Tuesday, May 22, 2012

स्वार्थी मनुष्यों की दुनिया-

आमरण अनशन पर बैठे, पल-पल कमज़ोर होते हुए स्वामी ज्ञान-देव सानंद , जो अब अस्पताल पहुँच चुके हैं।





गंगा को प्रदूषित करता गंदा नाला।



सदियों से हमारी तारणहार रही गंगा को बचाने के लिए अनेक साधू-संत अपनी जान की परवाह किये बिना आमरण अनशन पर बैठ रहे हैं। लेकिन उनकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं है। राजनेताओं के कान पर जूँ नहीं रेंगती और मीडिया वालों को कुछ दिखाई नहीं देता तो बेचारे दिखाएं क्या। उन्हें तो बस "खान" दिखते हैं। सारे चैनल इन खानों को कवरेज देते हैं। नशा करके स्टेडियम में बवाल करने वाले गुंडों को प्राथमिकता दी जाती है चैनलों पर।

धिक्कार है ! धिकार है !

पहले अनशन पर बैठे स्वामी निगमानंद की मृत्यु हो गयी , फिर अरुण दास जी शहीद हो गए, बहन राजबाला ने अनशन पर बैठकर देश की खातिर जान गँवा दी। लेकिन स्वार्थ से भरे सत्ता-लोलुप राजनेताओं की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। मीडिया ने भी इन शहादतों को कोई अहमियत नहीं दी।

अब स्वामी ज्ञानदेव सानंद जी गंगा बचाने के लिए 'आमरण अनशन' पर बैठे हैं। निरंतर गिरते स्वाथ्य के कारण अस्पताल में भर्ती हो गए हैं। सरकार ने क्रूरता और नीचता की सारी हदें पार कर ली हैं। वे अब इनके भी मरने का इंतज़ार कर रही हैं।

हमारे देश में साधू संतों का जितना अपमान होता है, उतना कहीं नहीं होता।

गंदे नालों और बांधों से बचाओ इस पवित्र नदी गंगा को। बचाओं देश के संतों को। बचाओं अपनी संस्कृति को।

कहीं देर न हो जाए...

जय भारत।
जय गंगे।
हर-हर गंगे।

Zeal

20 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

Ganga ko bachana bahut zaruri hai.

dheerendra said...

आपने सही कहा,..बचाने में कहीं देर न हो जाय,.....

मुकेश पाण्डेय चन्दन said...

आपने बहुत ही सही बात कही . मैं इसके समर्थन में हु. सादर आभार

Maheshwari kaneri said...

सही कहा हमारे देश में साधू संत भी हमारी संस्कृति का हिस्सा है इनका अपमान नही होना चाहिए.... नदी नाले और बांध हमारी धरोहर है इन्हे बचाना हमारा कर्तव्य है....

Sanjay Jain said...

ganga bachao desh bachao

काजल कुमार Kajal Kumar said...

अब गंगा
मॉं कहाँ है

ये तो बस एक नदी भर है अब

कि‍से फ़ुर्सत है इस बात से आगे कि‍

सरकार के रात्रि‍भोज में
कौन कौन नहीं आने की अफ़वाह उड़ा रहा है
सि‍स्‍टम जूतों का है आदि‍
गुहार की क़ीमत अब कुछ भी नहीं

surenderpal vaidya said...

गंगा मेँ भारतीय संस्कृति के प्राण बसते हैँ । इसे बचाना ही होगा । धर्मनिरपेक्षता के नाम पर भारत की हिन्दू संस्कृति के प्रतीकों को मिटाने का क्रम जारी है । हमारे देश को एक मजबूत राष्ट्रवादी नेतृत्व की बहूत आवश्यकता है ।

प्रतुल वशिष्ठ said...

सच में कूट-कूटकर स्वार्थ भर चुका है... हमारे भीतर.

सोचता हूँ... इसके लिये किया क्या जा सकता है?

