Wednesday, December 19, 2012

वीर बलात्कारी पुरुष

भारत भूमि में जहाँ स्त्री को इतना सम्मान दिया जाता था, वहीँ आज स्त्री को मात्र  उपभोग की वस्तु  समझा जा रहा है। उसे आम की तरह चूसकर, फिर उसे दर्दनाक तरीके से मार-मारकर चलती गाडी से फेंक दिया जाता  है!  बलात्कारी खुले सांड की तरह घुमते हैं , सत्ता चैन की वंशी बजाती है और स्त्री कलप-कलप  कर मरती है!

दिल्ली में  गैंग रेप  की शिकार एक युवती जिस तरह की असहनीय मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुज़र रही है, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उसके माता पिता जितने दारुण दुःख झेल रहे हैं उसका अनुमान भी नहीं  कर सकते हैं ये वीर बलात्कारी!

दिल्ली की मुख्यमंत्री को यदि लड़कियों की सुरक्षा की ज़रा भी चिंता होती तो दिल्ली पुलिस को चप्पे-चप्पे पर चाक-चौबंद कर देती और ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति नहीं होती ! लेकिन नहीं एक मुख्यमंत्री जो स्वयं स्त्री हैं , वे इतनी असंवेदनशील क्यों हैं ?  उनके राज में अश्लीलता, बर्बरता , CRIME और बलात्कार की घटनाएं  बहुत तेज़ी से बढ़ी हैं !

यदि पुलिस और प्रशासन स्त्रियों की सुरक्षा नहीं कर सकती और अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सकती तो उसे इस्तीफ़ा दे देना चाहिए ताकि कोई और काबिल इंसान महिलाओं की सुरक्षा कर सके और उनको भी जीने का अधिकार दे सके !


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घटना का ताज़ा अपडेट--

By Kumar Rakesh--देल्ही रेप मार्क लड़की के बचने की उम्मीदें बेहद कम दिखाई दे रही हैं.
डॉक्टर के मुताबिक लड़की के शरीर में बुरी तरह दर्द है, सांस लेने में काफी तकलीफ है. नब्ज 130 पर है, जो सामान्य 72 से काफी ज्यादा है. संक्रमण बढ़ने से खूनमें प्लेटलेट्स
स्तर गिरकर 48 हजार रह गया है. जो सामान्य हालत में डेढ़ लाख से साढ़े 4 लाख होता है. पल्स रेट बढ़ना और प्लेटलेट्स घटना चिंता का कारण है.
वारदात के करीब 36 घंटे बाद मंगलवार सुबह पीड़ित लड़की को होश आया था, लेकिन वो बोल नहीं पाई. वह बोल नहीं पा रही है. उसने अपनी मां के नाम कई संदेश लिखे हैं. उसनेएक मैसेज लिखा है, 'मां, मैं जीना चाहती हूं!' रोते हुएउसने कागज पर अपना दर्द
बयान किया- 'लिफ्ट माई लेग, क्लीन माई थ्रोट' यानी मेरा पैर उठाओ और मेरा गला साफ करो. इसके बाद वो छत कीतरफ ताकती रही
और आंखों से आंसू निकलते रहे.
बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी ने बताया कि उसकी हालत बेहद खराब है. डॉक्टरों ने मुझे कहा है कि मर्द होने के नाते वो मुझे ये बताने की हालत में नहीं हैं कि पीड़ित लड़कीको क्या-क्या दिक्कतें हैं.
सूत्रों के मुताबिक उसकी आंतों में गहरी चोट है. उसके पेट पर किसी भारी चीज से वार किया गया. शरीर के अंदरूनी हिस्सों में कई जगह गंभीर चोटें हैं. गले औरबाहों में चोट के काफी निशान हैं. सिर को बार-बार फर्श या दीवारों पर पटका गया, जिससे 23 टांके लगाने पड़े
रीढ़ की हड्डी में भी चोट आई है. लड़की अब तक 5 बार कोमा में जा चुकी है. डॉक्टर लगातार लड़की का डायलिसिस कर रहे हैं. अब तक उसकी 5 बार लाइफ सेविंग सर्जरी की जा चुकी है।
Amar Verma ताजा अपडेट
#DelhiGangrape
चलती बस में गैंगरेप का शिकार हुई
लड़की की हालत और बिगड़ गई है। सफदरजंग
अस्पताल के सात डॉक्टरों ने गैंग रेप की शिकार

