Friday, May 18, 2012

दशक का चिट्ठाकार-- एक समीक्षा.

सर्व-प्रथम ब्लॉग-सम्मान आयोजित करने वाले ब्लॉगर श्री रवीन्द्र जी को बधाई एवं शुभकामनाएं इस आयोजन के लिए।

आजकल ब्लॉगजगत में गहमा-गहमी है। हर तरफ दशक का ब्लॉगर और दशक का चिट्ठा ही चर्चा का विषय बने हुए हैं। असंख्य आलेख आ चुके हैं इस पर। लेखकों में संतोष कम और असंतोष ज्यादा दिख रहा है। अतः यह ध्यान देने की ज़रुरत है की ऐसा क्यों है।

जज अथवा निर्णायक बनना एक अति-दुरूह कार्य है। इसके लिए "निष्पक्ष" होना पहली शर्त होती है। अर्थात निर्णायक मंडल को दोस्तीदारी और निज-हित से ऊपर उठकर इस सम्मान का सम्मान करना होगा , निर्णय और चयन प्रक्रिया के दौरान।

आचार्य चाणक्य के अनुसार , किसी भी कार्य को करने से पूर्व बहुत भली प्रकार से सोच बिचार लेना चाहिए की हम ये काम क्यों शुरू करने जा रहे हैं और इस कार्य से समाज को कितना लाभ हो रहा है।

चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होना बहुत ज़रूरी है। जैसे चुनाव के दौरान EVM मशीन में घोटाले होते हैं , उस प्रकार नाम के आगे बने गोलों में मतदान करने और सही परिणाम के उल्लिखित होने पर संशय बना रहता है।

निज कटुता के चलते कुछ ब्लॉगर्स की टिप्पणियां हटा दी जा रही हैं और मोडरेट भी कर दी जा रही हैं। सूचना मिली है की कुछ लोगों द्वारा अपनी पसंद का नाम देने पर उसे दर्शाया तो गया लेकिन २४ घंटों के अन्दर उस नाम को हटा भी दिया गया। इस प्रकार की हरकतों से आयोजक की मंशा संशय के दायरे में आ जाती है। और उनकी निष्पक्षता पर संदेह भी होता है।

चुनाव प्रक्रिया बेहद पारदर्शी होनी चाहिए। इसके लिए सर्वप्रथम एक नामों की सूची जारी करनी चाहिए । उसमें नामांकन , ब्लॉगर द्वारा स्वयं होना चाहिए। फिर उन नामों पर अन्य ब्लॉगर्स द्वारा वोटों के मिलने पर उनकी गणना होनी चाहिए। ब्लॉगर से ये अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए की वह अपना मत , अपने लिए इस्तेमाल कर सके। कभी-कभी यही एक मत निर्णायक साबित होता है।

जो संख्या अभी , दर्शायी जा रही है उस पर भी लोगों को संदेह है। अतः किसी के भी मन में आयोजक के प्रति कोई शक न आये इसके लिए मतदान कमेन्ट के माध्यम से होना चाहिए। जिसे सभी लोग देख सकें और अपने मन में किसी प्रकार का संशय न पालें।

बहुत से लोगों को यह भी आपत्ति है की इस सम्मान का नाम दशक का ब्लॉगर नहीं होना चाहिए, क्यों जो नाम सामने आये हैं उनमें से शायद ही किसी ने एक दशक पूरा किया हो। और कोई भी सम्मान उसके कार्य-काल की अवधी से नहीं अपितु उसकी योग्यता के आधार पर मिलता है। अतः मेरे विचार से इस समान का नाम " दशक का ब्लॉगर" न होकर "ब्लॉगर सम्मान--2011 हो तो बेहतर होगा। इससे एक लाभ यह भी होगा बुज़ुर्ग के साथ युवा ब्लॉगर्स को भी मौक़ा मिल सकेगा।

चूँकि मतदान करने वालों में युवा भी शामिल है और नवोदित भी शामिल है , जिसने दशक के चिट्ठाकारों को एक दशक तक पढ़ा ही नहीं है , अतः वे उनकी योग्यता से पूरी तरह परिचित ही नहीं हैं, फिर वे पूरे दशक में किये गए योगदान को जाने बगैर मतदान कैसे करेंगे? इस परिस्थिति में भी इसे दशक का नहीं बल्कि 2011 का सम्मान कहना ही ज्यादा उचित प्रतीत हो रहा है।

आयोजक को यदि अपने आयोजन को त्रुटी-रहित बनाना है तो आलोचनाओं को संज्ञान में लेना ही होगा। त्रुटियों को दूर करना होगा। चयन-प्रक्रिया पारदर्शी करनी होगी और इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि किसी के भी मन में द्वेष और वैमनस्य और निराशा न स्थान लेने पाये। क्योंकि हमारा उद्देश्य तो लेखकों को प्रोत्साहित करना है, उन्हें हतोत्साहित करना नहीं।

