Saturday, May 12, 2012

जात-पात का जिम्मेदार कौन ?

जात-पात का जिम्मेदार कौन है ?---किसने बढ़ावा दिया इस जाति आधारित जनगणना को ?

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भारत की जाति आधारित जनगणना [Census] में घरेलु काम करने वाली महिलाओं [ Housewives] को वैश्या , भिखारी तथा कैदी की श्रेणी में रखा है


इस category में रखने के पीछे कारण दिया गया की ये सभी [Economically non-productive ] हैं अर्थात कुछ कमाते धमाते नहीं। इसलिये फालतू लोगों को इकठ्ठा कर दिया। अब अधिकारी महोदय को क्या कहें। अच्छा किया हम लोगों को हमारी औकात बता दी।


सुबह से रात मर-मर कर घर संभालो करो और बदले में तमगा क्या मिला है --" निकम्मे भिखारी "


बड़ा निडर अधिकारी है भाई, इतना साहसिक कार्य करते हुए ज़रा भी नहीं डरा?


एक और तो भाषण देते हैं, घर-बच्चे संभालो दूसरी ओर कमासुत होने के कारण भिखारी का दर्जा देते हैं?


एक घरेलु महिला की एक्सिडेंट में मौत होने पर मुआवजा भी कम ? वाह भाई वाह ! क्या जलवे हैं मर्दों के ?


एक घरेलु महिला [housewife] के कामों की कोई कीमत नहीं ?....अरे तो फिर गिनती भी मत करो हमारी कीड़े - मकोड़ों को गिनता है भला कोई ?


भिखारियों की इज्ज़त भी मिटटी में मिला दी...बिचारे काटोरा लिए दिन भर में २०० रूपए तो कमाते ही होंगे।


ओर ये वेश्याएं ?...अच्छी कमाई करती होंगी ?....फिर घरेलु महिलाओं के साथ clubbing करके क्यूँ बिचारी वैश्या ओर भिखारी को नीचा दिखा रहे हैं।


वैसे आपका क्या ख्याल है ?...Housewives....वैश्याएँ....कैदी ओर भिखारी , क्या सभी को एक ही श्रेणी में रखना उचित है ?

Zeal

6 comments:

Alok Mohan said...

हो सकता हो कुछ महिलाये शिकार हो

पर सब परशान हो ऐसा तो बिलकुल भी नही है

पुरुष अगर बाहर का काम करता है तो महिलाये घर सवारती है

दिवस said...

यह हरकत निहायत ही घटिया है। यदि अन्नपूर्णा को भिखारी, वैश्या अथवा कैदी कहा जाए तो क्या हो इस समाज का? Economically non-productive? तो क्या केवल दूध देने वाली भैंसें ही भैंस कहलाई जाएंगी, शेष का क्या होगा? इंसानों की गिनती हो रही है, कोई नोट छापने की मशीनों की नहीं। गृहणियों को इस प्रकार की श्रेणियों में रख उनका अपमान सीधे-सीधे जनानी जाती का अपमान है। इस प्रकार बाँट-बाँट कर गिनती करने के आवश्यकता ही क्या है? सीधे-सीधे गिनती नहीं आती क्या?
आपका यह लेख बिलकुल वाजिब है। इसकी जितनी सराहना की जाए वह कम है। बहुत-बहुत धन्यवाद।

दिवस said...

घर के काम संभालना कोई छोटी बात नहीं है। किसी समय गृहणियों को समाज में सम्मान की नजर से देखा जाता था, किन्तु उदारीकरण, निजीकरण व भूमंडलीकरण के इस दौर ने तो जैसे भावनाएं ही मार दीं। जो माल कमाए वही सम्मान का अधिकारी है। जबकि घर में माता का दर्जा पिता से भी उछ समझा जाता है। ऐसे में अन्नपूर्णा किसी कमासूत से कहीं अधिक सम्मान की पात्र है।

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार २२ /५/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी |

veerubhai said...

ये जन गिनती नरेश तो तुलसी बाबा के भी बाप निकले ,...नारी जाती एक है उसे खानों में बांटना नारी जाती का अपमान है .निठ्ठ्ल्ले बैठना उसके नसीब में कहाँ हैं ये बुद्धि गणेश जो कहदें सो कम ....कृपया यहाँ भी पधारें -
भ्रूण जीवी स्वान
http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_22.html
ram ram bhai .कृपया यहाँ भी पधारें -
मंगलवार, 22 मई 2012
ये बोम्बे मेरी जान (भाग -5)
http://veerubhai1947.blogspot.in/
यह बोम्बे मेरी जान (चौथा भाग )http://veerubhai1947.blogspot.in/




कृपया यहाँ भी पधारें -
दमे में व्यायाम क्यों ?
दमे में व्यायाम क्यों ?
http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_5948.html

veerubhai said...

ये जन गिनती नरेश तो तुलसी बाबा के भी बाप निकले ,...नारी जाती एक है उसे खानों में बांटना नारी जाती का अपमान है .निठ्ठ्ल्ले बैठना उसके नसीब में कहाँ हैं ये बुद्धि गणेश जो कहदें सो कम ....कृपया यहाँ भी पधारें -
भ्रूण जीवी स्वान
http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_22.html
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ये बोम्बे मेरी जान (भाग -5)
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यह बोम्बे मेरी जान (चौथा भाग )http://veerubhai1947.blogspot.in/




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दमे में व्यायाम क्यों ?
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