लड़की की हालत पर ऑफ दी रिकार्ड ब्रीफिंग में
ये बात कही। डॉक्टरों ने
बताया कि लड़की की हालत में ज्यादा सुधार
नहीं आया है। डॉक्टरों ने कहा कि लड़की ने कल
इशारे में थोड़ी बातचीत की थी, लेकिन लेकिन
आज वो इशारे में भी बात नहीं कर पा रही है।
सर्जरी से पहले कल लड़की ने अपने मां और
पिता से बात की थी। डॉक्टरों ने कहा कि पाइप
के जरिये लड़की को लिक्विड भोजन
दिया जा रहा है और उसे अभी भी वेंटिलेटर पर
रखा गया है।
डॉक्टरों के मुताबिक फिलहाल लड़की के शरीर में
कोई इंफेक्शन नही है, लेकिन इंफेक्शन
का खतरा बना हुआ है। हम पूरी तरह ख्याल रख
रहे हैं। अभी तक आंतों में गंभीर जख्म है।
लड़की 40 मिनट तक बस में और उसके बाद एक
घंटे तक सड़क पर रहने के बावजूद वो कैसे बच गई
ये हैरत की बात है।लड़की को खून देने वाले
लोगों का अस्पताल में तांता लगा हुआ है। कल
सर्जरी के पहले वो जिस तरह बात कर
रही थी आज सर्जरी के बाद आज वो बातचीत
नहीं कर पा रही है। उसकी हालत जस के तस
बनी हुई है।


  • Smart Rajat Gupta Journalist · Friends with Sanjay Agarwal
    DELHI :- रेप पीड़ित छात्रा ने लिखा, मुझे जीना है मा
    दिल्ली में रविवार को गैंगरेप का शिकार बनी छात्रा की हालत नाजुक बनी हुई है. सोमवार को अस्पताल में भर्ती हुई छात्रा की मौत से जंग जारी है, लेकिन इस बीच गजब की हिम्मत दिखाते हुए इस लड़की ने अपनी मां को एक संदेश लिखा.
    पीड़ित छात्रा वेंटीलेटर पर है. डॉक्टरों की कहना है कि अभी उसके बारे में कुछ कहा नही जा सकता, जख्म गहरे हैं और हालात नाजुक है. पीड़ित छात्रा अभी भी कुछ बोल नहीं पा रही है लेकिन उसने अपनी मां को संदेश लिखा और इस संदेश से हमारे समाज का एक कड़वा सच सामने आ गया है.
    संदेश में उसने लिखा, 'उस रात मेरा क्रेडिट कार्ड भी चला गया. वो दरिंदे मेरा मोबाइल भी उठा कर ले गए, लेकिन घर पर जो मेरा पुराना मोबाइल पड़ा है उसमें मेरे दो दोस्तों का नंबर है. उन्हें फोन करके बोल दीजिएगा कि मैं तीन महीने के लिए बाहर गई हूं.'
    ये एक लड़की होने का दर्द है. इस दर्द को समझना भी आसान नहीं है. लेकिन ये लड़की ना सिर्फ ये दर्द बर्दाश्त कर रही है बल्कि पूरे जज्बे के साथ इससे लड़ भी रही है. लेकिन शायद ये लड़की होने की मजबूरी है या फिर हमारे समाज और उसकी सोच से जो माहौल बना है उसकी मजबूरी. ये लड़की अपने दोस्तों के बीच वापस तो जाना चाहती है, लेकिन नहीं चाहती कि उन्हें कुछ भी पता चले.
    पीड़ित छात्रा को ये नहीं पता कि दो दिन से पूरा देश बस उसकी ही चर्चा कर रहा है. उसे ये भी नहीं पता उसके साथ आज पूरा समाज खड़ा है, उसे हौसला देने के लिए हर शख्स आगे आने को तैयार है. लेकिन इस सब के बीच एक बड़ा सच ये भी है कि जिस लड़की के साथ ऐसी बड़ी वारदात हो जाती है. वो भी सबसे पहले इसे छिपाना चाहती है.
    REPORT:-Smart Rajat Gupta Journalist DELHI
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18 comments:

Maheshwari kaneri said...

बहुत दर्दनाक और शर्मनाक घटना है..