कुछ लेखक अपनी मर्यादाओं को लांघ रहे हैं । खुद को बेहतर और सुझाव देने वालों को लघुतर समझ , उनसे अपमान जनक भाषा में बात , दोषारोपण और कीचड उछाल रहे हैं । जो लेखनी का अपमान है। माँ सरस्वती का अपमान है। अक्षम्य है।

मेरे विचार से इस चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी एवं सफल बनाने के लिए इसे पुनः शुरू करना चाहिए, जिसमें आयोजन के नियम वा शर्तों का स्पष्ट उल्लेख करके ब्लॉगर्स द्वारा टिप्पणी के माध्यम से नामांकन आमंत्रित करना चाहिए।

एक निश्चित अवधी के बाद जब नामांकन-प्रक्रिया पूरी हो जाए तो चयन हेतू लोगों को मतदान के लिए आमंत्रित कीजिये ।

एक से ज्यादा वोटों को और बोगस वोटों को रोकने कि समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।


मैं अपनी पसंद के कुछ ब्लॉगर्स का नाम लिख रही हूँ। मेरी इच्छा है इन लेखक/लेखिकाओं के नामों को भी उस सूची में शामिल किया जाए।


१-वंदना गुप्ता
२-रचना
३-प्रतिभा सक्सेना
४-माहेश्वरी कनेरी,
५-जेन्नी शबनम,
६-फिरदौस,
७-शिल्पा मेहता,
८-अंशुमाला,
९-पल्लवी
१०-घुघूती बासूती,
११-पारुल,
१२-संगीता स्वरुप,
१३ संगीता पुरी,
१४- राजेश कुमारी,
१५-अदा
१६-रश्मि प्रभा
१७- सदा
१८-रश्मि रवीजा,
१९-विभा रानी श्रीवास्तव
२०-अंजू चौधरी
२१-मृदुला
२२-डॉ अरुणा कपूर
२३-सोनल रस्तोगी
२४- अनीता
२५-निर्मला कपिला
२५-रेखा श्रीवास्तव
२६-वाणी गीत
२७-अराधना
२८-निवेदिता
२९-वंदना अवस्थी दूबे
३०- कविता रावत
३१-क्षमा
३२- सुनीता शानू

३३-शोभना चौरे
आशा सक्सेना
आशा
जोगलेकर
साधना
वैद्य
रंजू भाटिया
मृदुला
प्रधान ,
-----------------------------------------

१- श्री भारत भूषण
२- पी सी गोदियाल
३-लोकेन्द्र सिंह राजपूत,
४ -महेंद्र वर्मा
५- प्रतुल वशिष्ठ
६- दिवस गौड़
७- दिनेश ( रविकर)
८- वाणभट्ट
९- वीरू भाई
१० संजय कटानवरे
११- अनूप शुक्ल
१२ रवि रतलामी
१३-अरविन्द मिश्र,
१४-अनवर जमाल,
१५-मंसूर अली
१६- अली
१७-एस मासूम।
१८-अमित श्रीवास्तव
१९-अरुण साथी
२०- कुंवर जी
२१-कुंवर कुसुमेश
२२ - अजय कुमार झा
२३ -रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
२४- चंद्रभूषण - गाफिल
२५- डॉ दराल,
२६- केवल राम
२७- संजय मो सम कौन
२८- कुश्वंश
२९- डॉ भोला-कृष्णा
३०-उन्मुक्त
३१-मनोज भारती
३२-मनोज ( विचार)
३३-सतीश पंचम
३४ -सुरेश चिपलुनकर
३५- संजय बोंगाडी
३६ -खुशदीप
३७- दिनेश राय दिवेदी
३८-सतीश सक्सेना
३९-राजेश उत्साही
४० -राकेश कुमार
४१- मुकेश पांडे (चन्दन)
४२-प्रवीण पण्डे
४३-प्रवीण शाह
४४-दीर्घतमा,
४५-पी एन सुब्रमन्यन
४६-जय कृष्ण तुषार
४७-सुरेन्द्र झंझट
४८-राहुल सिंह
४९-हंसराज सुज्ञ
५०-कैलाश शर्मा
५१-अलबेला खत्री
५२- डॉ श्याम गुप्त
५३-गिरीश बिल्लोरे
५४ -फिलिप शास्त्री
५५-दीपक बाबा
५६-अंतर सोहिल,
५७-महेंद्र श्रीवास्तव
५८- राजेन्द्र स्वर्णकार।

