६१ वर्षीय त्रिवेदी ,
राजनीति के अपराधीकरण के खिलाफ वर्षों से लड़ रहे हैं।
जिस वोहरा कमिटी की वजह से "
सूचना का अधिकार"
क़ानून बन सका,
वह त्रिवेदी की कोर्ट में दायर याचिका के कारण ही संभव हो सका था।
लेकिन ममता बनर्जी के अभिमान और जिद के कारण उन्हें प्रस्तुत बजट पर चर्चा के बाद जवाब दिए बगैर ही इस्तीफ़ा देना पड़ा।
साहसिक फैसले का भी खामियाजा भुगतना पड़ता है।