Sunil Kumar said...

शर्म आती हैं अपने आप पर ....

Devdutta Prasoon said...

जब कोई 'आदमी','जानवर' हो जाये |
बेहतर है, उसे मार दिया जाये |
वहशीपन' में जब कोई 'नामवर' हो जाये -
बहतर है, है उसे मार दिया जाये ||
समझाओ,बुझाओ,नसीहत दो,लेकिन-
यह भी ध्यान रहे हम को-
हर कोशिश उस पर 'बेअसर'हो जाये |
बेहतर है उसे मार दिया जाये ||

प्रवीण पाण्डेय said...

जघन्यतम..

Ramakant Singh said...

मन को झकझोरती है ऐसी घटना
बहुत दर्दनाक और शर्मनाक घटना

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

बेहतर लेखनी !!!

Bhola-Krishna said...


यहाँ पर बच्चे मरे औ वहाँ बेटी मर रही,
हर तरफ है दर्द इतना सहन ना कर पाऊंगा !

क्या कहूँ कैसे कहूँ मैं अब न कुछ कह पाउँगा !!

बेटा उम्मीद न छोड़ना ! कभी न कभी तो चमत्कार होगा ! धन्यवाद प्रयासों के लिए

प्रतिभा सक्सेना said...

दिव्या जी, आपकी बताई सज़ा ठीक है पर उसके बाद माथा दाग़ कर उसे मौत आने तक जीने देना चाहिये.जिससे कि एक उदाहरण लोगों के सामने बना रहे .

पूरण खंडेलवाल said...

इनको ऐसी सजा देनी चाहिए जिससे ये जिन्दा तो रहे लेकिन खुद मौत की भीख मांगने पर मजबूर हो जाये !!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
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आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शुक्रवार (21-12-2012) के चर्चा मंच-११०० (कल हो न हो..) पर भी होगी!
सूचनार्थ...!

DR. ANWER JAMAL said...

रविवार (15 दिसंबर 2012) को दिल्ली में गैंग रेप की शिकार हुई लड़की से पूरे देश को सहानुभूति है। 6 दरिंदों ने उसके साथ रेप करने के लिए उसके साथ मारपीट भी की। वह सफ़दरजंग अस्पताल में वेंटीलेटर पर है और अब तक 5 बार कोमा में जा चुकी है। उसकी 5 बार लाइफ़ सेविंग सर्जरी की जा चुकी है। संसद के दोनों में भी यह मुददा उठा और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे जी ने अपना बयान भी जारी किया कि बसों में सफ़र को महफ़ूज़ बनाने के लिए वह क्या क़दम उठाएंगे ?
जो क़दम वह उठाएंगे, उनकी सराहना की जानी चाहिए लेकिन इसके बाद भी राजधानी और देश भर में बलात्कार होते रहेंगे, यह भविष्यवाणी की जा सकती है और इसका आधार यह है कि विकसित पश्चिमी देशों में इस तरह के सुरक्षात्मक उपाय किए जाने के बावजूद वहां आज भी बलात्कार होते हैं। केवल सुरक्षा उपायों से या सख्त सज़ाओं से बलात्कार को रोकना संभव नहीं है। सामाजिक और क़ानूनी उपायों के साथ उन नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों में फिर से विश्वास जगाने की भी ज़रूरत है, जिन्हें कि आधुनिकता और विलासिता के लिए जानबूझ कर भुला दिया गया है। नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों में विश्वास जगाये बिना एक पवित्र और सदाचारी समाज बनाना संभव नहीं है।
अफ़सोस की बात है कि हमारे समाज में पवित्रता और सदाचार को लाने के लिए वैसे प्रयास नहीं किए जा रहे हैं जैसे कि नैतिकता और सदाचार को ध्वस्त करने के लिए किए जा रहे हैं। हमारी नई नस्ल धन और संपन्नता के लिए कुछ भी कर सकती है और कर रही है। आज नशा, जुआ, नंगापन और क्राइम भी आय के साधनों में शुमार किए जाते हैं। आज ग़रीब होना पाप और अमीर का हर पाप समाज का ट्रेंड बन गया है। ईश्वर, धर्म, ऋषि-पैग़ंबरों के आदेश-निर्देश लोगों को व्यर्थ लगने लगे हैं। इसी का दंड विभिन्न तरीक़ो से हम भोग रहे हैं, जिनमें कि एक बलात्कार भी है। इसके लिए केवल केन्द्र सरकार को कोसना ही काफ़ी नहीं है क्योंकि अलग अलग पार्टी की राज्य सरकारों में बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं।
बलात्कार को मुददा बनाकर अपनी राजनीतिक भड़ास निकालने के बजाय हमें ईमानदारी से लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा के बारे में सोचना होगा।
आदमी आज भी वही है जोकि वह आदिम युग में था। समय के साथ साधन बदलते हैं लेकिन प्रकृति नहीं बदलती। बुरे लोगों की बुराई से बचने के लिए अच्छे लोगों को संगठित होकर अच्छे नियमों का पालन करना ही होगा। इसके सिवाय न पहले कोई उपाय था और न आज है।ईश्वर की एक निर्धारित व्यवस्था हैं, जिसका नाम सब जानते हैं। जब आदमी या औरत उससे बचकर किसी और मार्ग पर निकल जाए तो फिर वह जिस भी दलदल में धंस जाए तो उसके लिए वह ईश्वर को दोष न दे बल्कि ख़ुद को दे और कहे कि मैं ही पालनहार प्रभु के मार्गदर्शन को छोड़कर दूसरों के दर्शन और अपनी कामनाओं के पीछे चलता रहा/चलती रही।