५९-कौशलेन्द्र।
६०- समीर लाल
६१- रजनीश झा।
६२-डॉ राजेंद्र तेला

६३-ललित शर्मा
६४-दीप पाण्डेय,
६५-विचार शून्य
६६
- अमित शर्मा
६७-हरदीप राणा 'कुंवर जी'
६८
-अविनाश चंद्र
६९-मुकेश कुमार सिन्हा,
७०
-आशीष राय
७१-रतन सिंह शेखावत
७२-यशवंत,
७३
-हिंदी ब्लॉग टिप्स,
७४
-चंद्रमौलेश्वर।
७५
-गिरधारी लाल खंकरियाल
७६-भारतीय नागरिक
अविनाश वाचस्पति
अरुण चन्द्र राय
हिमांशु,
अमरेन्द्र
त्रिपाठी।
सुनील
दत्त,
विश्वजीत
,
मान
सिंह पवार,
विनीत
कुमार सिंह
काजल
कुमार।
उदयवीर सिंह
सुबीर रावत
दिलबाग विर्क
डॉ आशुतोष मिश्र।

मरणोपरांत भी ब्लॉगर्स को सम्मानित किया जाए--

१- डॉ अमर कुमार,
२- डॉ रूपेश श्रीवास्तव
३-हिमांशु मोहन

मुझसे अनजाने में कहीं कोई त्रुटी रह गयी हो तो क्षमा अपेक्षित है ।
सम्मान समारोह को बेहतर बनाने के लिए विद्वान् पाठकों कि राय आमंत्रित है।

Zeal

48 comments:

नवीन प्रकाश said...

ज्यादातर बातों से सहमत पर आपकी सूची में भी तकनीकी ब्लोगर का नाम न पाकर निराशा हुयी . (रवि रतलामी जी अन्य विषयों में भी विद्वान हैं )

ZEAL said...

Naveen ji , I do not know the names of many bloggers. You can please suggest few names of technical bloggers. That is why the comment option is here.

thanks.
.

Aruna Kapoor said...

....आप का आकलन सही है!..इस सूची में मै डॉ.दिव्या श्रीवास्तव का नाम भी दर्ज करना चाहूंगी!...आप के सभी आलेख बेहतरीन है!

dheerendra said...

आपकी बातों पुर्ण रूप से सहमत हूँ किन्तु पहले चुनाव प्रकिया में पारदर्शिता तो लाये,..और वोटिग का अधिकार ६ माह तक के पुराने ब्लोगरो को मिलना चाहिए,...और अभी बहुत से अच्छे ब्लोगरों का नाम रह गया है,..
.वेवाक सुंदर प्रस्तुति,..बधाई ....

MY RECENT POST,,,,काव्यान्जलि ...: बेटी,,,,,
MY RECENT POST,,,,फुहार....: बदनसीबी,.....

वन्दना said...

दिव्या जी आपने बहुत सुन्दर सटीक और सार्थक विश्लेषण किया है और आज ऐसी ही जरूरत है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और आयोजन भी संदेह के घेरे मे ना आये ………वैसे आपने सबसे ऊपर मेरा नाम जो लिखा है उसे देखकर तो मै शाक्ड हो गयी …………:)मेरा नाम ऊपर देकर बेकार मे पंगा ना ले लें आप :)और हमे तो पुरस्कार का कोई लालच भी नही ……… लेकिन बाकि लोगो के लिए जैसे आपने सूची बनायी है यदि इसी तरह बनाकर पेश की जाये और फिर कहा जाये वोटिंग को वो भी कमेंट के साथ तो वास्तव मे पारदर्शिता और विश्वसनीयता होगी और कोई आपत्ति भी नही करेगा साथ ही एक चयन मंडल भी होना चाहिये और उनके नाम भी प्रकाशित होने चाहिये ताकि कोई गलती दिखे तो उन्हे सूचित किया जा सके ………बाकि सभी अपने अपने विचार रख रहे हैं देखें क्या संज्ञान लिया जाता है।बेशक आयोजन कटिबद्धता चाहता है और प्रयास सराहनीय है जैसा हमेशा कहती आई हूँ मगर यदि ब्लोगर्स को आपत्ति है तो उस पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।

DR. ANWER JAMAL said...

आपके सुझाव वास्तव में ही अच्छे हैं और इन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
नाम सुझाकर आपने चुनावकारियों का काम और ज़्यादा आसान कर दिया है।
परंतु इस नाचीज़ का कहना यह है कि हज़ारों ब्लॉगर्स के योगदान का आकलन चुनाव द्वारा संभव नहीं है।
जो ब्लॉगर्स कहीं कमेंट देने नहीं जाते, जो कभी ब्लॉगर्स मीट आयोजित नहीं करते, जो रू ब रू किसी से नहीं मिलते और जिनके फ़ोलोअर्स कम हैं, उन ब्लॉगर्स में से एक का भी नाम टॉप पर नहीं आ सकता।
इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

क्या साहित्यकारों के योगदान का आकलन किसी देश में जनता के चुनाव द्वारा किया जाता है ?
यदि नहीं तो फिर ब्लॉगर्स के योगदान के आकलन के लिए चुनाव का आयोजन क्यों ?

