Thursday, May 3, 2012

एक घिनौना सच...

सेक्युलर पाखंडियों के लिए....

3 comments:

kunwarji's said...

बेहद भयावह स्थिति है, जिनके हाथो में देश की बागडोर है उनकी बागडोर सत्ता के घिनौने लालच में फंसी पड़ी है! अपने सुख के लिए वो किसी की भी बलि दे सकते है,लेकिन अभी बस हिन्दुओ को ही शहीद होना पड़ रहा है...
कुँवर जी,

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
चर्चा मंच सजा दिया, देख लीजिए आप।
टिप्पणियों से किसी को, देना मत सन्ताप।।
मित्रभाव से सभी को, देना सही सुझाव।
उद्गारों के साथ में, अंकित करना भाव।।

दिवस said...

सबसे पहले तो इस महत्वपूर्ण पोस्ट को यहाँ शेयर करने के लिए आपका ह्रदय से आभार। यह जानकारी सभी हिन्दुओं तक पहुंचना अति आवश्यक है।
आपने इतने उदाहरण गिना दिए जब हिन्दू मुस्लिम जिहाद का शिकार हुआ कि और कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं। किन्तु जिहाद का यह इतिहास कहीं अधिक भयानक है।
मुगलों व तुर्कों ने भारत भूमि पर कब्ज़ा कर यहाँ के हिन्दुओं से भूखे पेट कोड़ों से मार-मार कर कोल्हू के के बैल की तरह काम लिया। कई-कई दिन तक इस प्रकार श्रम करते व भूखे पेट ऊपर से कंटीले कोड़े खाते, यहाँ तक कि अस्सी साल के वृद्धों द्वारा भी ऐसा कर्म करते ये हिन्दू टूट कर मर जाते, फिर इनके स्थान पर किसी दुसरे हिन्दू को लगा दिया जाता। हिन्दू इन जिहादियों के लिए केवल एक मशीम जैसा ही है। हिन्दू स्त्रियाँ इनके लिए केवल हरम में सजाने का समान हैं। सेक्युलर कीड़ों को इतिहास याद रखना चाहिए। क्या वे अपनी माँ-बहन के बलात्कारियों को इतनी आसानी से माफ़ कर देंगे?
एक शोध के अनुसार बारहवीं शताब्दी तक भारतवर्ष में हिन्दुओं की आबादी करीब साठ करोड़ थी, किन्तु सत्रहवीं सदी आते-आते भारत की कुल आबादी बीस करोड़ रह गयी, इनमे भी कई तो मुसलमान थे। केवल पांच सौ वर्षों में करीब पचास करोड़ हिन्दुओं का नाश कर देने वाले कौम से कैसा भाईचारा?

जब तक कोई भारतीय मुसलमान खुद को गौरी-गजनी की औलाद मानेगा, उसे देशभक्त नहीं समझा जा सकता।

घाटी में जब श्रीनगर के लालचौक पर भाजपा ने तिरंगा फहराने की योजना बनाई तो सभी सेक्युलर संगठनों ने सामूहिक स्यापा समारोह आयोजित किया। यहाँ तक कि ममता बनर्जी ने तो भाजपा कार्यकर्ताओं की कश्मीर जाने वाली तरेम को ही उलटी दिशा में पहुंचा दिया ताकि मुस्लिम आतंकी संगठनों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे और मुल्ले व सेक्युलर कीड़ों के वोट हमारे खाते में गिरते रहें। किन्तु जब घाटी से पंडितों व सिक्खों को मार-मार कर भगाया जा रहा था तो यही सेक्युलर कुत्ते कान में तेल डालकर सो रहे थे।

सेक्युलर कीड़ों, अब भी जाग जाओ। तुम कितना भी सेक्युलरिज्म का राग अलाप कर गांधी बनने की कोशिश करों किन्तु इन जिहादी मुल्लों के लिए तुम सिर्फ काफिर हो।
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आप सच में सम्मान की पात्र हैं जो इतनी महत्वपूर्ण पोस्ट अपने पवित्र जील ब्लॉग के माध्यम से हम तक पहुंचाई। इस पोस्ट के लिए आपकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है। ब्लॉगर सुनील दत्त जी को भी विशेष धन्यवाद।