अल्लाह तो लोगों पर तनिक भी अत्याचार नहीं करता, किन्तु लोग स्वयं ही अपने ऊपर अत्याचार करते है (44) जिस दिन वह उनको इकट्ठा करेगा तो ऐसा जान पड़ेगा जैसे वे दिन की एक घड़ी भर ठहरे थे। वे परस्पर एक-दूसरे को पहचानेंगे। वे लोग घाटे में पड़ गए, जिन्होंने अल्लाह से मिलने को झुठलाया और वे मार्ग न पा सके (45).
सूरा ए यूनुस आयत 44 व 45

Chand K Sharma said...

नेता पुलिस को दोषी बता कर अपना पल्ला झाड लेते हैं। न्यायपालिका, जनता, मीडिया, और नेता सभी पुलिस को दोषी मानते हैं मगर क्या कोई सोचता है कि पुलिस पर कितना वर्क लोड है?
पहले तो हर पोलिटिकल कुत्ते को बचाने के लिये आठ नौ कमाण्डो लगे रहते हैं जो 24 घन्टे उन के आगे पीछे घूमते हैं। यह जनता की सुरक्षा पर तैनात होने चाहियें थे। स्थानीय पुलिस नेताओं की आवाजावी को बन्दोबस्त करती रहती है। फिर कई तरह के बन्ध होते रहते हैं। त्यौहारों के दिन भी पुलिस वाले आधी रात तक सर्दी में ड्यूटी पर खडे रहते हैं ताकि आमीरजादे शराब पी कर सुरक्षित घर लौट सकें।
• पिछले साल दिल्ली पुलिस को आदेश दिये थे कि सार्वजनिक पार्कों में बैठे प्रेमी जोडों को पुलिस सुरक्षा दे। इन में से ज्यादातर लडके लडकियाँ अपने स्कूल - कालेज से बंक मार कर आते हैं।
• समलैंगिकों को प्रोत्साहन दिया।
• राम सैना पर 'भगवा आतंकवाद' का इलजाम लगा कर रेणुका चौधरी ने युवकों को 'पब भरो' की सलाह दे कर उकसाया था
• शीला दिक्षित ने दिल्ली में शराब खानों को देर रात तक खुले रहने और युवकों को बीयर पीने की छूट दी।

क्या समाज अपना चेहरा भी आयने में देखे गा?

"पलाश" said...

