Saturday, June 16, 2012

कपिल का कपट !

आई आई टी में भी मुस्लिम आरक्षण चाहते हैं ये बददिमाग नेता। न नेता सुधरेंगे , न ही मुसलमान। स्वाभिमान से जीने की तो कोई बात ही न करे इनसे। बस भीख दे दो। यहाँ भी आरक्षण , वहां भी आरक्षण दे दो। पहले ही आरक्षण के कारण शिक्षा का स्तर इतना गिर चुका है, यदि और किया तो बस नीम-हकीम डाक्टर, इंजिनियर और पायलट ही निकलेंगे। जैसे राजनीति में जड़-बुद्धि वाले बढ़ रहे हैं , वैसे ही योग्य युवाओं के साथ अन्याय करके इन मंद बुद्धि वालों की संख्या टिड्डी-दल की तरह बढ़ने लगेगी।

कपिल सिब्बल का दिमाग उलटा ही सोचता है हमेशा। कभी ये झंडा उल्टा लगाता है तो कभी उलटे-सीधे आईडियाज़ देता है , वो भी शिक्षा के क्षेत्र में। इसको तो नगर-निगम की कचरा सफाई का विभाग देना चाहिए। आई आई टी में कॉमन परीक्षा और अल्पसंख्यक कोटा जैसी वाहियात बात कर रहा है। एक परिक्षा जिसमें बेहद ज़हीन विद्याथियों को होना चाहिए , उसमें भी कठमुल्लों को घुसा रहा है जबरदस्ती । मदरसे में पढने वाले अब आई आई टी जैसे संस्थानों को दूषित करेंगे।

आजकल सिब्बल वॉशिंगटन में है, उच्च शिक्षा सम्बन्धी नीतियों पर विचार करने के लिए। जैसे नेहरू ने कश्मीर मसले पर संयुक्त राष्ट्र संघ को घसीट कर हम लोगों को सदियों तक के लिए श्रापित कर दिया है, वैसे ही अब ये सिब्बल IIT का मसला विदेशियों के हाथ में दे रहा है।

जागो अब तो...

Zeal

19 comments:

Ratan singh shekhawat said...

बस किसी बहाने वोट बैंक बन जाए, देश जाए भाड़ में, इन्हें क्या?

expression said...

ईश्वर बचाए हमारे बच्चों को....इसकी पकड़ से....

Sanju said...

Very nice post.....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

विनीत कुमार सिंह said...

दीदी इसे कहते हैं वोट बैंक की राजनीती...कोई भी बोटी फेंको पर वोट मिलना चाहिए...वोट के लिए कुछ भी करेगा ये सब...वोट बैंक की माया अपरम्पार है..देश में मचा हाहाकार है

अब तो राम ही राखा

Bharat Bhushan said...

शिक्षा के क्षेत्र को कपिल ने काफी भ्रष्ट कर दिया है. यह जग ज़ाहिर है.

Maheshwari kaneri said...

आरक्षण तो वोट बैंक है नेताओ का...ये अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर सकते हैं...

Suresh kumar said...

Kya kahe sab ko pata hai....

दिवस said...

आई आई टी बनाई ही विदेशियों ने थी तो अब उनका उपयोग तो यहाँ होना ही था। कपिल सिब्बल जैसे टटपूंजियों को क्या समझ शिक्षा की? देश के इन उच्चतम शिक्षण संस्थानों को तो कम से कम आरक्षण नामक कोढ़ से दूर रखो। आई आई टी चेन्नई के डायरेक्टर एक बार कह भी चुके हैं कि हमारे कॉलेजों में ५०% सीटें खाली रह जाती हैं। क्योंकि आरक्षित वर्ग के लोग पासिंग लायक अंक भी नहीं ला पाते इससे उनकी सीटों पर किसी सामान्य वर्ग को नहीं बैठाया जाता। वहीँ जो पास कर लेते हैं वे इंजीनियरिंग की पहली परीक्षा में ही भाग लेते हैं। यदि देश की योग्यताओं का सही इस्तेमाल किया जाए तो ये देश कहाँ पहुँच जाए?
मुल्लों को आई आई टी में पढाया भी दिया तो ये अग्नि, पृथ्वी अथवा ब्रह्मोस नहीं अपितु गौरी, गजनी व अब्दाली ही बनाएंगे।

Aruna Kapoor said...

जब देश के नेता हो, सिब्बल जैसे...
देश की हालत सुधरेगी कैसे?
कोंग्रेस से तो कुछ अपेक्षा भी नहीं है वैसे...
सभी राजनेताओं को दिख रहे है..सिर्फ पैसे!

सदा said...

आपकी बात बिल्‍कुल सही है ... बेहतरीन प्रस्‍तुति।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (17-06-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

प्रतुल वशिष्ठ said...

वर्तमान क्रांतिकारी 'दिवस' के विचारों में बहुत ज्वाला है... ऎसी ज्वालाओं से ही राष्ट्रभक्ति का हवन पूरा होगा. अभी तो दिवस जैसे कई सपूतों को वैचारिक आहुतियाँ देनी हैं.

mahendra verma said...

आरक्षण का यह सिलसिला देश के त्वरित विकास में बाधक है।

Bharat Bhushan said...

आपके ब्लॉग का नया रूपरंग सज गया है. आखिर भारत माँ के चरण पड़े हैं.

sunil choudhary said...

very nice post,,,

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

aane wale samay me kitnee bhayabah sthiti hone jaa rahi hai ab to samajh se pare hai...netaon kee manmani charmotkarsh par hai ...wakai dukhad..lekin aapka prayas rang jarur laayega,,sadar

lokendra singh rajput said...

१९ फीसदी वोटों के लिए बौरा गए हैं कांग्रेसी... इन्हें देश की तो कतई चिंता ही नहीं है...

surenderpal vaidya said...

आरक्षण के कोढ़ ने इस देश को तबाही के रास्ते पर डाल दिया है । कपिल सिब्बल , इसकी पार्टी की सरकार तथा नेता सब के सब अंग्रेजोँ के मानसपुत्र ही तो हैं । आज हमारा देश इनके हाथोँ मेँ सूरक्षित नहीँ है ...,,।

विरेन्द्र सिंह शेखावत said...

जहा आरक्षण है वही पर तो वोट है इन नेताओ का और इनको सिर्फ अपने वोट की लगी है.