इसके बावजूद भी आपने बहुत से ऐसे नाम सुझाएं हैं जिन्होंने वास्तव में ही हिंदी ब्लॉगिंग को बहुत कुछ दिया है।

एक अच्छी पोस्ट के लिए शुक्रिया !

रविकर फैजाबादी said...

सुन्दर प्रस्तुति |
बधाई स्वीकारें ||

Chirag Joshi said...

bilkul sahi kaha aapane

Randhir Singh Suman said...

nice

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

Although I don't expect any reward ( as i feel that I'm not a deserving candidate ) yet, i sincerely thanks to you Divya ji . Mujhe apnaa naam aapki list me dekhkar haardik prasanta hui. Thanks a lot once again !

Atul Shrivastava said...

बढिया सुझाव।

Ramakant Singh said...

I AGREE 100 PERCENT.

दिवस said...

sabse pahle hindi me comment na kar pane ke liye kshama prarthi hu. pata nahi kya hua, aaj hindi me type hi nahi ho raha?
aapke dwara sujhaae gaye sujhaav mujhe adhik behtar lage. halanki Ravindra Prabhat ji kaa yah chunavi abhiyan maine dekha nahi hai. unka mail aaya tha kintu link nahi khul raha. kahi or se bhi koi link nahi mila.
kintu jaisa ki aapke lekh se vidit hua, usme aapke sujhav bhi jode jaae to yah sarvshressth hoga.
aapki baat sahi hai ki matdaan ki vishvasniyta par prashn chinh lagaya ja sakta hai. hame kaise pata chale ki matdan jo asal me hua hai, parinam bhi wahi hai. ha comment ke maadhyam se voting ki jaa sakti hai. tab iski vishwasniyta par koi sandeh nahi kar sakega. pardarshita hona param aawashyak hai.
yah bhi sahi hai ki iska naam dashak ka blogger nahi hona chahiye. kyonki ek dashak poora karne wala yahan koi nahi. or mujh jaise bhi kuch hain jinhe 2 varsh bhi pure nahi hue. sarkaron ko bhi 5 varsh ka samay milta hai, hum bloggers ko to adhik se adhik 1 varsh kaa kaaryakal hona chahiye, uske baad fir chunav kijiye or shreshth blogger chuniye.
suchi me aapne mera naam bhi sujhaya iske liye aapka aabhari hu, kintu mujh jaise badtamiz ko kaun vote karega? sabhi bloggers ne to mujhe gunda bana diya hai. or isme ek sujhav ke chalte main Dr. Divya Srivastva ka naam sujhaunga.
aapke is aalekh me sabse achcha point yah laga ki aapne marnoprant lekhkon ke samman kii baat kahi hai. jise dr. amar, hinmanshu w rupesh bhaiya ko shamil kiya gaya hai. yah soch kewal aap hii rakh sakti hain, iske liye aap prashansa ki paatra hain.

aapka upyukt aalekh bahut hi saraahniy hai...

अमित श्रीवास्तव said...

हम लोगों का नाम शामिल करने के लिए आभार | अच्छों की कतार में खुद को शामिल देख अच्छा लगा | वैसे एक कटेगरी " दंपत्ति ब्लॉगर " अवार्ड की भी होनी चाहिए |

दिवस said...

Divya didi, ek baat or dhyan dene layak hai. pichhli baar parikalpna blog par jab yah post dekhi tab is soochi me aapka naam tha, kintu abhi dekha to wahan aapka naam nahi hai. yah kaise ho gaya? aapka naam wahan se kisne hataya? kya khud admin ne ya kisi kii sifarish par?
jo bhi ho, aisa hone par is chunav ki vishwasniyata sandheh ke ghere me hai...

दिवस said...

दिव्या दीदी, आपका नाम भी देखा था वहां। मेरे सिवा अन्यों ने भी देखा होगा। आयोजक ने ख़ास कर आपका नाम ही क्यों हटाया ? आयोजक को इसका जवाब देना चाहिए, की उन्होंने ऐसा क्यों किया?

उन्मुक्त said...

आपने अपने पसन्दीदा चिट्ठाकारों में मुझे भी रखा - आभार।

अजय कुमार झा said...

अरे बाप रे ..आपने तो पूरी बिनाका संगीत माला सजा दी दिव्या जी । आपके पसंद के ब्लॉगर्स में अपना नाम देख कर खुशी हुई ।

Rajesh Kumari said...

सबसे पहले तो दिव्या मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करते हुए हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहूंगी की आपने लिस्ट में मेरा भी नाम लिखा है हालाँकि मैं अभी बहुत दूर सोचती हूँ अपने आपको इस सम्मान के लिए
आपका नाम तो इस लिस्ट में सबसे पहले होना चाहिए था आपने ब्लॉग जगत को इतना कुछ दिया है .रही बात इस चुनाव प्रक्रिया की तो मैं आपसे पूर्णतः सहमत हूँ यही टिपण्णी मैंने कई जगह की है पारदर्शिता और ब्लोग्पोस्ट
की क्वालिटी के आधार पर चुनाव होना चाहिए |चलिए उन्हें जो करना है करने दीजिये कुछ रुकावटें या पत्थर आने से नदी का प्रवाह कम नहीं होता बल्कि नदी अपना रास्ता बदल लेती है |

ZEAL said...