मुझे तो समझ ही नही आता कि आखिर डाक्टर उसे बचाने की क्या कोशिश कर रहे है, जिस व्यक्ति की आत्मा का हनन कैया गया हो तो फिर तन के बचने या ना बचने के मायने ही खत्म हो जाते हैं, और कुछ भी विज्ञान ने कर लिया हो मगर वो औषधी तो आज तक नही बना सकी जिससे आत्मा पर लगे जख्मों को भरा जा सके ... फिर इतनी सारी अपडेटेस का मतलब ही क्या ? चार दिन तक बहुत कुछ लिखा जायगा , पांचवे रोज या तो फिर कोई नयी कहानी मिलेगी या किसी को यूँ ही कहानी बना दिया जायगा । कितने लोग ऐसे होंगे जो आजीवन उसके लिये विचार करेंगें या समाज में दुबारा से उसको सामान्य जीवन देने मे उसका सम्बल बनेंगें । कितने लोग ऐसे होंगें जो उन निगाहों से सुरक्षित करेगी जिन निगाहों में उसे देखते ही सिर्फ यही होगा कि ये वही लडकी है जिसके साथ .......
आप सभी से इस ब्लाग के माध्यम से विनम्र निवेदन करना चहती हूँ कि लेखन की शक्ति को हमे पहचानना होगा और इसे आधार बनाना होगा उस मासूम के जीवन मे एक बार फिर सात रंग भरने में ..

Internet Marketing Company said...

बड़ी ही शर्मनाक घटना है, क्या ये हमारे ही समाज का हिस्सा हैं ? अगर ऐसा है तो कुचल डालो इस तरह के समाज के दुश्मनों को !!

ZEAL said...

बलात्कारियों के लिए जनता की मांग फांसी है , जबकि पुलिस उसने लिए उम्रकैद की मांग कर रही है ताकि वो इस गुंडों को खिला-पिला कर मोटा कर सके और तगड़े होकर बाहर आये ताकि अनेक और मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ कर सकें ! लड़की की तो ज़िन्दगी बर्बाद कर दी , उसकी पूरी आंत निकाल दी गयी है , अब वो कभी खाना भी नहीं खा सकेगी मुंह से ! इंटरा-वीनस फीड देना पड़ेगा। किसी भी अंग में यदि गैंग्रीन हो गया तो उसे भी काट कर अलग कर दिया जाएगा। वेंटिलेटर पर है , खुद से सांस भी नहीं ले सकती ! लड़की तो तिल-तिल मर रही है और बदले में अपराधी जेल में मुफ्त की रोटी तोड़ेंगे ?

इन बलात्कारियों को गोली से भून दो या फांसी पर लटकाओ ! समाज से गन्दगी हटाओ ! एक पल भी बर्दाश्त नहीं हैं ऐसे लोग समाज में !

Bhola-Krishna said...

स्वदेश से हजारों मील दूर , हमे वहाँ की दुर्दशा के समाचार देख सुन कर , सभी भारतवासियों के लिए बड़ी चिंता हो रही है !
आज दिन भर के राजपथ दिल्ली की घटनाओं को देख कर और भी कष्ट हुआ ! कैसी बर्बरता है यह ? निहत्थे बच्चों पर यूँ आक्रमण करना क्या उचित है ?
और जख्म पर नमक छिडकते देश के होम मिनिस्टर शिंदे का यह कहना कि उनके भी तीन बेटियां हैं ! वो बेचारे भी थर थर काँप रहे हैं ! द्या आती है उनपर हमे ! बेचारे बताना भूल गये कि उनके परिवार और उनकी सेवा में कितनी सरकारी गाडियां तैनात हैं ? कितने सरकारी सिपाही उनके 'प्रासाद' की रक्षा करते हैं ?, कितने 'गनर' उनकी गाड़ियों में बैठ कर उनकी बिटियों की रक्षा करते हैं जब वह दिल्ली में मटरगस्ती करती हैं ? सब सुविधाएँ होते हुए भी 'वह' डरे हुए हैं ? प्रभु आम भारतीयों पर द्या करने से पहले 'उनपर द्या करें !उन्हें सद्बुद्धि दें ,सद प्रेरणाएँ दें ,वे उचित निर्णय लें !

८३ वर्ष से मैं प्रतीक्षा कर रहा हूँ कि कुछ चमत्कार हो जाए लेकिन दशा दिन पर दिन बिगड़ती ही जा रही है !
अब तो केवल ऊपर वाले की दया की आश लगाए हैं !

ZEAL said...

हमारे देश में सिर्फ देशभक्तों को ही गिरफ्तार करने और फांसी पर लटकाने का रिवाज़ है! बलात्कारी खुले घुमते हैं यहाँ !

Anonymous said...

Howdy! This is kind of off topic but I need some guidance from an
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can figure things out pretty fast. I'm thinking about creating my own but I'm not sure
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