने बताया की उसे कुछ gynaecological complication थी , जिसकी surgery के लिए उसे दिल्ली जाना पड़ा, तो राजीव मेनन ने उसे मजबूर किया की वह अपनी मेडिकल प्रोब्लम उसे बताये।

एक स्त्री यह बात अपने बॉस को बताएगी या एक डाक्टर को ? एक स्त्री , अपनी स्त्री-सम्बन्धी समस्याओं का जिक्र अपने पति से अथवा किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से ही करेगी ना की अपने ऑफिस में गैर पुरुष और बॉस से करेगी। जब उसने अपनी स्त्री सम्बन्धी व्याधि को discuss करने से इनकार किया तो उसे नौकरी ही नहीं ज्वाइन करने दी गयी मानसी न्याय के लिए भटक रही है। कहीं कोई सुनवाई नहीं। उसकी शिकायत दर्ज नहीं की जा रही वह मीडिया से बात कर रही है , लेकिन राजीव ने चुप्पी साध रखी है और मुंह छुपाता फिर रहा है।

कब तक जारी रहेगा ये शातिरपना। सदियों से स्वाभिमान के साथ जीने को तरसती नारी कब सर उठा कर जी सकेगी। यदि २३ वर्षीय मानसी , जिसे उचित, अनुचित और मर्यादाओं का पूरा ज्ञान है और वह बॉस के चंगुल में आने से इनकार करती है तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है।

यदि स्त्री असहज है अपनी बात कहने में तो उससे जबरदस्ती पूछना अनुचित है।

घर हो या बाहर, sexual harassment बदस्तूर जारी
हैसर उठाकर सम्मान और आजादी के साथ जीने का हक नहीं है स्त्री को। कब बदलेगी ये मानसिकता ? कब मिलेगा सम्मान नारी को?

क्या दो ही विकल्प हैं ? बॉस के हाथों की कठपुतली बनना या फिर नौकरी से तिरस्कृत हो निकाला जाना ?

घोर निंदा करती हूँ ऐसे घृणित कृत्य की। राजीव को उसकी गलती की पूरी सजा मिलनी चाहिए ताकि ऐसे अक्षम्य अपराधों की पुनरावृत्ति हो और स्त्रियों को उपभोग की वस्तु समझने से पहले कांपे इनकी अंतरात्मा भी।

Zeal