अजय झा जी ,
यही तो मैं कहना चाहती हूँ। बिनाका गीत माला की तरह , माला का हर एक मोती खूबसूरत और अहम् है। मेरी माला में तो बहुत से मोती हैं। हर मोती अनमोल है मेरे लिए। जिसका नाम याद नहीं आया और यहाँ नहीं लिख सकी , वह भी मेरी माला में है। जब तक जीवित हूँ ब्लॉग जगत में। यह माला बड़े जतन से संभाले रखूंगी।

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

आपसे सहमत ………शुभकामनाएं

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

आपसे सहमत ………… शुभकामनाएं

Anonymous said...

बुरा- भला?
तथाकथित अंतर्राष्ट्रीय कवि 'महफूज़ अली' की कविता के जर्मनी के पाठ्यक्रम में शामिल होने की खबर न सिर्फ ब्लोग्स पर देखने को मिली, बल्कि उनके ब्लॉग पर 'दैनिक हिन्दुस्तान' समाचार पत्र में इस आशय का समाचार छपने की तस्वीर भी है| अखबार से इस समाचार का स्त्रोत पूछा गया है और जवाब अभी प्रतीक्षित है और शायद प्रतीक्षित ही रहेगा| सम्बंधित जर्मन प्रकाशक से संपर्क करने के बाद पता चला कि उनके यहाँ ऐसा कुछ नहीं छपा है| प्रकाशक के डिटेल्स इस प्रकार हैं -
STARK mbH & Co.
Bachstr. 2
85406 Zolling
Tel. 0180 3 179000 Fax 0180 3 179001
Handelsregister München HRA78578
Geschäftsführer Dr. Detlev Lux
info@stark-verlag.de
अपने फेसबुक प्रोफाईल पर महफूज़ अली खुद को जिस अंतर्राष्ट्रीय संस्था का चेयरमेन और सी.ई.ओ. बता रहे हैं, उस स्वयंसेवी संस्था में ऐसा कोई पद ही नहीं है और इस नाम का कोई अन्य अधिकारी भी नहीं है| संस्था का विवरण इस प्रकार है -
Jana Parejko
Mental Health Resource League for Mchenry County (MHRL)
info@mhrl.org
(815) 385-5745
ये सरासर धोखाधड़ी है, हमारे आपके विश्वास के साथ धोखा, हमारी सद्भावनाओं के साथ धोखा| जो नहीं है, खुद की उन उपलब्धियों का बखान खुद करना और दूसरों को धोखे में रखकर औरों से भी अपना महिमामंडन करवाना, कहीं से भी शराफत का काम नहीं है|
ब्लोगर्स मीट में, पुरस्कार वितरणों में या किताबें छपने छपवाने में हजारों रुपये खर्च करने वाले आप लोग सौ-पचास रुपये खर्च करके इन फोन नम्बर्स पर संपर्क करके असलियत जान सकते हैं और यदि ये भी मुश्किल है तो ईमेल एड्रेस तो है ही| मेरी विश्वसनीयता संदिग्ध लगे तो आप महफूज़ अली के ब्लॉग से इन प्रकाशक संस्थान और दुसरे संगठन का नाम नोट करके नेट से खुद भी इन नम्बर्स और आई.डी. की जानकारी ले सकते हैं| ब्लॉग और फेसबुक के इनके प्रोफाईल का स्नैप शोट सुरक्षित है, क्योंकि इन्हें बदल दिए जाने की पूरी संभावना है| झूठ के पाँव नहीं होते|
किसी लोभ में या लिहाज में हम लोग इन बातों को नजर अंदाज करते हैं तो ये झूठ के प्रचार प्रसार में हमारी सहभागिता है| फैसला आपके हाथ में है, आपको क्या स्वीकार्य है - छले जाना या सच्चाई को जानना?

Maheshwari kaneri said...

सुन्दर सटीक और सार्थक विश्लेषण किया है..अच्छों की कतार में खुद को शामिल देख अच्छा लगा.इस सूची में डॉ.दिव्या श्रीवास्तव का नाम भीदिया जाना चाहिए। एक अच्छी पोस्ट के लिए शुक्रिया !.बधाई . दिव्या......

ZEAL said...

इमानदार होने के लिए निडर होना, और निडर होने के लिए 'इमानदार' होना बहुत ज़रूरी है।

ZEAL said...

ब्लॉगजगत में और फेसबुक पर भी बहुत से लोगों को डरते देखा। डर कर के चुप रहते देखा । यदि सभी डरेंगे और लेखकों की लेखनियाँ भी कापेंगी , तो जनता तक बात कैसे पहुंचेगी?