बहुत सोचा .... ज्ञानान्द जी के अनशन में समर्थन देने को क्यों न हम भी सांकेतिक एक दिवसीय उपवास करें!

वैचारिक समर्थन तो दिया ही जा सकता है.... लेकिन चिंता की बात तो फिर भी जस-की-तस बनी रहेगी..

माँ गंगा के लिये साधु चिंतित है... लेकिन नेता के शक्ल वाले डाकुओं के माथे पर शिकन तक नहीं....

अब कैसे समझाया जाये कि 'माँ को शुद्ध व पवित्र बनाने की हठ करने वाले भक्त को' .. कैसे बताया जाये कि ये मृत्यु का सौदा है...

जीते-जी माँ' के भजन गाये, आराधना की और अंत में मृत्यु का वरण कर स्वयं को होम कर देना भक्ति की पराकाष्ठा है.

भाव-विह्वल कर देते हैं ये दृश्य और सूचनायें... जब तक अनजान हैं... मज़े में हैं.. लेकिन शर्मसार कर देते हैं माँ गंगा के पुजारी...

अब दर्पण देखते हुए लज्जा ही आयेगी.... ब्लोगर-सम्मान पाने की एक तरफ होड़ मची हुई है... दूसरी तरफ जान-गँवाने की हठ तनी हुई है.


सच ही कहा है आपने 'मनुष्य स्वार्थ की हदें पार कर गया है.'

Asha Saxena said...

गंगा को बचाने केलिए प्रयत्न बहुत धीमी गति से चल रहे है आपने बिलकुल सही कहा है कहीं देर न हो जाए |
आशा

udaya veer singh said...

Ganga is the lifeline of Indian peninsula . Are the Indians unaware about lifeline ? revealing our unhealthiness......

दिगम्बर नासवा said...

Desh ka durbhagy hai ... Sanskriti ki raksha ke liye itne logon ka balidaan Bhi Kaam nahi AA paaya ... Kroor sarkar nahi jaag rahi ...

Anjana (Gudia) said...

Excellent and timely post! Hope your voice is heard before it is too late...

Shiv Kumar said...

देश की इस धरोहर को हम सब को मिलकर बचाना होगा ... अब यह काम नेताओं के बस का नहीं रहा .....
आपने सही कहा कही गंगा को बचने में देरी ना हो जाये ...
सार्थक लेख के लिए बधाई

सदा said...

बहुत सही कहा है आपने ... सार्थक प्रस्‍तुति।

Ankur jain said...

pani ka koi bhi source kyu na ho use bachana jaruri hai......

दिवस said...

सरकार तो स्वामी ज्ञानदेव को भी स्वामी निगमानंद की तरह सलटाने के चक्कर में है। इसलिए अब ऐसा लगता है कि दो-चार वाला रास्ता व्यर्थ जा रहा है। भूखें मर जाओ किन्तु कांग्रेसियों के कानों पर जूँ नहीं रेंगने वाली।
गंगा का सर्वनाश तो उस समय शुरू हो गया था जब उस पर तिहरी बाँध बनाया गया। गंगा को लुप्त होने में इस बाँध की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके विरोध में हज़ारों देशभक्तों ने पुलिस की लाठियों को झेला है। राजिव भाई के नेतृत्व में चले इस आन्दोलन में खुद राजिव भाई पुलिस की लाठियों का शिकार हुए व गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। किन्तु क्या फर्क पडा इन भूखे कांग्रेसियों को?
पवित्र गंगा को एक गन्दा नाला बना कर डाल दिया।
स्वामी ज्ञानदेव की उक्त तस्वीर को देखकर आँखों में आंसू आते हैं। नमन है स्वामी ज्ञानदेव को। साथ ही नमन है आपको जो आपने इस मुद्दे को जोर देकर ऊपर उठाया व देश की जनता को जागरूक किया।

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