Monday, June 11, 2012

नेहरू की ऐतिहासिक भूल या फिर ऐतिहासिक षड़यंत्र ?


नेहरू , जनमत संग्रह की बात कहते हुए काश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ में ले गये। सं।रा.संघ ने सैनिक कार्यवाही रुकवा दी। नेहरू ने राजा हरिसिंह को विस्थापित होने और शेख अब्दुल्ला को अपनी सारी शक्तियां सौंपने पर भी मजबूर किया। शेख ने शेष भारत से स्वयं को पृथक मानते हुए वहां आने वालों के लिए अनुमति पत्र लेना अनिवार्य कर दिया। इसी प्रकार अनुच्छेद 370 के माध्यम से उसने राज्य के लिए विशेष शक्तियां प्राप्त कर लीं और कौमी एकता को भड़का दिया। राष्ट्रवादियों ने अखंड भारत होने के लिए काश्मीर विलय के लिए आन्दोलन किया जिसमें कान्तिकारी और देशभक्त डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बढ़-चढ़ का भागीदारी की । उन्होंने बिना परमिट के काश्मीर यात्रा की जहाँ षड़यंत्र करके उनकी हत्या कर दी गयी।

नेहरू के कारण हजारों देशभक्तों और क्रांतिकारियों की जान चली गयीं।

हालांकि बाद में इस खूनी मौतों का सिलसिला उनके परिवार में भी चालू हो गया। जैसा बोया था वैसा ही काटा भी उन्होंने।

जय हिंद !
जय भारत।

18 comments:

Bharat Bhushan said...

बड़ा संवेदनशील मामला उठाया है आपने. बचपन में मैंने स्वयं देखा है कि अमृतसर से अपने ही मूलस्थान और घर जम्मू जाने के लिए हमें परमिट लेना पड़ा था. भारतीय संविधान के तहत बने कई अधिनियमों की कई धाराएँ जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होतीं.

Maheshwari kaneri said...

सही कहा दिव्या जी जैसा करोगे वैसा पाओगे...उस भूल की किमत हम आज तक चुकारहे है....

Aruna Kapoor said...

नेहरू ने जो भूलें की या षड्यंत्र रचा...उसका सिलसिला उनके जाने के बाद भी जारी रहा,जो अब दुगुनी रफ़्तार से चल ही रहा है!...अब तो और भी बहुत से राजकीय नेता और उद्योगपति इसे बढ़ावा दे रहे है...

...शायद अन्ना हजारे या स्वामी रामदेव और उन जैसे अन्य लोग कुछ अच्छा परिवर्तन ला सकें!
...उम्मीद पर तो दुनिया कायम है!

विनीत कुमार सिंह said...

१९४६ में ही जब शेख अब्दुल्ला ने विद्रोह किया था और वहां के तत्कालीन राजा हरी सिंह जी को सारे हिंदुवो के साथ कश्मीर छोड़ चले जाने के लिए कहा था तभी सभी को समझ जाना चाहिए था और साथ ही संभल जाना चाहिए था पर हुआ क्या इसका उल्टा और आज भी उसका दंश पूरा भारत झेलने को मजबूर है

जय हिंद
जय भारत

दिगम्बर नासवा said...

ऐसी कितनी ही भूलें इतिहास में दर्ज हैं .. पर अफ़सोस आज भी हम इनसे सबक नहीं ले रहे ...

Bikramjit said...

nehru - gandhi and all they were politcians END of the day .. and politics is a dirty business ..

a lot of problems were created because of this dirty politcis .. nehru made promises to Sikhs and all and Look what they did to PUNJAB.. divided it into three states ..

The problem is people in india dont take logic they are more into hindu-sikh or hindu - muslim

if the people of india start to think to be INDIANS first a lot of problems will be solved


Bikram's

मुकेश पाण्डेय चन्दन said...

आज भी कश्मीर में हालत वही है , बस नेहरु नहीं उनके vanshaj आ गये है ,

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (12-062012) को चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

JHAROKHA said...

divya ji
yahi karan hai ki aaj tak uska khamiyaja sabko bhugatna pad raha hai---
poonam

दर्शन कौर धनोय said...

नेहरु के करम आज भी हिन्दुस्तान भोग रहा हैं ...नेहरु को अपने ताज से ज्यादा अपना मुल्क कभी प्यारा नहीं था ..वरना आज हिंदुस्तान का नक्शा कुछ और ही होता ...

दिवस said...

एक शोध में पता चला था कि नेहरु और शेख अब्दुल्ला इरानी गाजी खानदान के दो भाई हैं। अब भाई-भाई के काम तो आएगा ही वो भी मुल्ला। काश हिन्दुओं में इतना भाईचारा होता तो क्या मजाल थी इन मुल्लों की?
डॉ. मुखर्जी की मौत बहुत रहस्यमय तरीके से हुई थी। पिछले वर्ष जब १५ अगस्त को भाजपा व संघ कार्यकर्ताओं ने कश्मीर में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने की मुहीम चलाई तो इसी UPA सरकार की तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने कलकत्ते से आधी रात को उनकी रेल विपरीत दिशा में दौड़ा दी वो भी कांग्रेस के कहने पर। कितना प्यार है कांग्रेस को इन जिहादियों से जो कश्मीर को हिन्दुस्थान से तोड़ रहे हैं।
उन कार्यकर्ताओं को तिरंगा फहराने से रोकने का क्या अर्थ था? सरकार क्या सन्देश देना चाहती है? यही कि तिरंगा जलाओ और पाकिस्तानी झंडा फहराओ?
इसकी सज़ा तो मिलेगी ही। अंत तो इनका निकट है।

दिवस said...

आप खुद ही देखिये। नेहरु हो या उसकी औलादें, क्या इनकी शक्लें हिन्दुस्तानी लगती हैं? इंदिरा को देखिये, राजिव और संजय को देखिये। किसी अरब देश के शेखों जैसी शक्लें हैं इनकी। राहुल और प्रियंका में थोडा इटली का तड़का आ जाने से ये फिरंगी ज्यादा लगते हैं।
इन विदेशियों के हाथ में सत्ता रही तो देश का तो यही हाल होगा। आज कश्मीर के लिए हम चिंतित हैं, कल पूरे हिन्दुस्थान का यह हाल होगा। शुरुआत तो हो ही चुकी है।

प्रतिभा सक्सेना said...

सबसे बड़ी ग़लती रही ,पटेल जैसे लौह-पुरुष को छोड़ कर नेहरू जैसे व्यक्ति को प्रधान मंत्री बनाया जाना !

निर्झर'नीर said...

Divas ji ka chintan sahi hai...आज कश्मीर के लिए हम चिंतित हैं, कल पूरे हिन्दुस्थान का यह हाल होगा। शुरुआत तो हो ही चुकी है।

यादें....ashok saluja . said...

बचपन से बुढापा आ गया ....
काश्मीर स्वर्ग से नर्क हो गया ...
ये सब सहते और देखते देखते !
वर्तमान और आने वाले पीढ़ी को
कब तक सहना होगा ये सब..... ..????
शुभकामनाये आप सब को !

anoop joshi said...

bhoot ki bhool bhawisya ko jehlni padti hai,

Suresh kumar said...

Divya ki ummeed kar raha hoon ki kab Modi ji prim ministar bane or desh ka kuch udaar ho .....
jai hind ....

Amit said...

nehru k baab ka naam to sabko pata hai, lekin kya kisi ko motilal k baap ka naam kisi ko pata hai.