दिवस said...

बेनामी महोदय, आपके द्वारा दी गयी जानकारी पर मैं विश्वास करता हूँ। महफूज़ अली जैसे लोगों पर मुझे हमेशा शंका रही है। जिस प्रकार ये लोग ब्लॉगर्स मीट आयोजित कर स्वयं ही खुद को व अपने लोगों को पुरूस्कार वितरण करते हैं, ये तो अपने मूंह मियाँ मिट्ठू बनने जैसा है। फर्जी उपलब्धियां व पद बताकर ये लोग मूर्खों की आँख में धुल झोंक सकते हैं, राष्ट्रवादियों की नहीं।
यदि महफूज़ अली उस संस्था में सच में उस पद पर होता, जैसा वो बता रहा है, तो मुझे तो उस संस्था पर ही संदेह है। ऊट-पटांग-छटांक लिखने वाले को यदि कोई संस्था ऐसा सम्मान दे तो वह संस्था ही स्वघोषित स्वयंसेवी होगी, जिसे इन्ही लोगों ने बनाया होगा।
महफूज़ अली जैसे मुल्लों ने हमेशा हिन्दुओं की आँख में धुल झोंकने का प्रयास किया है। आपने जो लिंक और फोन नंबर दिए हैं उनके लिए आपका धन्यवाद।
अब महफूज़ अली जैसे धोखेबाज जिहादी मुल्लों की पोल इन्ही की करतूतों से खुल रही है। धोखेबाज़ अधिक दिनों तक छुपा नहीं रह सकता।

Bharat Bhushan said...

ऊपर दिवस की टिप्पणियाँ पढ़ने लायक हैं.
आपकी सूची में मेघनेट जैसा बोरिंग ब्लॉग दिखा. बहुत निराशा हुई :))
मैं स्वयं व्यक्तिगत जीवन में थका हुआ हूँ. सो इंटरनेटी विवादों/पुरस्कारों को महत्व नहीं दे पाता.
हाँ ब्लॉगिंग जैसी आवश्यक चीज़ को पुरस्कार देने ही हों और उन पर विवाद कम करने हों तो आपके सुझाए तरीके से उन्हें काफ़ी हद तक लागू किया जा सकता है.

विनीत कुमार सिंह said...

मोतियों की माला को भी गुथे रखने के लिए गांठ की जरुरत होती है और जहाँ बड़ी गांठ डाक्टर दिव्या श्रीवास्तव जी का नाम जो इस सूचि में सबसे ऊपर होना चाहिए वो यहाँ नहीं है इससे निराशा हुई| क्युकी आपके लेखन से प्रभावित हो कई युवावों ने लिखना शुरू किया और ये स्वीकार करते हुए की मै भी उन युवावों में से ही एक हु जो आपके लेखनी से प्रभावित हो कुछ लिखने को अग्रसर हुआ मुझे कोई शर्मिंदगी नहीं बल्कि ये ख़ुशी है की मै आपसे प्रभावित हुआ....देश की लौह महिला से

नवीन प्रकाश said...

आप प्रमुख तकनीकी ब्लोग्स की एक सूची
हिंदी तकनीक समूह
यहाँ से प्राप्त कर सकती हैं .
और एक बात अगर ब्लॉग जगत की बात की जाए तो सबसे ज्यादा फालोवर्स वाला हिंदी ब्लॉग भी एक तकनीकी ब्लॉग ही है .
अलेक्सा रैंकिंग हो या पेज व्यू या पाठक संख्या सभी में टॉप 10 -20 ब्लॉग में एक दो तकनीकी ब्लॉग निश्चित ही आते हैं .
और उपयोगिता में भी तकनीकी ब्लॉग ज्यादातर पाठकों के लिए उपयोगी ही हैं .
ऐसे में तकनीकी ब्लॉग और तकनीकी ब्लोगर के साथ भेदभाव सही नहीं है .

veerubhai said...

असल बात है दिव्या जी आदमी काम करता रहे और अच्छा काम करता रहे .अपना अवदान समाज को देता रहे .यहाँ इनाम पद्म इनामों की तरह छद्म न बनें यही आकांक्षा है .काम करने वाले आमिर खान की तरह अपने आपको इन इनामातों से दूर रखे हुए है .

ब्लोगिंग करना खुद में एक ईनाम है .आपने लिखा और उसे पढ़ा गया इससे बड़ा और ईनाम और अपने होने का सुख और क्या हो सकता है .आभार आपका इस पोस्ट के लिए .ब्लोगिंग के महा समुन्दर में से चंद मोती चुन लाना कोई आसान काम नहीं है .असल बात है मोती बने रहें फलें फूलें पल्लवित होंवें .

मैंने दिव्या जी कभी पैसे या ईनाम के लिए नहीं लिखा .सौ से ज्यादा वार्ताएं आकाशवाणी से प्रसारित और दो हज़ार से ज्यादा विज्ञान के विविध विषयों पर जन प्रिय आलेख आरोग्य समाचार,राष्ट्रीय समाचार पत्रों विज्ञान पत्रिकाओं यथा विज्ञान ,विज्ञान प्रगति ,वैज्ञानिक ,आविष्कार से लेकर जनसत्ता ,हिन्दुस्तान ,नव भारत ,दैनिक नव ज्योति ,नै दुनिया ,दैनिक जागरण ,राजस्थान पत्रिका ,हरी भूमि ,रायपुर से पूर्व में प्रकाशित दैनिक अमृत सन्देश इतर सभी मेरी जानकारी में आये छोटे बड़े अखबारों में गत बीस -पचीस वर्षों तक लगातार लिखें हैं .प्रकाशित कियें हैं .कितने आलेख इसके अलावा रद्दी में गए पता नहीं .अखिल भारतीय विज्ञान लेखन पुरूस्कार (प्रथम )एक मर्तबा और प्रशंशा पुरूस्कार अनेक बार मर्तबा प्राप्त हुए .

अब ब्लोगिंग खुद एक पुरूस्कार है सम्पादकीय प्रभुत्व से निरपेक्ष .यह एक बड़ा काम है जिसे सभी को जिम्मेवारी से करना होगा .यहाँ आप खुद ही सम्पादक है खुद ही हाकर .खुद ही टिप्पणीकार ,प्रबंधक हैं .ब्लोगिंग ने सभी को बंधक बनाया हुआ है . .

Mukesh Kumar Sinha said...

aapse sahmat!

Girish Billore said...

दिव्या आभार तो करना ही होगा कि आपने चर्चा की
सहमत हूं आपकी सलाह उचित एवम युक्ति-संगत है
उम्मीद है अन्य आयोजक-प्रायोजक ध्यान रखेंगें
वैसे आप को बता दूं रवींद्र जी वाले फ़ार्म में एक ही व्यक्ति कई कई वोट दे सकता है.
यह भी एक विचारणीय मुद्दा है रवींद्र जी से बात करूंगा
पुन: आभार

ZEAL said...

एक सार्वजानिक सूचना- मेरी गलती से मेरे पिछले चार-पांच आलेख डिलीट हो गए, जिसे वापस पाना असंभव है। शायद एक आलेख आपकी टिप्पणियों सहित वापस ला सकुंगी .... खेद सहित...

Kailash Sharma said...

बहुत सार्थक और विचारणीय आलेख. लेकिन इसमें जो सबसे महत्वपूर्ण नाम आपका है वह गायब है. उस नाम के बिना कोई भी लिस्ट बेमानी है. आभार

ZEAL said...

.

समस्त लेखक/लेखिकाओं से अपील है की वे रवीन्द्र जी के आयोजन में सहयोग करें एवं अपने मत का निष्पक्ष प्रयोग करें, बिना किसी प्रकार के पूर्वाग्रह से ग्रसित हुए। रवींद्र जी ने ये आयोजन आप ही के लिए किया है, अतः आप सभी का सहयोह इस आयोजन को सफल एवं निष्पक्ष बनाने के लिए अपेक्षित है।

लिंक नीचे दे रही हूँ--

http://www.parikalpnaa.com/2012/05/blog-post_2828.html

Zeal
.

lokendra singh rajput said...

अगर चुनाव है तो निष्पक्ष ही होने चाहिए... चुनाव नहीं है तो जिसे मर्जी आये चुनो... निष्पक्षता बनाये रखने के लिए आपके सुझावों का उपयोग किया जा सकता है...
डॉ. दिव्या जी आपका बहुत आभार की अपने मुझे अपनी सूची में जगह दी...

mahendra verma said...

जो ब्लॅागर साल-दो-साल से ब्लॅागिंग में है वह वह नौ-दस साल पहले के ब्लॅागर के बारे में अपना निर्णय किस आधार पर देगा ? यह प्रश्न विचारणीय है। नवोदित ब्लॅागर पुराने ब्लॅागर के संपूर्ण कृतित्व से परिचित नहीं हैं।
चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।

mahendra verma said...

आपके द्वारा की गई समीक्षा में निष्पक्षता स्पष्ट झलक रही है।

India Darpan said...

बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


इंडिया दर्पण
की ओर से आभार।

veerubhai said...

प्रस्तुति अच्छी है मुद्दे भी यूं ही बरतरफ नहीं किये जा सकते .आपकी विनम्रता भी अनुकरणीय है .आके अनुचर अनुगामी हुए हम आज से .कृपया यहाँ भी पधारें -
सोमवार, 21 मई 2012
यह बोम्बे मेरी जान (चौथा भाग )
यह बोम्बे मेरी जान (चौथा भा ग )

. .
ram ram bhai

http://veerubhai1947.blogspot.in/

कविता रावत said...

आपने बहुत बढ़िया विश्लेषण प्रस्तुत किया है आपने .. आपके पसंदीदा ब्लोगर्स में मैं भी शामिल हूँ देखकर ही सम्मान मिल गया ... बाकी जो कुछ होगा सब ठीक ही होगा ... कुछ अच्छा कर दिखाने वाले विरले होते हैं जो पीछे नहीं हटते.. ...मेरे लिए तो यह ही सम्मान काफी है कि मेरा लिखा ब्लोगेर्स और पाठकों को पसंद आता है, जो मुझे लिखने के लिए प्रेरित करता है वर्ना घर परिवार और ऑफिस के बीच झूलते रहकर समय निकालना कहाँ संभव हो पाता....
बढ़िया सार्थक प्रस्तुति के लिए आभार !

veerubhai said...

में कोई इल्म नहीं किसने कब यह प्रतियोगिता आयोजित की .चर्चा मंच पर चर्चा भी किसी की पोस्ट की होती है तो उसे इत्तल्ला दी जाती है .बा -खबर हम क्यों नहीं रह पाए हमें नहीं मालूम .कृपया इस बिंदु पर भी प्रकाश डालें .
यह बोम्बे मेरी जान (चौथा भाग )http://veerubhai1947.blogspot.in/
तेरी आँखों की रिचाओं को पढ़ा है -
उसने ,
यकीन कर ,न कर .

कृपया यहाँ भी पधारें -
दमे में व्यायाम क्यों ?
दमे में व्यायाम क्यों ?
http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_5948.html

veerubhai said...

में कोई इल्म नहीं किसने कब यह प्रतियोगिता आयोजित की .चर्चा मंच पर चर्चा भी किसी की पोस्ट की होती है तो उसे इत्तल्ला दी जाती है .बा -खबर हम क्यों नहीं रह पाए हमें नहीं मालूम .कृपया इस बिंदु पर भी प्रकाश डालें .
यह बोम्बे मेरी जान (चौथा भाग )http://veerubhai1947.blogspot.in/
तेरी आँखों की रिचाओं को पढ़ा है -
उसने ,
यकीन कर ,न कर .

कृपया यहाँ भी पधारें -
दमे में व्यायाम क्यों ?
दमे में व्यायाम क्यों ?
http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_5948.html

Vaanbhatt said...

ब्लॉग को ब्लॉग ही रहने दो कोई नाम ना दो...लिखना कुछ लोगों की नियति होती है...जब मै यहाँ नहीं लिख रहा था...के डी ए, दूरसंचार, बिजली, जल संस्थान, पासपोर्ट ऑफिस आदि आदि विभागों में कागज़ काले कर रहा था...और दुश्मन बना रहा था...ब्लॉग मेरे लिए समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, असमानता, असहिष्णुता, और मानवीय मूल्यों के प्रति अपने उदगार व्यक्त करने का माध्यम है...दूसरों के विचारों से अवगत हों का अवसर भी यहाँ खूब मिलता है...

Vaanbhatt said...

ब्लॉग को ब्लॉग ही रहने दो कोई नाम ना दो...लिखना कुछ लोगों की नियति होती है...जब मै यहाँ नहीं लिख रहा था...के डी ए, दूरसंचार, बिजली, जल संस्थान, पासपोर्ट ऑफिस आदि आदि विभागों में कागज़ काले कर रहा था...और दुश्मन बना रहा था...ब्लॉग मेरे लिए समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, असमानता, असहिष्णुता, और मानवीय मूल्यों के प्रति अपने उदगार व्यक्त करने का माध्यम है...दूसरों के विचारों से अवगत हों का अवसर भी यहाँ खूब मिलता है...

Sadhana Vaid said...

इतने प्रतिष्ठित एवं लोकप्रिय ब्लॉगर्स की सूची में आपने मुझ जैसी गुमनाम ब्लॉगर का नाम भी सम्मिलित कर दिया यह देख कर अचंभित हूँ दिव्या जी ! मैं स्वयं को इस मेराथन रेस में कहीं भी नहीं पाती ! लेकिन अपने प्रति आपकी इस शुभाशंसा के लिए आपकी हृदय से आभारी हूँ ! आप बहुत दिनों से मेरे ब्लॉग पर नहीं आयी हैं ! मुझे आपकी प्रतीक्षा रहेगी ! सधन्यवाद !

वाणी गीत said...

आपकी लिस्ट में अपना नाम देखना अचंभित कर गया ! इतना आत्मविश्वास है मुझे कि मेरे लेखन की गुणवत्ता बढ़ी है , लेकिन मैं मानती हूँ कि मुझसे पहले अत्यंत उत्कृष्ट लेखन करते अनगिनत ब्लॉगर्स हैं . सम्मान और पुरस्कार उन्हें ही मिलना चाहिए !
बहुत आभार !